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शख्‍स ने सालों संभालकर रखा चमकीला पत्‍थर, सोचा ये सोने का टुकड़ा है, पर वो तो स्‍पेस का...निकला

कई बार हमारी नजरों के सामने मौजूद कोई साधारण सी दिखने वाली चीज असाधारण होती है और हमें इस बात का आभास तक नहीं होता. कुछ ऐसा ही हुआ ऑस्‍ट्र‍ेल‍िया में. जहां एक शख्‍स ने सालों तक एक पत्‍थर को संभालकर रखा था, ये सोचते हुए कि पत्‍थर नहीं सोने का टुकड़ा है. लेकिन जब वैज्ञानिकों ने उसकी जांच की, तो कुछ ऐसा पता चला जिससे सबके होश उड़ गए. 

शख्‍स ने सालों संभालकर रखा चमकीला पत्‍थर, सोचा ये सोने का टुकड़ा है, पर वो तो स्‍पेस का...निकला

कई बार हमारी नजरों के सामने मौजूद कोई साधारण सी दिखने वाली चीज असाधारण होती है और हमें इस बात का आभास तक नहीं होता. कुछ ऐसा ही हुआ ऑस्‍ट्र‍ेल‍िया में. जहां एक शख्‍स ने सालों तक एक पत्‍थर को संभालकर रखा था, ये सोचते हुए कि पत्‍थर नहीं सोने का टुकड़ा है. लेकिन जब वैज्ञानिकों ने उसकी जांच की, तो कुछ ऐसा पता चला जिससे सबके होश उड़ गए. 

क्‍या थी चमकीले पत्‍थर की असलियत 

वैज्ञानिकों को जांच में पता चला कि वह पत्थर साधारण नहीं बल्कि लगभग 4.6 अरब साल पुराना उल्कापिंड (Meteorite) है, जो सौर मंडल के शुरुआती दौर का अवशेष माना जा रहा है. 

सोने की उम्मीद में रखा था पत्थर

रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्ति को यह बड़ा पत्‍थर वर्षों पहले मिला थाा. उसका वजन अधिक था और बाहरी रूप सामान्य पत्थरों से अलग दिखता था. इसी वजह से उसे लगा कि इसके भीतर सोना या कोई बहुमूल्य धातु हो सकती है. उसने इसे लंबे समय तक अपने पास सुरक्षित रखा, लेकिन कभी इसे तोड़ने में सफल नहीं हो पाया. 

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जांच में सामने आई सच्चाई

बाद में जब यह चट्टान वैज्ञानिकों तक पहुंची और इसकी विस्तृत जांच की गई, तो पता चला कि यह एक दुर्लभ आयरन मेटियोराइट (Iron Meteorite) है. वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी उम्र करीब 4.6 अरब वर्ष है, यानी यह हमारे सौर मंडल के निर्माण के समय का अवशेष हो सकता है. 

क्यों है यह खोज खास

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उल्कापिंड वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनमें सौर मंडल के शुरुआती दौर की संरचना और ग्रहों के निर्माण से जुड़ी जानकारी छिपी होती है. इनका अध्ययन करके यह समझने में मदद मिलती है कि पृथ्वी और अन्य ग्रहों का निर्माण कैसे हुआ. 

उल्कापिंड क्या होता है

उल्कापिंड वह ठोस खगोलीय पिंड होता है जो अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल को पार कर जमीन तक पहुंच जाता है. अधिकांश उल्काएं वायुमंडल में प्रवेश करते समय जल जाती हैं, लेकिन कुछ बड़े और मजबूत टुकड़े पृथ्वी की सतह तक पहुंच जाते हैं. इन्हें ही उल्कापिंड कहा जाता है. 

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