- झारखंड के गिरिडीह में जंगली बाघ ततैया के हमलों में पिछले 25 दिनों में पांच लोगों की मौत हो गई
- जंगली ततैया ने प्रखंड के विभिन्न हिस्सों में लगभग 200 लोगों को डंक मारा, जिनमें 5 की मौत हो गई
- जंगली बिरनी का आतंक यहां पहली बार देखने को मिला है, पहले यहां मधुमक्खी का आतंक होता था
जंगली ततैया इतनी खरनाक होती है कि इसका डंक जान तक ले सकता है. झारखंड के गिरिहीड में बाघ ततैया ने अपने डंक से पिछले 25 दिनों में 5 लोगों की जान ले ली. ततैया के आतंक से गांव के लोग सदमे में हैं. इस जंगली ततैया ने प्रखंड के अलग-अलग हिस्से में करीब 200 लोगों को डंक मारा है. 60 से ज्यादा लोगों का सरकारी अस्पताल में इलाज किया गया. जबकि बाकी लोगों का इलाज अलग-अलग तरीके से किया गया.
स्थानीय पत्रकार बसंत सिन्हा ने कहा कि पहले मधुमक्खी से लोग परेशान रहते थे. इस बार बिरनी (ततैया) ने धावा बोलना शुरू कर दिया है. इन हमलों में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने बताया कि पिछले चार - पांच सालों में इस तरह के हमलों में 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. उन्होंने बताया कि यहां पर बिरनी यानी कि बाघ ततैया का आतंक पहली दफा देखने को मिला है.

जंगली बिरनी के हमले में 5 लोगों की मौत
जंगली बिरनी के हमले से सबसे पहली मौत बिरने के शिक्षक देवेंद्र सिंह की हुई थी. देवेंद्र सरकारी टीचर थे. 2 सितंबर को स्कूल में उनको ततैया ने काट लिया था. उनको स्कूल से लेने पहुंचा उनका बेटा भी हमले में बुरी तरह जख्मी हो गया था. बेटे जीवन ने बताया कि दोनों बाइक से आ रहे थे तभी अचानक बिरनी के झुंड ने उन पर हमला बोल दिया. सिर से लेकर पैर तक हर जगह डंक मारे. उन्होंने बताया कि बिरनी इतनी खतरनाक होती है कि एक बार शरीर पर चिपक जाए तो छोड़ती नहीं है.
मृतक देवेंद्र के भतीजे चंदन कुमार सिंह ने बताया कि जब उनके चाचा को घर लाया गया तो उसके शरीर से कई बिरनियों को निकाला गया. धनेश्वर यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. वे जंगल में बकरी चराने गए थे तभी उन पर बिरनी ने हमला कर दिया. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ शहंशाह अहमद ने बताया कि अभी तक लगभग 60 लोग बिरनी के हमले के बाद अस्पताल आ चुके हैं. गंभीर घायलों को गिरिडीह रेफर किया गया है. अभी तक 4-5 लोगों की मौत हो चुकी है. बिरनी के डंक मारने से शरीर में बहुत जलन होती है और सूजन जाती है, खुजल होती है. ये बहुत ही खतरनाक है.

एशियन जॉइंट हॉर्नेट का आतंक
जंगली बिरनी की पहचान अभी तक एशियन जॉइंट हॉर्नेट ( बाघ ततैया ) के तौर पर की गई है. लोगों का कहना है कि बिरनी लगभग डेढ़ से दो इंच लंबी होती है. उस पर बाघ जैसी लकीरें होती हैं. यह बाघ ततैया है. क्षेत्र के रेंजर अनिल कुमार ने भी बताया कि इसकी नस्ल एशियन जॉइंट हॉर्नेट की जैसी लग रही है. संभवतः दूसरे क्षेत्र से ये गिरिडीह आई हैं.उन्होंने बताया कि अब तक बिरनी को भगाने के लिए उनके पास कोई योजना नहीं है. वैसे सूचना सीनियर अधिकारियों को दी गई है. आपदा प्रबंधन विभाग ही इस मामले का हल निकाल सकता है.
2 सितंबर को शिक्षक देवेंद्र सिंह, 7 सितंबर को कालेश्वर यादव, 13 सितंबर को धनेश्वर यादव,15 सितंबर को सदिक मियां, 25 सितंबर को सबिया देवी की मौत ततैया के काटने की वजह से हो गई. पिछले एक महीने से यहां जंगली बिरनी ने कहर बरपा रखा है.अब तक 200 से ज्यादा लोग इनका शिकार हो चुके हैं.

जंगली ततैया कैसे भगाएं?
जंगली ततैया सुबह और शाम के समय काफी सुस्त हो जाती है. ये समय उसे भगाने के लिए सही माना जाता है. पानी के भीतर सर्फ या लिक्विड सोप मिलाकर उनके छत्ते पर स्प्रे करना चाहिए. इस दौरान शरीर कपड़े से जरूर ढकें. हालांकि इसके लिए एक्सपर्ट से सलाह लेना बहुत जरूरी है.
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