दिल्ली, मुंबई जैसे तमाम बड़े शहरों में हर साल प्राइवेट स्कूलों में बच्चे के एडमिशन के लिए जमकर मारामारी होती है. बड़े प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चे का एडमिशन करवाने के लिए कुछ लोग जुगाड़ लगाते हैं तो कुछ लाखों रुपये का डोनेशन देकर एडमिशन पाते हैं. हालांकि तेलंगाना के एक गांव ने इस ट्रेंड को पलटकर रख दिया है, यहां के लोगों ने मिलकर फैसला लिया है कि वो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों की बजाय सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे. इस फैसले पर आने से पहले गांव में एक के बाद एक कई बैठकें हुईं.
सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का प्रस्ताव हुआ पास
मामला निर्मल जिले के लक्ष्मणचंदा मंडल के बाबापुर गांव का है, यहां के लोगों ने एक अनोखी पहल की है. इस गांव के लोगों ने मिलकर गांव में शिक्षा के भविष्य पर खुलकर बात की. उन्होंने पंचायत में काफी चर्चा की और एक प्रस्ताव पास किया कि गांव के हर बच्चे का दाखिला सरकारी स्कूल में ही कराया जाएगा. ग्रामीणों का मानना है कि सरकारी स्कूल बच्चों को अच्छी और बेहतर शिक्षा दे सकते हैं. इस गांव के लोग ज्यादातर खेती-किसानी करते हैं.
इस पूरे मामले को लेकर गांव की सरपंच पडिगेला लक्ष्मी ने कहा, "बच्चों और गांव दोनों के विकास के लिए अच्छी शिक्षा काफी ज्यादा जरूरी है. जब स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ेगी, तो सरकारी स्कूलों का स्तर और सुधरेगा और उनका विकास होगा". इस दौरान सरपंच ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर्स के अनुभव की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि तेलंगाना के इस दूर-दराज के गांव में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को अच्छी शिक्षा देने में सरकारी स्कूल बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं.
गांव के फैसले की हर तरफ हो रही तारीफ
तेलंगाना के इस गांव के फैसले की हर तरफ खूब तारीफ हो रही है. तमाम एजुकेशन एक्सपर्ट्स और स्थानीय लोग इस कदम की सराहना कर रहे हैं, उनका कहना है कि एक छोटे से गांव का ये बड़ा फैसला, बाकी सभी गांवों और लोगों के लिए मिसाल बन सकता है. सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में आम लोगों की भागीदारी सबसे अहम होती है, ऐसे में बाबापुर गांव एक बड़ा मैसेज दे रहा है.
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