Article 142 Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है. इस फैसले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की बेंच ने एक गरीब छात्र को वर्चुअल तरीके से सुना और कुछ ही देर में उसे मेडिकल सीट देने का फैसला सुना दिया. मध्य प्रदेश के छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने दो बार नीट क्लियर किया था, लेकिन उसे मेडिकल में दाखिला नहीं मिल पाया. इसके बाद उसने हाईकोर्ट में गुहार लगाई, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की और छात्र को बड़ी राहत देते हुए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि उसे एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन दिया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला अपनी एक खास शक्ति को इस्तेमाल करते हुए दिया. संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने छात्र को ये बड़ी राहत दी. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि ये अनुच्छेद 142 क्या है और इससे सुप्रीम कोर्ट को कौन सी पावर मिल जाती है.
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क्या है संविधान का अनुच्छेद 142?
संविधान में सुप्रीम कोर्ट को अंतिम या संपूर्ण न्याय करने के लिए खास ताकत दी गई है, जिसे अनुच्छेद 142 में बताया गया है. ये आर्टिकल सुप्रीम कोर्ट को पूरा न्याय करने का अधिकार देता है. इसका इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट किसी भी फैसले को पलट सकता है और न्याय के लिए फैसला दे सकता है. मध्य प्रदेश के छात्र वाले फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट कई बार इस खास ताकत का इस्तेमाल कर चुका है.
हाल में कब हुआ संपूर्ण न्याय वाले अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल
- तलाक के बाद महिलाओं को स्टैंप ड्यूटी पर छूट का मामला
- बुलडोजर एक्शन के खिलाफ गाइडलाइन
- समय पर फीस नहीं भरने पर आईआईटी के दलित छात्र के एडमिशन का मामला
- चंडीगढ़ मेयर चुनाव के नतीजों को पलटने का फैसला
ताजा मामला क्या है?
ताजा मामले की बात करें तो मध्य प्रदेश के छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने खुद ही अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा और बताया कि कैसे उन्हें मेडिकल सीट नहीं मिली है. ये सब तब हुआ जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच उठ रही थी, छात्र को देखकर सभी जज रुके और उसकी दलीलें खड़े-खड़े ही सुनने लगे. करीब 10 मिनट चली इस सुनवाई के बाद सीजेआई के नेतृत्व वाली बेंच ने छात्र के हक में फैसला सुना दिया और उसे मेडिकल सीट देने का निर्देश दिया.
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