Heatwave research : क्या आपको लगता है कि इस साल की गर्मी ने आपका हाल बेहाल कर दिया? ठहरिए, क्योंकि असली चुनौती तो अभी आनी बाकी है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी रिसर्च पब्लिश की है, जो हम सबकी रातों की नींद उड़ा सकती है. इस रिसर्च के मुताबिक, अगर दुनिया का तापमान सिर्फ 2 डिग्री सेल्सियस और बढ़ता है, तो साल 2050 तक भीषण गर्मी झेलने वालों की संख्या दोगुनी हो जाएगी.
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च के अनुसार
रिसर्च में सामने आया है कि तापमान अगर 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो दुनिया के करीब 3.8 अरब लोग खतरनाक हीटवेव की चपेट में आ जाएंगे, जिसमे सबसे ज्यादा खतरा भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और पाकिस्तान जैसे देशों पर होगा. तापमान का स्तर इतना ज्यादा रहेगा की इंसान हीटवेव का शिकार आसानी से बन सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के पास इस खतरनाक तापमान को मात देने के लिए बहुत ही कम समय बचा है. अगर समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में लोगों को बहुत बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है.
2 डिग्री तापमान बढ़ा तो मचेगी तबाही
हाल ही में नेचर सस्टेनेबिलिटी में प्रकाशित हुए रिसर्च के अनुसार जो जानकारी सामने आई है, उसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान का बढ़ना केवल मौसम का संकट नहीं बल्कि यह मानव जीवन का भी संकट बनता जा रहा है. साल 2010 में दुनिया के करीब 1.5अरब लोग अत्यधिक गर्मी (Extreme Heat) का सामना कर रहे थे.लेकिन इसका आंकड़ा आने वाले साल 2050 तक 41 प्रतिशत पहुंच सकता है. जिसका मतलब है कि लगभग 3.79 अरब से ज्यादा लोग खतरनाक गर्मी के चपेट में आ सकते हैं. अगर प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से इस्तेमाल हुआ तो वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 25 सालों में ही भंयकर गर्मी तक पहुंच जाएंगे.
हीटवेव (Heatwave) की चपेट में आ सकते हैं ये देश
आपको बता दे कि वैज्ञानिकों के इस रिसर्च ने भारत के लिए Red Alert जारी कर दिया है. जानकारी के मुताबिक Heatwave का असर भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस और पाकिस्तान जैसे देशों पर होगा. क्योंकि इन देशों की जनसंख्या ज्यादा है.
क्लाइमेट चेंज होने से ठंड पड़ सकती है कम
रिसर्च में बताया गया की आने वाले कुछ सालों के बाद दुनिया में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से ठंडे पड़ना कम हो जाएगी. ठंडे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आबादी बहुत कम बचेगी. जहां पहले 14 प्रतिशत थी वह घटकर सिर्फ 7% प्रतिशत हो जाएगी.
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