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कौन हैं तसलीमा नसरीन? जानें क्यों भारत छोड़कर जाना पड़ा था बांग्लादेश

बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 19 साल बाद कोलकाता की जमीन पर कदम रखा है. साल 1994 में बांग्लादेश छोड़कर कई देशों में शरण लेने वाली तस्लीमा नसरीन पर पश्चिम बंगाल सरकार ने 2003 में प्रतिबंध लगा दिया था. उन्हें पश्चिम बंगाल आने की अनुमति नहीं थी.

कौन हैं तसलीमा नसरीन? जानें क्यों भारत छोड़कर जाना पड़ा था बांग्लादेश
तस्लीमा नसरीन कई सालों तक कोलकाता में रही थी.

पश्चिम बंगाल में 19 साल बाद बांग्लादेश की लेखिका तस्लीमा नसरीन की वापसी हुई है. 19 साल बाद, 1 अगस्त को तस्लीमा नसरीन यहां एक कार्यक्रम में शामिल होंगी. कोलकाता पहुंचने पर तस्लीमा नसरीन ने काफी खुश जताई है. उन्होंने कहा कि ये शहर उनको अपने घर जैसे लगता है.  आखिर क्यों तस्लीमा नसरीन को 19 सालों तक पश्चिम बंगाल में आने की अनुमित नहीं दी गई. आखिरी किन किताबों के कारण ये विवाद हुआ था. आइए जानते हैं इन सबके बारे में-

ये कहानी साल 1993 में तस्लीमा नसरीन की आई किताब 'लज्जा' से शुरू हुई थी. इस किताब में भारत में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों के बारे में उन्होंने बताया था. किताब ने बांग्लादेश के धार्मिक कट्टरपंथियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया. इस्लामी कट्टरपंथी नसरीन से नफरत करने लगे. यहां तक की बांग्लादेश में कट्टरपंथी मौलवियों ने उनके खिलाफ फतवे जारी किए. उन्हें फांसी देने की मांग की गई और उनके सिर पर इनाम रखा गया. अपनी जान पर खतरा देखते हुए वह 1994 में बांग्लादेश से भाग गईं. स्वीडन और अन्य यूरोपीय देशों में शरण ली. साल 2023 में तस्लीमा नसरीन भारत आए गई. वह दशकों से भारत में अस्थायी और रिन्यूएबल रेजिडेंशियल परमिट पर रह रही हैं. वो कई सालों तक कोलकाता में रही.

पश्चिम बंगाल सरकार ने साल 2003 में नसरीन की किताब ‘द्विखंडितो' (दो हिस्सों में बंटी) पर कथित तौर पर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के कारण प्रतिबंध लगा दिया था.

आगे की कहानी शुरू हुई साल 2003 में आई तस्लीमा नसरीन की किताब 'द्विखंडितो' (दो हिस्सों में बंटा हुआ) से. उनके विचारों और किताबों के लिए  उन्हें पश्चिम बंगाल से निकालने की मांग की गई. कट्टरपंथी ग्रुप्स ने कोलकाता में हिंसक बंद और दंगे करवाए. भारी दबाव में, उस समय की लेफ्ट फ्रंट सरकार ने कथित तौर पर घुटने टेक दिए. नसरीन को कोलकाता से बाहर जाना पड़ा. बाद में राज्य में तृणमूल की सरकार आई. तस्लीमा नसरीन को लगा की उनपर लगा बैन अब खत्म हो जाएगा. लेकिन ऐसे कुछ भी नहीं हुआ. तृणमूल सरकार ने भी उनके राज्य में आने पर रोक लगाए रखी. उनकी राइटिंग पर बैन जारी रहा. जिस शहर को वह अपना घर मानती थीं, उन्हें वहां पर कदम रखनी की अनुमति तक नहीं दी हई. 

19 साल बाद हुई कोलकाता में वापसी

कोलकाता में अपनी वापसी पर नसरीन ने खुशी जताई. उन्होंने कहा कि कोलकाता उनके लिए केवल रहने की जगह नहीं है, ये एक ऐसा शहर है, जहां उन्हें अपनापन महसूस होता है. सालों तक पश्चिम बंगाल से दूर रहने के बाद भी जुड़ाव कम नहीं हुआ.

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