इमरान हाशमी की फिल्म 'आवारापन 2'ने बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा रखा है. 19 साल बाद शिव पंडित के आवारापन को पर्दे पर फिर से देखने के लिए दर्शक थियेटर खिंचे चले जा रहे हैं. मैं भी 2007 वाली 'आवारापन' का जादू फिर से महसूस करना चाहती थी तो थियेटर में खिंची चली गई. लेकिन मैं सच कहूं तो इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं लगा, जिसकी वजह से यह लोगों को अपना दीवाना बना पाए, सिवाए इमरान हाशमी और विलेन पूरन गब्बी की अच्छी एक्टिंग, बढ़िया म्यूजिक और दिशा पाटनी के स्टालिश कपड़ों और ग्लैमरस अंदाज के. फिल्म में शिवम पंडित का दर्द सच्चा लगता है लेकिन फिर भी उनका आवारापन इमोशनली उतना ज्यादा कनेक्ट नहीं कर पाया, पिछली फिल्म के हिसाब से मैंने जितना सोचा था.
फिल्म में दिशा पाटनी की एक्टिंग बहुत ही कमजोर है. जारा का कैरेक्टर पूरी फिल्म में बहुत ही हल्का लगा. डॉन की बेटी और बहन होने के बाद भी पूरी फिल्म में बेचारी और असहाय सी नजर आईं. इंटरवल के बाद उनके किरदार ने कुछ रफ्तार जरूर पकड़ी लेकिन कुछ ही देर में फिर से धड़ाम हो गया. कुछ एक सीन में उनका कैरेक्टर थोड़ा स्ट्रॉग नजर आया, लेकिन महज कुछ ही पल के लिए. जब वह ड्रग्स का कारोबार करने वाली बैंकॉक की नामी डॉन नफीसा यानी कि शबाना आजमी से मिलने पहुचीं तो लगा कि अब शायद उनका कैरेक्टर रफ्तार पकड़ेगा. लेकिन वह अपनी एक्टिंग का जलवा दर्शकों पर नहीं बिखेर पाईं. दिशा की एक्टिंग दर्शक के तौर पर मेरे दिल पर खास कमाल करने में असफल रही.

इमरान हाशमी की एक्टिंग हर बार की तरह जबरदस्त है. उनकी एंट्री से मुझे लगा था कि 2007 वाला शिवम पंडित वापस आ गया है. क्यों कि उनकी आंखों में आलिया को खोने का वही गम फिर से दिखाई दे रहा था, जो बहुत ही सच्चा लगा. एक्टिंग शानदार है और एक्शन सीन भी उन्होंने जबरदस्त किए हैं. लेकिन कहानी कमजोर होने की वजह से शायद वह वो कमाल नहीं कर पाए जो जिसकी छाप उन्होंने 2007 में आई 'आवारापन'में छोड़ी थी. फिल्म की कहानी को अगर और अच्छी तरह तराशा गया होता तो बात कुछ और ही होती.

विलेन जोरावर की एक्टिंग तारीफ-ए-काबिल
आवारापन-2 में अगर किसी कैरेक्टर की तारीफ की जाए तो वो है विलेन जोरावर, यानी कि पूरन गब्बी की एक्टिंग की. फिल्म में पूरन गब्बी हिंदी फिल्मों के टिपिकल विलेन से अलग नजर आए. स्टालिश होने के साथ ही उनके सनकी किरदार ने फिल्म में कुछ हद तक जान फूकने की कोशिश जरूर की है. जोरावर की जब फिल्म में एंट्री हुई तो एक पल को वह नवाजुद्दीन सिद्दीकी से लगे, लेकिन जैसे ही वह धंधुली सी इमेज हटी तो पता चला कि ये तो पूरन गब्बी हैं. जेन जी विलेन के तौर पर उनके किरदार में सनक है, पागलपन है, कॉमेडी है और डर और खौफ भी. हालांकि वह हिंदू फिल्मों के खौफनाक और दिल में दहशद फैला देने वाले विलेन से अलग नजर आए. एंट्री के समय लगा कि ये कैसा विलेन है. लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है तो उनका किरदार भी समझ आने लगता है. हालांकि ये किरदार उतना डरावना भी नहीं है जैसा की आम तौर पर फिल्मों में देखने को मिलता है.

शबाना आजमी फिल्म में क्यों थी पता नहीं चला
शबाना आजमी एक बहुत अच्छी एक्ट्रेस हैं, ये सभी जानते हैं. लेकिन आवारापन-2 में उनका ड्रग्स माफिया डॉन नफीसा वाला किरदार कुछ खास समझ नहीं आया. ये दिमाग के एक दम ऊपर से निकल गया. बैंकॉक की सबसे बड़ी डॉन होने के बाद भी किरदार में वो बात ही नहीं दिखी. उनका रोल भी फिल्म में कुछ खास नजर नहीं आया और ये किरदार बहुत छोटा भी था. कुल मिलाकर उनकी एक्टिंग ने भी निराश कर दिया. कुछ देर तो मैं ये समझ ही नहीं पाई कि इस किरदार के लिए शबाना आजमी को क्यों चुना गया.

परेश रावल के बेटे अनिरुद्ध रावल ने खींचा ध्यान
आवारान-2 में परेश रावल के बेटे अनिरुद्ध रावल का किरदार लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने में जरूर सफल रहा है. उन्होंने दिशा पाटनी यानी कि जारा और जोरावर, यानी कि पूरन गब्बी के बड़े बाई सिकंदर का किरदार निभाया है, जिसका दिमाग बच्चे जैसा है. वह बात-बात पर डर जाता है. लेकिन उस किरदार के साथ जस्टिस करने में वह जरूर सफल रहे. बड़ी उम्र में मानसिक रूप से बच्चे वाले शख्स का उनका किरदार जरूर अच्छा लगा.
आरावापन 2 की कमजोर कहानी
2007 में आई फिल्म आवारापन भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर सकी थी लेकिन इसके म्यूजिक और इमरान और आलिया के किरदार को लोगों का बहुत प्यार मिला था. लेकिन आवारापन 2 भले ही बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है लेकिन कमजोर कहानी के चलते मेरे दिलो-दिमाग पर खास असर नहीं कर पाई. एक बच्ची को ढूंढने के लिए बैंकॉक पहुंचे शिवम पंडित की कहानी से मैं इमोशनली उतना जुड़ाव महसूस नहीं कर सकी जितना सोचकर मैं ये फिल्म देखने गई थी.

आवारापन 2 क्यों मचाई रही धमाल?
इस फिल्म को हाइप का बड़ा फायदा मिल रहा है. लोग शिवम पंडित को फिर से पर्दे पर देखने थियेटर पहुंच रहे हैं. वहीं फिल्म का म्यूजिक अच्छा है. तेरा-मेरा रिश्ता गाना आज भी पुरानी फिल्म की याद दिलाता है. फिल्म का बज इतना ज्यादा है कि मैं इसे देखने के लिए थियेटर तक खिंचीं चली गई. वो अलग बात है कि बाद में निराश रही.
आवरापन 2 में बढ़िया क्या है?
इमरान हाशमी की बड़े पर्दे पर लंबे समय के बाद एंट्री देखने के लिए इस फिल्म को देखने जाया जा सकता है. फिल्म में उनकी एक्टिंग अच्छी है और शिव पंडित का पुराना दर्द उनकी आंखों में देखने को मिल रहा है. फिल्म का म्यूजिक अच्छा है. विलेन बने पूरन गब्बी की एक्टिंग भी कुछ हद तक मनोरंजन करने में जरूर सफल रहेगी.

फिल्म का बढ़िया म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक अच्छा है. तेरा-मेरा रिश्ता गाना इमरान पर फिर से फिल्माया गया है, जिसने पुरानी फिल्म की याद फिर से ताजा कर दी. वहीं दूसरे गाने वे जुनून, ये आवारापन भी अच्छे थे. अच्छे गानों की वजह से भी इस फिल्म को देखा जा सकता है.