मध्य प्रदेश के जबलपुर के अथर्व चतुर्वेदी का केस इस समय काफी सुर्खियों में बना हुआ है. दरअसल अथर्व ने दो बार नीट परीक्षा को पास किया और 530 अंक भी हासिल किए. अच्छे अंक हासिल करने के बाद अथर्व को लगा की उसे अब एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल जाएगा. लेकिन उसके सपनों पर पानी फिर गया है. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( ईडब्ल्यूएस) के तहत उसे दाखिला मिल सकता था. लेकिन जब निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का समय आया, तो पता चला कि राज्य सरकार ने निजी संस्थानों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू करने की स्पष्ट नीति नहीं बनाई है. यानी अच्छे अंक हासिल करने के बाद भी उसके लिए निजी मेडिकल कॉलेजों के दरवाजे बंद थे.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की विशेष अनुमति याचिका (SLP)
अथर्व चतुर्वेदी ने हार नहीं मानी. कानूनी रास्ते पर चल पड़ और न्याय के लिए जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गया. अथर्व के पिता मनोज चतुर्वेदी पेश से वकील हैं. ऐसे में उसे कानून की थोड़ी जानकारी थी. हाईकोर्ट में बात न बनने पर अथर्व सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. उसने ऑनलाइन विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की. इस साल जनवरी के महीने में उसने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर एसएलपी दाखिल की और ऑनलाइन ही अपनी पैरवी की. फैसला अथर्व के पक्ष में भी आया. आखिर क्या होती है विशेष अनुमति याचिका और कौन इसे दाखिल कर सकता है, आइए जानते हैं इसके बारे में.
क्या होती है विशेष अनुमति याचिका (SLP)?
अगर हाई कोर्ट या अन्य किसी कोर्ट का फैसला आपके पक्ष में नहीं आता है, तो आपके पास स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) का ऑप्शन होता है. दरअसल जब आपके पास सुप्रीम कोर्ट में केस अपील करने का कोई सीधा ऑप्शन नहीं होता है, तब आप SLP का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये सुप्रीम कोर्ट से स्पेशल परमिशन मांगने जैसा होता है. SLP सुप्रीम कोर्ट से किया गया एक अनुरोध होता है, जिसके तहत किसी भी न्यायालय या न्यायाधिकरण के किसी भी निर्णय, आदेश के विरुद्ध अपील करने की विशेष अनुमति मांगी जाती है. याद रखें की सैन्य न्यायाधिकरण इसके तहत नहीं आते हैं. मतलब सैन्य कोर्ट के फैसलों के खिलाफ SLP दाखिल नहीं की जा सकती है.
विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की समय सीमा
हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ- निर्णय की तारीख से 90 दिन तक SLP दाखिल की जा सकती है. वहीं हाईकोर्ट द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ अपीलिबिलिटी से इंकार आदेश की तारीख से 60 दिन तक SLP दाखिल की जा सकती है. SLP दाखिल करते हुए हर एक जानकारी सही भरनी होनी चाहिए. साथ ही SLP तभी दाखिल की जा सकती है जब हाईकोर्ट में कोई अन्य याचिका लंबित न हो.
SLP दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट तय करता है कि मामला सुनवाई योग्य है की नहीं. मामला उपयुक्त नहीं होने पर इसे खारिज कर दिया जाता है. .
कैसे फाइल करें SLP
अगर आपको कानून की थोड़ी सी भी जानकारी है तो आप खुद से SLP फाइल कर सकते हैं. नहीं तो SLP फाइल करने के लिए किसी वकील की मदद ले सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जाकर इसे ऑनलाइन भी फाइल किया जा सकता था.
SLP फाइल करना का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस
- हाईकोर्ट या लोअर कोर्ट के जजमेंट की कॉपी जमा करना और केस से जुड़े डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करना.
- केस का बैकग्राउंड संक्षेप में तैयार करना.
- SLP का ड्राफ्ट बनाना.
- एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) से रिव्यू और साइन करवाएं. याद रखें की सिर्फ एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड ही सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल कर सकता है.
- SLP फाइल को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करना. आप डॉक्यूमेंट्स E-फाइल या फिजिकल सबमिशन में जमा करवा सकते हैं.
- सुप्रीम कोर्ट के सामने एडमिशन हियरिंग. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट पिटीशन को रिजेक्ट या एक्सेप्ट करने का फैसला करता है.
- अगर इसे एक्सेप्ट कर लिया जाता है, तो नोटिस भेजा जाता है.
ऑनलाइन सुनवाई की प्रक्रिया क्या
सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई भी की जाती है. अगर आप सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकते हैं, तो ऑनलाइन सुनवाई का ऑप्शन आपके पास होता है. वर्चुअल कोर्ट हियरिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होती है. आज के समय में वर्चुअल कोर्ट हियरिंग भारत के कानूनी सिस्टम का ज़रूरी हिस्सा बन गई है.
जानें ऑनलाइन हियरिंग की प्रक्रिया-
सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन हियरिंग के लिए ई-फाइलिंग करनी होती है. जो कि सुप्रीम कोर्ट की बेवसाइट पर जाकर की जाती है. सभी पिटीशन, एप्लीकेशन और डॉक्यूमेंट डिजिटली साइन होने चाहिए और उन्हें कोर्ट की ऑफिशियल ई-फाइलिंग पोर्टल के जरिए फाइल किया जाता है.
- ई-फाइलिंग में कोई भी गलती आपके केस को शुरुआती स्टेज में रिजेक्ट कर सकती है.
- ई-फाइलिंग होने के बाद, कोर्ट रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स की जांच करता है. अगर सबको सही पाया जाता है, तो मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाता है.
- इसके बाद कोर्ट सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) लिंक एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के रजिस्टर्ड ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर पर भेजता है. यह आम तौर पर तय सुनवाई से एक दिन पहले दिया जाता है.
- सुनवाई के बाद, कोर्ट का ऑर्डर डिजिटली साइन किया जाता है और कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है. जहां से आप इसे हासिल कर सकते हैं.
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