Twisha Sharma Case : भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक नया मोड़ आ गया है. पुलिस ने ट्विशा के परिवार को चिट्ठी लिखकर जल्द से जल्द शव की कस्टडी लेने को कहा है, क्योंकि शव के सड़ने (Decompose) का खतरा बढ़ गया है. ट्विशा का शव 13 मई से एम्स भोपाल की मॉर्चुरी में रखा है. परिवार का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, इसलिए वे दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग पर अड़े हैं. इस बीच यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर मॉर्चुरी में शव कितने दिनों तक सुरक्षित रह सकता है? आइए जानते हैं...
-4°C बनाम -80°Cआम तौर पर सरकारी अस्पतालों के शवगृहों (Mortuaries) में शवों को फ्रीजर में -4°C (माइंस 4 डिग्री सेल्सियस) पर रखा जाता है. पुलिस के मुताबिक, एम्स भोपाल में भी यही व्यवस्था है. इस तापमान पर किसी भी शव को केवल 3 से 5 दिनों तक ही ठीक हालत में रखा जा सकता है.
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी शव को हफ्तों या महीनों तक बिना सड़े सुरक्षित रखना हो, तो उसके लिए -80°C) के डीप फ्रीजर या फिर एम्बामिंग (विशेष रसायनों का लेप) की जरूरत होती है. एम्स भोपाल ने पुलिस को साफ बताया है कि उनके पास -80°C का अल्ट्रा-लो फ्रीजर उपलब्ध नहीं है.
मौत के बाद शरीर में क्या होता है?
जब किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो उसके शरीर में दो मुख्य प्रक्रियाएं शुरू हो जाती हैं:
ऑटोलिसिस - Autolysisशरीर की कोशिकाएं खुद को नष्ट करने लगती हैं.
प्यूट्रीफैक्शन - Putrefactionशरीर के भीतर मौजूद बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं और अंगों को गलाने लगते हैं.
ठंडा तापमान इन बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा तो कर देता है, लेकिन पूरी तरह रोक नहीं पाता. 7-8 दिन बीत जाने के बाद -4°C पर भी शरीर धीरे-धीरे डीकंपोज होने लगता है.
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