Penguin Survival Secrets: क्या आप कभी ऐसी जगह गए हैं, जहां का तापमान माइनस डिग्री में हो. बर्फीले तूफान और जानलेवा ठंड शरीर को अकड़ रहे हों. सुनकर ही कंपकंपी छूट जाती है, लेकिन उसी माहौल में पेंग्विन आराम से खड़ा रहता है. न कोई जैकेट, न हीटर, न आग, फिर भी जिंदा, एक्टिव और बिल्कुल सेफ रहता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पेंग्विन इतनी ठंड में जिंदा कैसे रहता है. क्या गलन और ठंडी हवाएं उसके शरीर पर असर नहीं करती हैं. आइए जानते हैं इसका कारण
पेंग्विन को ठंड क्यों नहीं लगती है
1. शरीर की बनावट
पेंग्विन के पास आम पक्षियों के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा फेदर्स यानी पंख होते हैं. ये पंख सिर्फ ज्यादा नहीं होते, बल्कि बहुत टाइट तरीके से पैक्ड होते हैं. इनके बीच जो हवा फंस जाती है, वही उसका नेचुरल इंसुलेशन बन जाती है. यानी ठंड बाहर ही रुक जाती है और शरीर की गर्मी अंदर लॉक रहती है.
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2. पेंग्विन का ब्लड सर्कुलेशन
पेंग्विन के पैर सीधे बर्फ पर होते हैं, फिर भी उसका खून नहीं जमता है, क्योंकि उसकी नसों में एक स्पेशल ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम होता है, जहां गरम और ठंडा खून आपस में हीट एक्सचेंज करता है. इसका मतलब साफ है कि शरीर की गर्मी बाहर जाकर वेस्ट नहीं होती है. नेचर ने पेंग्विन को ठंड से लड़ने की ताकत नहीं दी, बल्कि गर्मी को बचाने की समझ दी है.
3. हडलिंग
जब अंटार्कटिका में भयानक तूफान आता है, तब पेंग्विन अकेले खड़े नहीं रहते. वो हजारों की भीड़ में एक-दूसरे से चिपककर खड़े हो जाते हैं. इस बिहेवियर को हडलिंग कहा जाता है. बीच में खड़े पेंग्विन सबसे ज्यादा गरम रहते हैं, जबकि बाहर वाले धीरे-धीरे अंदर आते रहते हैं. यहां न कोई लीडर होता है और ना ही कोई आदेश देने वाला होता है. यानी हर कोई खुद भी बचता है और दूसरों को भी बचाता है.
4. बॉडी शेप
पेंग्विन की बॉडी भी कोई इत्तेफाक नहीं है. छोटे कान, छोटी गर्दन और कॉम्पैक्ट शरीर, ताकि हीट बाहर निकलने का रास्ता ही न मिले. नेचर ने हर एक्स्ट्रा हिस्सा हटाया, जिससे गर्मी बचे और एनर्जी वेस्ट न हो. पेंगुइन कभी भी ठंड से लड़ता नहीं है, वो ठंड को बेकार बना देता है. नेचर ने उसे फाइट करना नहीं सिखाया, बल्कि एफिशिएंसी सिखाई है और यही सबसे बड़ा लाइफ लेसन माना जाता है.
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