भारत में एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते हैं. अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा और केसर जैसे भारतीय आम दुनियाभर में मशहूर हैं. लेकिन दुनिया में कुछ ऐसी विदेशी किस्में भी हैं, जो भारत में व्यावसायिक रूप से नहीं उगाई जातीं और अपने अनोखे स्वाद, आकार व बनावट के लिए जानी जाती हैं. जानें आम की ऐसी ही 9 किस्मों के बारे में.
अटाउल्फो (Ataulfo)- मेक्सिको
अटाउल्फो आम को 'हनी मैंगो' भी कहा जाता है. इसका रंग सुनहरा पीला होता है और इसमें रेशे (फाइबर) बहुत कम होते हैं. इसका स्वाद बेहद मीठा और क्रीमी होता है, इसलिए इसे सीधे खाने के साथ-साथ मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है.
केंट (Kent)- अमेरिका और पेरू
केंट आम बड़े आकार का होता है और इसमें रस भरपूर होता है. इसमें फाइबर कम होने के कारण यह जूस, स्मूदी और सलाद के लिए पसंद किया जाता है. इसकी मिठास और लंबे समय तक ताजा रहने की क्षमता इसे निर्यात के लिए लोकप्रिय बनाती है.
कीट (Keitt)- अमेरिका
कीट आम का आकार बड़ा और छिलका हल्के हरे रंग का होता है. पकने के बाद भी इसका रंग पूरी तरह पीला नहीं होता. इसका गूदा रसीला, मीठा और कम रेशेदार होता है.
टॉमी एटकिंस (Tommy Atkins)- अमेरिका
यह दुनिया में सबसे अधिक निर्यात किए जाने वाले आमों में से एक है. इसकी मोटी त्वचा होने के कारण यह लंबी दूरी तक आसानी से भेजा जा सकता है. हालांकि इसका स्वाद भारतीय आमों जितना मीठा नहीं माना जाता.
फ्रांसिस (Francis)- हैती
फ्रांसिस आम अपने मसालेदार-मीठे स्वाद और रसीले गूदे के लिए जाना जाता है. यह मुख्य रूप से हैती और कैरेबियाई देशों में उगाया जाता है.
हेडेन (Haden)- फ्लोरिडा, अमेरिका
हेडेन आधुनिक अमेरिकी आमों की कई किस्मों का आधार माना जाता है. इसका रंग लाल, पीला और हरा मिश्रित होता है और स्वाद संतुलित मीठा होता है.
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पामर (Palmer)- ब्राजील
पामर आम लंबा और बड़े आकार का होता है. इसका गूदा मुलायम और कम रेशेदार होता है. यह देर से पकने वाली किस्म है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है.
इरविन (Irwin)- ऑस्ट्रेलिया और जापान
इरविन आम अपने चमकीले लाल रंग और मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है. जापान में इसे प्रीमियम फल माना जाता है और कई बार यह ऊंची कीमत पर बिकता है.
नाम डॉक माई (Nam Dok Mai)- थाईलैंड
थाईलैंड की यह प्रसिद्ध किस्म लंबी, पतली और बेहद मीठी होती है. इसमें रेशे बहुत कम होते हैं और इसे ताजा खाने के अलावा मैंगो स्टिकी राइस जैसी पारंपरिक थाई डिश में भी इस्तेमाल किया जाता है.
भारत में क्यों नहीं उगाई जातीं ये किस्में?
इनमें से अधिकांश किस्में विशेष जलवायु, मिट्टी और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुसार विकसित हुई हैं. भारत में कुछ विदेशी आमों का सीमित स्तर पर परीक्षण या निजी बागानों में रोपण हो सकता है, लेकिन इनका व्यावसायिक उत्पादन नहीं होता. भारत में पहले से ही स्थानीय जलवायु के अनुरूप सैकड़ों लोकप्रिय किस्में उपलब्ध हैं.
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