ट्विशा शर्मा की मौत मामले में अब नया विवाद सामने आ गया है. ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह को शुरुआत से कानूनी मदद उपलब्ध कराई गई है. नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (MPSLSA) के कार्यपालक अध्यक्ष, न्यायमूर्ति विवेक रूसिया को शिकायत भेजी है.
शिकायत में उन्होंने कुछ फोन कॉल रिकॉर्ड का हवाला दिया है. आरोप लगाया है कि लीगल एड से जुड़े वकीलों ने गिरिबाला सिंह की ओर से अग्रिम जमानत मामले में पैरवी की. ट्विशा के पिता का दावा है कि यह लीगल एड की भावना और नियमों के खिलाफ है. शादी की तस्वीरों के आधार पर वकीलों और आरोपी पक्ष के बीच निजी संबंध होने का भी आरोप लगाया है. शिकायत में कहा गया कि ब्यूटी पार्लर में दिखा एक व्यक्ति शादी समारोह में भी मौजूद था. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
फोन कॉल्स को बताया मदद करने का सबूत
उन्होंने आरोप लगाया कि गिरिबाला की मदद करने वाली यह बात इससे साफ होती है कि स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य मनोज कुमार को 8 कॉल की गईं, जिसमें एक कॉल 12 मई को रात लगभग 11 बजे की. इसी दिन ट्विशा की मौत हुई थी. इसके अलावा श्रेयस सक्सेना 15 मई को खुद पेश हुए थे और गिरिबाला की अग्रिम जमानत के लिए बहस की, जो लीगल एड स्कीम के तहत आचार संहिता का उल्लंघन है.
इसके अलावा, गिरिबाला सिंह का वकालतनामा दाखिल करते समय श्रेयस सक्सेना और रीना वर्मा की नियुक्ति भी आचार संहिता का उल्लंघन है. शादी की तस्वीरों से श्रेयस और समर्थ के बीच निजी संबंध का पता चलता है, जो फिर से आचार संहिता का उल्लंघन है, क्योंकि आप ऐसे व्यक्ति के लिए पेश नहीं हो सकते, जिसके साथ आपके ऐसे निजी संबंध हों.
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