President Bodyguard: गणतंत्र दिवस (Republic Day) की परेड हो या राष्ट्रपति भवन का कोई बड़ा कार्यक्रम, आपने टीवी पर देश के राष्ट्रपति के ठीक पीछे लंबे-चौड़े, शानदार डील-डौल वाले लोगों को खड़े देखा होगा. वे अक्सर चमचमाती सफेद या लाल शाही वर्दी में होते हैं. इन्हें देखकर हर किसी के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर सफेद कपड़ों में दिखने वाले ये रौबीले लोग कौन हैं. इनका सेलेक्शन कैसे होता है और राष्ट्रपति की सुरक्षा के अलावा ये क्या काम करते हैं. आइए आज आपको देश के इस सबसे VIP और सबसे पुराने सैन्य दस्ते की वो बातें बताते हैं, जो शायद ही आपको पता हों.
राष्ट्रपति के पीछे खड़े रहने वाले लोगों का क्या नाम है
राष्ट्रपति के पीछे साए की तरह रहने वाले इन जवानों को प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड (The President's Bodyguard) कहा जाता है. राष्ट्रपति भवन की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार यह भारतीय सेना (Indian Army) की सबसे पुरानी और सबसे सीनियर रेजिमेंट है. इस खास दस्ते की शुरुआत आज से करीब 253 साल पहले 1773 में वाराणसी (बनारस) में हुई थी. तब इसे गवर्नर्स बॉडीगार्ड कहा जाता था. आजादी के बाद साल 1950 में जब भारत एक गणतंत्र बना, तब इसका नाम बदलकर प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड कर दिया गया.
ये बॉडीगार्ड्स सफेद कपड़े क्यों पहनते हैं?
कई लोग कन्फ्यूज रहते हैं कि ये फौजी कभी लाल तो कभी सफेद कपड़ों में क्यों दिखते हैं. दरअसल, इनकी सर्दियों की औपचारिक वर्दी गहरे लाल रंग की होती है, लेकिन गर्मियों के मौसम में या कुछ खास प्रोटोकॉल इवेंट्स में ये सफेद रंग की बेहद शानदार वर्दी पहनते हैं. इनके बूट्स (जूते) और बेल्ट हमेशा गहरे काले रंग के होते हैं, जो इन्हें एक शाही लुक देते हैं.
इस दस्ते में कैसे शामिल हो सकते हैं
1. इस दस्ते में शामिल होने के लिए जवान का कद कम से कम 6 फीट (1.84 मीटर) होना जरूरी है.
2. पारंपरिक रूप से इस रेजिमेंट में हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के जाट, राजपूत और जाट सिख जवानों को शामिल किया जाता है.
3. ये जवान राष्ट्रपति भवन के कार्यक्रमों में 2 से 3 घंटे तक बिना हिले-डुले, हाथ में भारी भाला थामे एकदम सीधे खड़े रह सकते हैं.
मल्टी-टैलेंडेड वॉरियर्स होते हैं ये जवान
कई लोगों को लगता है कि ये जवान सिर्फ राष्ट्रपति के साथ औपचारिक कार्यक्रमों (Ceremonial Duties) में चलने और बग्गी के साथ रहने के लिए हैं, लेकिन ये जवान मल्टी-टैलेंटेड वॉरियर्स होते हैं. ये देश के सबसे बेहतरीन घुड़सवारों में से हैं, जो पोलो और हॉर्स राइडिंग में नेशनल रिकॉर्ड बना चुके हैं. ये आसमान से छलांग लगाने में माहिर जांबाज कमांडो भी हैं. युद्ध की स्थिति में ये बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को संभालने की पूरी ट्रेनिंग रखते हैं. राष्ट्रपति की सुरक्षा करने वाले ये जवान दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर (Operation Meghdoot) में भी देश के लिए मोर्चे पर तैनात रहते हैं. इन्होंने 1962 की चीन की जंग और 1965 की पाकिस्तान की जंग में भी हिस्सा लिया था.
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