भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार 6 में से 3 यूक्रेनी नागरिकों ने जांच एजेंसियों की पूछताछ में एक बड़ा खुलासा किया है. सूत्रों के अनुसार अभी तक की पूछताछ में इन आरोपियों ने माना है कि उन्हें युद्ध लड़ने का भी अनुभव रहा है. जांच में पता चला है कि इन गिरफ्तार आरोपियों का म्यांमार में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल रहे हैं. आपको बता दें कि इन तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ़्तार किया गया था.
आपको बता दें कि बीते दिनों म्यांमार में आतंकी ट्रेनिंग देने वाले 7 विदेशी आरोपियों को भारत के खिलाफ साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. इन गिरफ्तार आरोपियों में तीन यूक्रेनी नागरिक भी शामिल थे. तीनों आरोपियों की पहचान पेट्रो हुरबा (36), स्लिविएक तारास (37) और इवान सुकमानोव्स्की (34) के रूप में की गई थी. इनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
जांच में सामने आया है कि ये तीनों यूक्रेनी नागरिक 18 दिसंबर 2025 को संयुक्त अरब अमीरात से भारत आए थे. इसके बाद ये लोग पूर्वोत्तर भारत के रास्ते मिजोरम पहुंचे और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार के चिन राज्य में प्रवेश कर गए. सूत्रों के मुताबिक जब ये लोग पूर्वोत्तर से वापस लौटकर लखनऊ आए तो शहर के एक होटल में ठहरे थे. होटल मालिक ने नियम के मुताबिक विदेशी मेहमानों की जानकारी वाला “फॉर्म-सी” पुलिस को जमा किया. इसी जानकारी के आधार पर जांच एजेंसियों को इनकी गतिविधियों का पता चला और इन्हें ट्रैक किया गया.
जांच एजेंसियों के अनुसार तीनों संदिग्ध लखनऊ एयरपोर्ट से मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर जाने की तैयारी में थे. इसी दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने इन्हें एयरपोर्ट पर ही पकड़ लिया. फिलहाल एजेंसियां तीनों से पूछताछ कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि म्यांमार में इनकी गतिविधियां क्या थीं, वे किन लोगों के संपर्क में थे और क्या इनके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हैं. आपको बता दें कि करीब 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, जिससे इस नेटवर्क के और बड़ा होने की आशंका जताई जा रही है.
गुवाहाटी से मिजोरम गए
जांच एजेंसियों के अनुसार, ये विदेशी नागरिक पहले गुवाहाटी पहुंचे और वहां से मिजोरम चले गए. यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिजोरम जाने के लिए जरूरी RAP/PAP परमिट भी इन लोगों ने नहीं लिया था. इसके बाद ये सभी अवैध तरीके से सीमा पार कर म्यांमार पहुंच गए. मिजोरम की करीब 500 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के चिन और रखाइन राज्यों से लगती है, जो इस पूरे नेटवर्क में एक अहम कड़ी मानी जा रही है. जांच में बड़ा खुलासा यह हुआ है कि ये विदेशी नागरिक म्यांमार के एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (EAGs) के संपर्क में थे.
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