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नारी शक्ति की उड़ान: कैगा न्यूक्लियर प्लांट की कमान संभालेंगी आरएम नचम्मई

नचम्मई 15 मार्च 2026 से कर्नाटक स्थित कैगा जनरेटिंग स्टेशन की यूनिट-3 और 4 की मुख्य अधीक्षक का कार्यभार देखेंगी. इस भूमिका में वे संयंत्र के संचालन, रखरखाव और इंजीनियरिंग सहायता विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगी.

नारी शक्ति की उड़ान: कैगा न्यूक्लियर प्लांट की कमान संभालेंगी आरएम नचम्मई
  • आरएम नचम्मई ने NPCIL के किसी परमाणु संयंत्र में पहली महिला मुख्य अधीक्षक नियुक्‍त किया गया है.
  • नचम्मई 15 मार्च 2026 से कर्नाटक के कैगा जनरेटिंग स्टेशन की यूनिट 3 और 4 की जिम्मेदारी संभालेंगी.
  • NPCIL चेयरमैन ने नचम्मई को महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बताया और इसे युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा माना.
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भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में लैंगिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है. आरएम नचम्मई ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के अंतर्गत किसी कार्यरत परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली महिला मुख्य अधीक्षक बनकर इतिहास रच दिया है. उनकी यह नियुक्ति न सिर्फ संगठन के लिए बल्कि भारत के स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा भविष्य के लिए भी एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है, खासकर तब जब देश 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है. 

नचम्मई 15 मार्च 2026 से कर्नाटक स्थित कैगा जनरेटिंग स्टेशन की यूनिट-3 और 4 की मुख्य अधीक्षक का कार्यभार देखेंगी. इस भूमिका में वे संयंत्र के संचालन, रखरखाव और इंजीनियरिंग सहायता विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगी. यह पद परमाणु ऊर्जा प्रणाली में सबसे तकनीकी रूप से गहन और जिम्मेदारी से भरपूर पदों में से एक माना जाता है, जिसमें रिएक्टर संचालन, सुरक्षा प्रणालियों और संयंत्र के प्रदर्शन की चौबीसों घंटे निगरानी शामिल है.

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Image Credit: NPCIL

नारी शक्ति का सशक्‍त उदाहरण: पाठक 

NPCIL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्‍टर बीसी पाठक ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, “नचम्मई नारी शक्ति का सशक्‍त उदाहरण हैं. परमाणु ऊर्जा संयंत्र के महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण संचालन क्षेत्र में महिला नेतृत्‍व के रूप में पदोन्नति उनकी तकनीकी क्षमता के कारण संभव हुई है और इससे निश्चित रूप से युवा महिलाओं के लिए भारतीय परमाणु उद्योग में शामिल होने के द्वार खुलते हैं, क्योंकि भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. एक महिला का रिएक्टर का मुख्य अधीक्षक बनना NPCIL के 10,000 कर्मचारियों के लिए बड़ी उपलब्धि है. स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को अपनाते हुए भारत को परमाणु क्षेत्र में और अधिक महिला नेतृत्‍व की जरूरत है.”

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले हुई यह नियुक्ति और भी खास मानी जा रही है. करीब 10 हजार कर्मचारियों वाले NPCIL में केवल 900 महिलाएं कार्यरत हैं, जिससे उच्च तकनीकी भूमिकाओं में लैंगिक असंतुलन साफ नजर आता है. ऐसे में नचम्मई का रिएक्टर संचालन के शीर्ष पद तक पहुंचना बदलाव का मजबूत संकेत है. 

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Image Credit: NPCIL

नचम्‍मई का 35 सालों से अधिक का करियर 

35 सालों से अधिक के करियर में नचम्मई ने तकनीकी उत्कृष्टता और नेतृत्व का परिचय दिया है. मद्रास विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक रहीं नचम्मई ने 1991 में NPCIL जॉइन किया था. जल्‍द ही उन्‍होंने खुद को साबित किया और NPCIL के इंजीनियर प्रशिक्षुओं के दूसरे बैच में शीर्ष स्थान हासिल किया, जिसके लिए उन्‍हें विक्रम साराभाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया. परमाणु संयंत्र संचालन के साथ-साथ उन्होंने परमाणु सुरक्षा और जन जागरूकता अभियानों में भी अहम भूमिका निभाई है. 

कैगा परमाणु संयंत्र वर्तमान में 880 मेगावाट क्षमता का है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 2,280 मेगावाट किया जाना प्रस्तावित है.  ऐसे समय में उनका नेतृत्व भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार को नई मजबूती देगा. 

युवा महिला इंजीनियरों के लिए आदर्श 

पिछले कई दशकों में उन्होंने मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन और कैगा जनरेटिंग स्टेशन यूनिट 1 और 2 में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है. इस दौरान उन्‍होंने संचालन, रखरखाव और इंजीनियरिंग कार्यों में व्यावहारिक अनुभव हासिल किया. उनके योगदान को 2010, 2014 और 2017 में NPCIL विशेष योगदान पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो किसी एक उपलब्धि के बजाय उनके निरंतर योगदान को दर्शाता है. इसके साथ ही उन्‍होंने परमाणु सुरक्षा की वकालत की है और जन जागरूकता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में NPCIL का प्रतिनिधित्व किया है.

भारत जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं और बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा का तेजी से विस्तार करने की दिशा में अग्रसर है, ऐसे में नचम्‍माई की यात्रा एक पेशेवर उपलब्धि और सांस्कृतिक बदलाव का महत्वपूर्ण मोड़ साबित होती है. उनकी सफलता उन्हें युवा महिला इंजीनियरों के लिए एक आदर्श बनाती है, जो यह संकेत देती है कि परमाणु ऊर्जा के सबसे जटिल और सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्र भी अब उनके लिए बंद नहीं हैं. इस अर्थ में उनकी कहानी केवल बाधाओं को तोड़ने की नहीं है, बल्कि समावेशी नेतृत्व के साथ भारत के परमाणु भविष्य को सशक्त बनाने की भी है.

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