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सोना धरती पर पैदा नहीं हुआ ! अरबों साल पहले अंतरिक्ष में हुई टक्कर ने इस पीली धातु को जन्म दिया

सोने का जन्म तारों के विस्फोट और न्यूट्रॉन स्टार्स की टक्कर जैसी भयानक अंतरिक्षीय घटना से हुआ था. पढ़ें दुनिया की सबसे कीमती धातु की कहानी का पहला भाग.

सोना धरती पर पैदा नहीं हुआ ! अरबों साल पहले अंतरिक्ष में हुई टक्कर ने इस पीली धातु को जन्म दिया
  • भूवैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर मौजूद कुल सोने का 99% से अधिक हिस्सा आज भी इसके कोर में छिपा हुआ है.
  • यह सोना इतनी अधिक मात्रा में है कि पूरी पृथ्वी को 50 सेंटीमीटर मोटी सोने की परत से ढका जा सकता है.
  • आज हमारे पास जो सोना है, वह पृथ्वी के बनने के 20 करोड़ साल बाद उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों की बारिश से आया.

दुनिया में शायद ही ऐसी कोई चीज है जिसे सोने की तरह अहमियत मिलती है. राजाओं के खजाने से लेकर मंदिरों के गर्भगृह तक, शादी-ब्याह से लेकर आधुनिक देशों के विदेशी मुद्रा भंडार तक, सोना हजारों वर्षों से दौलत, ताकत, शानो शौकत और प्रतिष्ठा की पहचान रहा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सोने को हम धरती की खान से निकालते हैं, वह आखिर वहां आया कहां से?

हैरानी की बात यह है कि सोना धरती पर पैदा ही नहीं हुआ. जी हां, आपके गले की चेन, हाथ की अंगूठी या लॉकर में रखा सोना कभी अंतरिक्ष की गहराइयों में मौजूद था. वैज्ञानिकों के अनुसार सोने की कहानी धरती से नहीं, बल्कि अरबों साल पहले ब्रह्मांड में हुई एक ऐसी महाविनाशकारी घटना से शुरू होती है जिसने पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया था.

Making of Gold

सोना बनने की प्रक्रिया
Photo Credit: AFP

आखिर सोना बनता कैसे है?

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोध में धरती की कुछ सबसे पुरानी चट्टानों का अध्ययन किया गया. उसमें पता चला कि उनके बनने के बहुत समय बाद उल्कापिंडों के धरती पर गिरने से पृथ्वी पर सोना आया. उनके शोध के नतीजे नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुए.

वैज्ञानिकों का मानना है कि सोना बनने के लिए बेहद असाधारण परिस्थितियों की जरूरत होती है. ऐसी परिस्थितियां तब पैदा होती हैं जब दो अत्यंत घने न्यूट्रॉन तारे (ये ब्रह्मांड के सबसे घने और अत्यधिक शक्तिशाली पिंड होते हैं) आपस में टकराते हैं या फिर किसी विशाल तारे का विस्फोट यानी सुपरनोवा होता है. सुपरनोवा किसी विशाल तारे की अंतिम अवस्था में होने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और चमकीला विस्फोट है.

जब न्यूट्रॉन तारों की टक्कर होती है तो कुछ ही सेकंड में इतनी जबरदस्त ऊर्जा निकलती है कि परमाणुओं के भीतर न्यूट्रॉन तेजी से जुड़ने लगते हैं. इस प्रक्रिया को आर-प्रोसेस कहा जाता है. इसी दौरान सोना, प्लैटिनम और यूरेनियम जैसे भारी तत्व बनते हैं.

वैज्ञानिकों के मुताबिक ब्रह्मांड में मौजूद लगभग सारा सोना इसी तरह की दुर्लभ और विनाशकारी घटनाओं से पैदा हुआ है.

Gold Birth Story

सोना के धरती पर पहुंचने की कहानी
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फिर सोना धरती तक पहुंचा कैसे?

यह सवाल और भी दिलचस्प है. करीब 4.5 अरब साल पहले जब धरती का निर्माण हो रहा था, तब वह एक पिघला हुआ आग का गोला थी. उस समय जो भी भारी तत्व मौजूद थे, वे धीरे-धीरे धरती के केंद्र यानी कोर की तरफ चले गए. भूवैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर मौजूद कुल सोने का 99% से अधिक हिस्सा आज भी इसके कोर में छिपा हुआ है. इतना ही नहीं, यह सोना इतनी अधिक मात्रा में है कि पूरी पृथ्वी को 50 सेंटीमीटर मोटी सोने की परत से ढका जा सकता है.

अगर कहानी यहीं खत्म हो जाती, तो आज धरती की सतह पर हमें लगभग कोई सोना नहीं मिलता.

इस पीली धातु की उत्पति को लेकर तमाम तरह की कहानियां प्रचलित है. वैज्ञानिक समुदाय में भी एक राय नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों के एक बड़े तबके का मानना है कि धरती के भीतर मौजूद सोना अंतरिक्ष से उल्कापिंडों के जरिए आया है.

वैज्ञानिकों के पास इसके ठोस सबूत हैं.

उनका मानना है कि करीब 4.4 अरब से 3.8 अरब साल पहले धरती पर उल्का पिंडों की बौछार हुई थी. उसी दौरान सोना अंतरिक्ष से उल्का पिंडों के रूप में धरती पर आया और इसी कारण यह धरती के बाहरी हिस्से में यह पाया जाता है.

यानी आज जिन सोने की खानों से सोना निकाला जाता है, वह वास्तव में अंतरिक्ष से आया हुआ पदार्थ है. दूसरे शब्दों में कहें तो धरती पर मौजूद लगभग हर सोने का कण कभी न कभी किसी मरते हुए तारे या न्यूट्रॉन स्टार की टक्कर का हिस्सा रहा है.

आपके शरीर से सोने और अन्य तत्वों का रिश्ता

यह सुनकर शायद आप चौंक जाएं कि सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि हमारे शरीर में मौजूद कई तत्व भी तारों की देन हैं. प्रसिद्ध खगोलशास्त्री कार्ल सागन ने कहा था कि हम सब स्टारडस्ट से बने हैं.

वास्तव में हमारे शरीर का लोहा, कैल्शियम और अन्य कई तत्व अरबों साल पहले तारों के भीतर बने थे. सोना भी उसी ब्रह्मांडीय विरासत का हिस्सा है, बस यह कहीं ज्यादा दुर्लभ और कीमती है.

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सोने का जन्म तारों के विस्फोट और न्यूट्रॉन स्टार्स की टक्कर जैसी भयानक अंतरिक्षीय घटना से हुआ था.
Photo Credit: AFP

सोना इतना दुर्लभ क्यों है?

सोना हर जगह नहीं बनता. इसके निर्माण के लिए ब्रह्मांड में बेहद दुर्लभ और असाधारण घटनाएं चाहिए होती हैं. यही कारण है कि पृथ्वी की पूरी परत में सोने की मात्रा बहुत कम है.

अनुमान है कि मानव इतिहास में अब तक जितना सोना निकाला गया है, उससे लगभग चार ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल ही भरे जा सकते हैं.

यानी जिस धातु को लोग हजारों साल से जमा कर रहे हैं, उसकी कुल मात्रा भी आश्चर्यजनक रूप से सीमित है.

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Photo Credit: NDTV

सोने के टुकड़े की अरबों साल लंबी यात्रा

कल्पना कीजिए कि आपके हाथ में मौजूद एक छोटी सी सोने की अंगूठी की शुरुआत किसी ज्वेलरी शॉप में नहीं हुई.

उसका जन्म शायद अरबों साल पहले दो न्यूट्रॉन तारों की भीषण टक्कर में हुआ होगा. फिर वह अंतरिक्ष में लाखों-करोड़ों किलोमीटर तक भटका होगा. बाद में किसी क्षुद्रग्रह का हिस्सा बना होगा, जिसने धरती से टकराकर इस धातु को यहां पहुंचाया. फिर लाखों वर्षों तक वह धरती की चट्टानों में दबा रहा, और अंत में इंसानों ने उसे खोजकर गहने या सिक्के का रूप दिया.

यानी सोना ब्रह्मांड की सबसे रोमांचक यात्राओं में से एक का जीवित सबूत है.

यह कहानी का सिर्फ पहला भाग है. अगले भाग में हम जानेंगे कि सोना धरती पर आया, लेकिन खदानों में कैसे बदला? सोने की खानें कैसे बनीं और हर जगह क्यों नहीं मिलता है सोना?

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