जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) के SSP पीयूष पांडेय और सरायकेला-खरसावां की SP निधि द्विवेदी को उनके पद से हटा दिया गया. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देश पर की गई है. इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण 4 दिन पहले जमशेदपुर में हुई चर्चित हिमांशु सिंह हत्याकांड को माना जा रहा है. इस घटना ने पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे.
पुलिस के सामने हुई थी घटना
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी. हमलावरों ने युवक पर हमला करके फरार हो गए थे. इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार और पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया, जबकि आम लोगों में भी भारी नाराजगी देखने को मिली.
सीएम ने तलब की थी रिपोर्ट
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की. प्रारंभिक समीक्षा में अपराध नियंत्रण, पुलिस की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में गंभीर कमियां सामने आने की बात कही गई. इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं दोनों जिलों के पुलिस प्रमुखों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया.
सरकार पहले कर रही थी समीक्षा
सरकार का मानना है कि पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले औद्योगिक और संवेदनशील क्षेत्र है. ऐसे इलाकों में लगातार आपराधिक घटनाएं, गैंगवार और हत्या जैसी वारदातें पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है. हाल के महीनों में दोनों जिलों में अपराध की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिनकी वजह से सरकार पहले से ही पुलिस प्रदर्शन की समीक्षा कर रही थी.
पुलिस के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन
जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में 28 जून 2026 (शनिवार) की रात बार के बाहर हुई हिंसक घटना हुई थी, जिसमें गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह की 30 जून 2026 (सोमवार) को इलाज के दौरान मौत हो गई थी. इसके बाद पूरे शहर में विरोध-प्रदर्शन, सड़क जाम और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया.
कैसे हुई घटना?
पुलिस के अनुसार, बिष्टुपुर के एक बार में कुछ युवक महिलाओं से छेड़खानी कर रहे थे. हिमांशु सिंह और उनके साथी ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद और मारपीट शुरू हो गई. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, हिमांशु और उनके साथी को अपनी पेट्रोलिंग गाड़ी में बैठा लिया.
आरोप है कि इसी दौरान हमलावर पुलिस की मौजूदगी में दोनों युवकों को गाड़ी से बाहर खींच लाए, और उन पर हमला कर दिया. हमले में हिमांशु सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके साथी भी बुरी तरह जख्मी हुए. दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान हिमांशु सिंह की मौत हो गई थी.
पुलिस पर क्यों उठे सवाल?
इस मामले में सबसे बड़ा आरोप यह है कि हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ. जांच में पेट्रोलिंग टीम की लापरवाही सामने आने के बाद तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई की.
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