- झारखंड के रांची में छात्रों का प्रोटेस्ट जारी है और यह 23वें दिन में प्रवेश कर चुका है.
- प्रोटेस्ट कर रहे छात्र अब झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के साथ ही कांग्रेस से भी सवाल पूछ रहे हैं.
- प्रोटेस्टर्स का कहना है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हमसे बात तो की थी, लेकिन वह छलावा था.
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हो रहा प्रोटेस्ट 23वें दिन में प्रवेश कर गया है. सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात है कि अब सीएम सोरेन के साथ ही छात्रों का गुस्सा का गुस्सा कांग्रेस पर भी फूट रहा है. आज यानी 16 अगस्त को छात्रों ने ऐलान किया है कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला फूंकेंगे. इसके साथ ही, प्रदर्शकारियों ने ऐलान किया है कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग करते हुए 20 अगस्त को रांची में उनके आवास का घेराव करेंगे. छात्रों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने हमसे जो बात की थी वो छलावा था.
छात्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने हमसे बात की थी लेकिन वह छलावा था. अगर सोरेन सरकार उनकी बात नहीं मान रही है तो राहुल गांधी को उनकी सरकार से कांग्रेस का समर्थन वापस लेना चाहिए. राहुल गांधी ने हमारे साथ धोखा किया है.
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा है कि अभी तक हमारा आंदोलन गांधीवादी तरीके से चल रहा था. अगर सरकार हमारी मांगों पर अमल नहीं करती है तो हमें भगत सिंह बनने में देर नहीं लेगेगी. उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती है कि हम गांधीवादी तरीके पर चलें, वे हमें भगत सिंह के रास्ते पर चलने को मजबूर कर रहे हैं.
झारखंड सरकार में कांग्रेस की कितनी हिस्सेदारी?
झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 41 सीटों की जरूरत पड़ती है. वहीं, 56 सीटों के बहुमत के साथ जेएमएम ने गठबंधन सरकार बनाई है. यह गठबंधन इंडिया का ब्लॉक का हिस्सा है. INDIA ब्लॉक के पास 56 सीटों का बहुमत है, इसमें से जेएमएम यानी झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 34, कांग्रेस के पास 16, आरजेडी के पास 4 और CPIML के पास 2 सीटें हैं.
कांग्रेस समर्थन वापस लेगी तो क्या होगा?
अगर झारखंड में कांग्रेस, जेएमएम सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेती है तो जेएमएम बहुमत के आंकड़े 41 से एक सीट कम यानी 40 पर आ जाएगी. ऐसे में सरकार गिरने की स्थिति पैदा हो जाएगी. लेकिन इसके बाद भी झारखंड में सरकार में बने रहने के लिए जेएमएम के पास विकल्प मौजूद हैं. विधानसभा में जेकेएलएम यानी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का एक विधायक है. जेएमएम अगर इस पार्टी को अपने पाले में कामयाब होती है, तो कांग्रेस के बिना भी सूबे में सरकार बना सकती है.
वहीं, दूसरी तरफ अगर एनडीए गठबंधन पर नजर डालें तो, विधानसभा में बीजेपी के 21, एजेएसयू, जेडीयू और एलजेपी के एक-एक विधायक हैं.
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