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फ्लाईओवर में लोहे की जगह प्लास्टिक रॉड...भ्रष्टाचार या नवाचार?

सोशल मीडिया पर फ्लाईओवर में प्लास्टिक रॉड के इस्तेमाल को लेकर भ्रष्टाचार का दावा करने वाले वीडियो गलत हैं. यह मटीरियल GFRP है. इसकी टेन्साइल स्ट्रेंथ स्टील से दोगुनी होती है, वजन स्टील का एक-चौथाई होता है और इसमें कभी जंग नहीं लगता, जिससे यह आधुनिक निर्माण के लिए एक बहुत टिकाऊ इनोवेशन बन जाता है.

फ्लाईओवर में लोहे की जगह प्लास्टिक रॉड...भ्रष्टाचार या नवाचार?
GFRP की ताकत 1000 MPa से ज्यादा होती है, जबकि लोहे की 450 MPa होती है.

सोशल मीडिया पर आजकल कुछ वीडियो बड़ी तेजी से वायरल हो रहे हैं. इन वीडियो में दिखाया जा रहा है कि एक नए बन रहे फ्लाईओवर में लोहे के सरियों की जगह प्लास्टिक के सरिये इस्तेमाल किए जा रहे हैं. वीडियो बनाने वाले इसे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और जनता के पैसों की लूट बता रहे हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा है? इसका सीधा जवाब है- नहीं. यह कोई भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि कंस्ट्रक्शन की दुनिया का आधुनिक आविष्कार है, जिसे GFRP यानी ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर कहा जाता है. तो बिना देर किए आइए जानते हैं क्या है इसकी खासियत और यह लोह के सरिये से कैसे बेहतर है.

क्या है इसकी खासियत

कंक्रीट दबाव झेलने में तो बहुत मजबूत होता है, लेकिन जब इसे खींचने या मोड़ने की बात आती है, तो यह कमजोर पड़ जाता है. इसीलिए कंक्रीट को ताकत देने के लिए उसमें सरिये डाले जाते हैं. अब तक हम सिर्फ लोहे के सरियों को जानते थे, लेकिन अब उसकी जगह बहुत ही मजबूत ग्लास फाइबर और खास प्लास्टिक के मिक्सचर से बना GFRP ले रहा है.

लोहे और GFRP में क्या अंतर है? क्यों यह लोहे से बेहतर है?

  1. GFRP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें कभी जंग (Corrosion) नहीं लगती. समुद्र के तटीय इलाकों में या नमी वाली जगहों पर लोहे के सरिये बहुत जल्दी जंग खा जाते हैं, जिससे करोड़ों रुपये रखरखाव में खर्च होते हैं और पुल कमजोर हो जाते हैं. GFRP इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देता है.
  2. इसके अलावा, यह लोहे के मुकाबले वजन में कम होता है, जिससे इसे लाना-ले जाना और मजदूरों के लिए काम करना बेहद आसान हो जाता है. साथ ही, इसमें बिजली का करंट भी नहीं फैलता, जो रेलवे या मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए इसे बहुत सुरक्षित बनाता है.
  3. अगर हम दोनों की ताकत की तुलना करें, तो आंकड़े देखकर आप हैरान रह जाएंगे. GFRP की खिंचाव झेलने की ताकत लोहे से दोगुनी से भी ज्यादा होती है. हालांकि, लोहा मोड़ने पर मुड़ जाता है, जबकि GFRP एक सीमा के बाद सीधे टूटता है, इसलिए इसके डिजाइन में इंजीनियर खास सावधानी रखते हैं.
  4. आपको बता दें कि GFRP की ताकत 1000 MPa से ज्यादा होती है, जबकि लोहे की 450 MPa होती है. वहीं, GFRP की पकड़ 20 MPa से ज्यादा होती है, जिससे पुलों में दरारें पड़ने का खतरा बहुत कम हो जाता है. जहां लोहे के सरिये वाले पुलों को सुरक्षित रखने के लिए कंक्रीट की बहुत मोटी परत चढ़ानी पड़ती है, वहीं GFRP में ऐसा करने की जरूरत नहीं होती. 

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