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वीपी सिंह से लेकर मनमोहन तक, 6 सरकारों से रहे संबंध, NIA बोला- हमदर्दी पाने का तरीका, यासीन को मिले सजा-ए-मौत

NIA ने कहा है कि कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के कई आतंकी संगठनों से संबंध थे. एजेंसी ने कोर्ट से उसके लिए मौत की सजा की मांग की है.

वीपी सिंह से लेकर मनमोहन तक, 6 सरकारों से रहे संबंध, NIA बोला- हमदर्दी पाने का तरीका, यासीन को मिले सजा-ए-मौत
  • NIA ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को मौत की सजा देने की मांग दिल्ली हाई कोर्ट में की है
  • यासीन मलिक ने दावा किया कि छह अलग-अलग सरकारों के साथ उसका कश्मीर मुद्दों पर कामकाजी रिश्ता रहा है
  • NIA ने मलिक के सीनियर नेताओं और अफसरों के नाम लेने के दावे को केवल हमदर्दी पाने का प्रयास बताया है

NIA ने कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को मौत की सजा देने की मांग की है. NIA ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि मलिक ने जिन सीनियर नेताओं और अफसरों का जिक्र किया है, वह सिर्फ़ लोगों की हमदर्दी पाने के लिए है और उसका उसके अपराध से कोई लेना-देना नहीं है. मलिक ने कोर्ट में दावा किया था कि 1990 से लेकर अब तक उसका लगातार छह सरकारों के साथ कामकाजी रिश्ता रहा है.

यासीन मलिक ने सरकारों के साथ कामकाजी रिश्ते का किया था दावा

यासीन मलिक ने दावा किया था कि 1990 से लेकर अब तक लगातार छह सरकारों के साथ उसका कामकाजी रिश्ता रहा है. इन सरकारों की अगुवाई उस समय के प्रधानमंत्रियों वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर, पी.वी. नरसिम्हा राव, एच.डी. देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह ने की थी. यासीन ने दावा किया कि उसे कश्मीर से जुड़े मुद्दों, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा, तरक्की और शांति पर बातचीत के लिए शामिल किया गया था. मलिक ने कहा, 'सत्ता में रही इन सरकारों ने मुझे बार-बार सक्रिय रूप से शामिल किया और मुझे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलने के लिए सक्रिय रूप से मनाया.'

हमदर्दी पाने के लिए है यह दावा-NIA 

इन दावों को खारिज करते हुए NIA ने कहा है, 'सीनियर नेताओं, मीडियाकर्मियों, विदेशी प्रतिनिधियों और अफसरों के नाम लेने से जुड़े बाकी मामले सिर्फ लोकप्रियता हासिल करने और लोगों की हमदर्दी पाने के लिए हैं और इनका इस मामले की मेरिट से कोई लेना-देना नहीं है.' NIA ने आगे कहा कि यासीन के कई आतंकी संगठनों और आतंकी संगठन LeT के समर्थकों के साथ अच्छे संबंध थे.

NIA ने कहा, 'सरकारी अफसरों के नाम लेने भर से आरोपी यासीन मलिक उन अपराधों से बरी नहीं हो जाता, जिनके लिए उस पर आरोप लगाए गए थे और उसे दोषी ठहराया गया था. इसलिए, इन दावों को खारिज किया जाता है और इन पर किसी जवाब की जरूरत नहीं है.' इसके अलावा, एजेंसी ने कहा है कि सीनियर नेताओं और सीनियर अफसरों के नाम लेने भर से यह सच नहीं बदल जाता कि यासीन मलिक के आतंकी हाफिज सईद और दूसरे आतंकियों के साथ संबंध थे.

यासीन मलिक को मई 2022 में ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में आतंकी फंडिंग और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उसने इस मामले में अपना गुनाह कबूल कर लिया था और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को चुनौती नहीं दी थी. NIA ने तब हाई कोर्ट में अपील दायर कर उसके लिए मौत की सजा की मांग की थी. आज सुनवाई के दौरान, NIA की ओर से पेश हुए SPP अक्षय मलिक ने जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच को बताया कि एजेंसी ने जवाबी हलफनामा दायर कर दिया है.

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लेखक के बारे में
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नूपुर डोगरा
Legal Correspondent
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