आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें आम लोगों के बजट पर सीधा असर डालती हैं. हर बार दाम बढ़ने या घटने पर इसकी चर्चा होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से करीब 50 साल पहले भारत में पेट्रोल और डीजल कितने रुपये प्रति लीटर मिलते थे? उस समय न केवल ईंधन की कीमतें बेहद कम थीं, बल्कि इन पर लगने वाला टैक्स भी आज की तुलना में काफी कम था.
50 साल पहले कितनी थी पेट्रोल की कीमत
आंकड़ों के अनुसार, 1976 में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 1.50 रुपये प्रति लीटर थी. वहीं डीजल की कीमत 1 रुपये प्रति लीटर से भी कम थी. उस दौर में भारत में ईंधन की कीमतें सरकार के Administered Pricing Mechanism (APM) के तहत तय होती थीं और इनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर आज की तरह नहीं पड़ता था.
उस समय कितना लगता था टैक्स
करीब 50 साल पहले पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले कर (Tax) आज की तुलना में काफी कम थे. ईंधन की खुदरा कीमत में टैक्स की हिस्सेदारी सीमित थी. समय के साथ सरकारों ने विभिन्न प्रकार के उत्पाद शुल्क (Excise Duty), वैट (VAT) और अन्य कर लागू किए, जिससे उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम कीमत में बड़ा बदलाव आया.
क्यों बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत?
ईंधन की कीमतें कई कारणों से बदलती हैं. इनमें प्रमुख हैं- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकारों का वैट (VAT), रिफाइनिंग, परिवहन और डीलर कमीशन आदि.
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अब कैसे तय होती हैं कीमतें
भारत में पेट्रोल की कीमतों को 2010 और डीजल की कीमतों को 2014 में चरणबद्ध तरीके से बाजार आधारित (Market-linked) प्रणाली से जोड़ा गया. इसके बाद तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अन्य लागतों के आधार पर खुदरा कीमतें तय करती हैं. जून 2017 से देश में पेट्रोल और डीजल के दाम रेगुलर बेसिस पर संशोधित किए जाने लगे.
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