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This Article is From Nov 08, 2025

महिलाएं सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि मीडिया की आत्मा... IWPC वर्षगांठ समारोह में बोले भावी CJI जस्टिस सूर्य कांत

जस्टिस सूर्य कांत ने महिला क्रिकेट टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं, चाहे क्रिकेट का मैदान हो या प्रेस गैलरी. उन्होंने कहा कि IWPC की शुरुआत किसी प्रभावशाली संस्था के रूप में नहीं बल्कि एक साहसिक विचार के रूप में हुई थी. 

महिलाएं सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि मीडिया की आत्मा... IWPC वर्षगांठ समारोह में बोले भावी CJI जस्टिस सूर्य कांत
  • देश के भावी CJI जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि महिलाएं सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि मीडिया की आत्मा हैं.
  • उन्‍होंने IWPC के वर्षगांठ समारोह में महिला पत्रकारों की भूमिका और डिजिटल युग में उनकी सुरक्षा पर जोर दिया.
  • उन्‍होंने महिलाओं को सुरक्षा और फेक नैरेटिव्स से बचाने के लिए नियामक संस्थाओं से नियम बनाने की अपील की है.
नई दिल्‍ली :

देश के भावी CJI जस्टिस सूर्य कांत ने महिला पत्रकारों की भूमिका, चुनौतियों और डिजिटल युग में उनकी सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि “महिलाएं सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि मीडिया की आत्मा हैं”. साथ ही उन्‍होंने कहा कि आप सिर्फ कहानी सुनाने वाली नहीं हैं, बल्कि एकजुटता, सहनशक्ति और साझा दृष्टि की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक हैं. जस्टिस सूर्य कांत इंडियन वुमेन्स प्रेस कॉर्प्स (Indian Women's Press Corps) की 31वीं वर्षगांठ पर बोल रहे थे. 

जस्टिस सूर्य कांत ने महिला क्रिकेट टीम का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं, चाहे क्रिकेट का मैदान हो या प्रेस गैलरी. उन्होंने कहा कि IWPC की शुरुआत किसी प्रभावशाली संस्था के रूप में नहीं बल्कि एक साहसिक विचार के रूप में हुई थी. 

उन्‍होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ ‘टेबल पर जगह' नहीं, बल्कि बहस और विमर्श की दिशा तय करने का सम्मान भी मिलना चाहिए. 

AI युग में नई चुनौतियां

जस्टिस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) ने पत्रकारिता की गति और विश्लेषण क्षमता को बढ़ाया है. हालांकि यह अपने साथ गंभीर जोखिम भी लेकर आई है, विशेष रूप से महिला पत्रकारों की निजता, गरिमा और सुरक्षा के लिए. उन्होंने बताया कि डीपफेक और फर्जी छवियां अब महिलाओं को ऑनलाइन हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का निशाना बना रही हैं. 

उन्‍होंने कहा, “महिला पत्रकारों को उनके विचारों से नहीं, बल्कि झूठी और छेड़छाड़ की गई सामग्री से डराने का प्रयास किया जाता है. यह न सिर्फ उनकी पेशेवर साख को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता को भी कमजोर करता है.”

झूठे नैरेटिव्स और ‘फेक कंटेंट' का खतरा

जस्टिस सूर्य कांत ने चेतावनी दी कि फर्जी खबरों और छेड़छाड़ वाले वीडियो से पीड़ितों की सामाजिक और पेशेवर प्रतिष्ठा स्थायी रूप से प्रभावित होती है. 

उन्‍होंने कहा कि लोकतांत्रिक समाज ऐसे खतरों को ‘ऑनलाइन अभिव्यक्ति की कीमत' कहकर सामान्य नहीं कर सकता है. 

नैतिकता और सुरक्षा के लिए आह्वान

जस्टिस कांत  ने मीडिया संगठनों और नियामक संस्थाओं से अपील की कि वे महिलाओं की सुरक्षा और ‘फेक नैरेटिव्स' से रक्षा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल और उद्योग-स्तरीय नियम बनाएं. 

उन्होंने IWPC से आग्रह किया कि वह डिजिटल सेफ्टी ट्रेनिंग और नैतिक पत्रकारिता के मानदंडों पर अग्रणी भूमिका निभाए 

अपने संबोधन में उन्‍होंने कहा, “आप सिर्फ मीडिया में काम करने वाली महिलाएं नहीं हैं, बल्कि मीडिया की आत्मा हैं. वर्तमान को परिभाषित करती हैं, भविष्य को आकार देती हैं और अनगिनत लोगों में आशा जगाती हैं.”

उन्होंने संदेश दिया कि महिला पत्रकारों की भूमिका सिर्फ पेशेवर नहीं, लोकतंत्र की बुनियाद से जुड़ी है. AI और डिजिटल मीडिया के युग में नैतिकता और सुरक्षा की नई परिभाषा जरूरी है. महिला पत्रकारों के लिए ऑनलाइन हिंसा और डीपफेक से बचाव हेतु ठोस नीतियां बननी चाहिए. 

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