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This Article is From Sep 03, 2025

शादी के दिन फाड़ दिए जाते हैं दूल्हे के कपड़े, भारत के इस समुदाय में है ये अजीब परंपरा

दरअसल, सिंधी समुदाय में शादी के दिन दूल्हे के कपड़े फाड़ दिए जाते हैं. यह रस्म अक्सर दूल्हे के घर या मंदिर में निभाई जाती है, जहां दूल्हा शादी के लिए तैयार होता है. दूल्हे के दोस्त और बहनें मिलकर उसे पकड़ते हैं और उसकी शर्ट फाड़ देते हैं.

शादी के दिन फाड़ दिए जाते हैं दूल्हे के कपड़े, भारत के इस समुदाय में है ये अजीब परंपरा
नई दिल्ली:

Indias strange tradition: भारत में शादियों अलग-अलग परंपरा है, हर समुदाय और क्षेत्र में पूजा-पाठ से लेकर शादी विवाह तक के अपने नियम होते हैं. लेकिन कुछ नियम ऐसे होते हैं जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं, कि क्या कोई ऐसी भी परंपरा हो सकती है. ये तो सब जानते होंगे कि किसी भी नियम कानून को बनाने के पीछे कोई न कोई कारण होता है. वैसे ही एक अजीब परंपरा भी एक शादी में देखने को मिली, जिसके बाद लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे. दरअसल, सिंधी समुदाय में शादी के दिन दूल्हे के कपड़े फाड़ दिए जाते हैं. यह रस्म अक्सर दूल्हे के घर या मंदिर में निभाई जाती है, जहां दूल्हा शादी के लिए तैयार होता है. दूल्हे के दोस्त और बहनें मिलकर उसे पकड़ते हैं और उसकी शर्ट फाड़ देते हैं.

क्या है 'सांठ' की परंपरा, क्यों निभाई जाती है यह परंपरा? जानिए हर सवाल का जवाब

सिंधी संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि 'सांठ' की रस्म दूल्हे को किसी भी बुरी नजर या नेगेटिव एनर्जी से बचाती है. जब दूल्हा अपनी शादी के लिए सबसे अच्छा दिखता है, तो उस पर बुरी नजर लगने का खतरा होता है. इस रस्म को दूल्हे को नकारात्मकता से बचाने का एक तरीका माना जाता है.

वहीं अपनी पुरानी जिदंगी को अलविदा कहने का तरीका है. शादीशुदा जीवन की शुरुआत करने का प्रतीक भी मानी जाती है. फटे हुए कपड़े उसकी पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर एक नई और जिम्मेदार जिंदगी में कदम रखने का संकेत देते हैं.

यह रस्म पूरे माहौल को हल्का और खुशनुमा बना देती है. शादी का माहौल अक्सर काम को लेकर टेंशन से भरा होता है. सांठ की रस्म में होने वाला हंसी-मजाक दूल्हे और उसके परिवार के तनाव को कम करता है. यह दोस्तों और परिवार के सदस्यों के बीच बॉन्डिंग को भी मजबूत करती है.

रस्म के बाद क्या होता है?

जब दूल्हे के कपड़े फाड़ दिए जाते हैं, तो उसे उसी समय नए कपड़े पहनाए जाते हैं. ये नए कपड़े आमतौर पर उसके मामा या किसी अन्य रिश्तेदार द्वारा लाए जाते हैं. ये नए कपड़े उसके विवाहित जीवन की शुरुआत का प्रतीक होते हैं. इसके बाद दूल्हा दुल्हन के घर के लिए रवाना होता है, जहां विवाह की मुख्य रस्में पूरी की जाती हैं.

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लेखक के बारे में
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प्रिया गुप्ता
सीनियर सब एडिटर
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