आज के समय में 10 रुपये में शायद एक कप चाय भी मुश्किल से मिले, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब सिर्फ 10 रुपये में पूरे परिवार के महीने भर का राशन का बड़ा हिस्सा खरीदा जा सकता था. हो सकता है आपको ये सस्ता लगे लेकिन उस समय लोगों की आय भी आज की तुलना में काफी कम होती थी.
1960 में कितने रुपए में क्या आता था
1960 में गेहूं का आटा 50 पैसे से 1 रुपये प्रति किलो था. वहीं चावल 80 पैसे से 1.50 रुपये प्रति किलो, अरहर दाल 1.50 से 2.50 रुपये प्रति किलो, दूध 60 पैसे से 1 रुपये प्रति लीटर, चीनी 1 से 1.50 रुपये प्रति किलो, सरसों का तेल 2 से 3 रुपये प्रति लीटर के बीच होता था.
क्या सचमुच 10 रुपये में महीने का राशन आ जाता था?
अगर परिवार छोटा हो और राशन का कुछ हिस्सा घर में उगाई गई फसल या स्थानीय स्रोतों से मिलता हो, तो 10 रुपये में महीने भर की कई जरूरी खाद्य वस्तुएं खरीदी जा सकती थीं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अनाज, दाल और दूध का उत्पादन स्वयं भी करते थे, जिससे नकद खर्च और कम हो जाता था.
उस समय लोगों की कमाई कितनी थी?
1960 के दशक में सरकारी कर्मचारी की शुरुआती मासिक सैलरी लगभग 100 से 300 रुपये होती थी. मजदूर की दैनिक मजदूरी करीब 2 से 5 रुपये तक होती थी.
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1960 में ऐसा था 10 रुपए का नोट
1960 में भारत में प्रचलित 10 रुपए का नोट आज के नोट से बिल्कुल अलग दिखता था. उस समय महात्मा गांधी की तस्वीर वाला नोट नहीं था. 1996 से पहले भारतीय नोटों पर अशोक स्तंभ प्रमुख रूप से छपा होता था.
इस नोट के बीच में Reserve Bank of India लिखा होता था. दाईं ओर अशोक स्तंभ बना था. इसके बीच में लिखा होता था- "I Promise to Pay the Bearer the Sum of Ten Rupees". इस पर RBI गवर्नर के हस्ताक्षर होते थे. इसका आकार आज के 10 रुपए के नोट से बड़ा होता था.
Note-
ये कीमतें अनुमानित हैं. स्थान और समय के अनुसार इनमें अंतर हो सकता है.
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