नमस्कार मैं रवीश कुमार तय करना मुश्किल हो रहा है कि न्याय का मजाक उड रहा है या जनता का जनता न्याय का मजाक उडा रही है या राजनीति जनता का कहीं हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए कैदियों को बाहर आने पर माला पहनाया जा रहा है तो कहीं हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए कैदी के बाहर आने पर सत्संग चल रहा है । ये कैसा सत्संग है जहाँ हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए हुए व्यक्ति से धार्मिक उपदेश सुने जा रहे हैं? क्या धर्म की राजनीति नागरिकों को इतना कमजोर कर देती है कि वो धर्म के नाम पर यह सब देखना बंद कर देता है? क्या धर्म की राजनीति यहीं सिखाती है की हत्या पाप नहीं, बलात्कार पाप नहीं अगर नहीं सिखाती है तब इन मामलों में देश की अदालत जब सजा सुना देती तब फिर समाज में इनका इतना सम्मान कैसे रह जाता? क्या जनता ने लिख कर दे दिया है की हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए लोगों का राजनीतिक सम्मान किया जाए? अगर वो कैदी अपने धर्म का है तो उसका और भी सम्मान किया जाए? क्या जनता और नागरिक का इतना नैतिक पतन हो गया है? इसी पंद्रह अगस्त को प्रधानमंत्री ने जो कहा क्या उसे प्रधानमंत्री ही भूल गए? क्या बीजेपी भी प्रधानमंत्री कि इस बात को भूल गई है? प्रभाव से संस्कार से रोजमरा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात है, मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं । नारी का गौरव राज के सपने पूरे करने में बहुत बडी पूंजी बनने वाला है । ये सामर्थ में देख रहा हूँ और इसलिए मैं इस बात का आग्रही हमारा सवाल साफ है क्या गुजरात में जो हुआ बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार करने वालों और उसकी बेटी सहित परिवार के सदस्यों की हत्या करने वालों की सजा कर दी गई । समय से पहले छोडा गया, उन्हें माला पहनाया गया ।
क्या यह नारी को अपमानित करने वाली बात नहीं थी? क्या प्रधानमंत्री मोदी बता देंगे कि यही है नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक् का संकल्प? हरियाणा में हत्या और बलात्कार के मामले में दोषी करार दिए गए गुरमीत सिंह की सत्संग में बीजेपी के नेता जाते हैं । डिप्टी स्पीकर जाते हैं विधानसभा के । क्या यही है नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प? हम फिर से सुनाना चाहते हैं कि इस पंद्रह अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था? स्वभाव से संस्कार से रोजमरा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात है मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं । नारी का गौरव राज के सपने पूरे करने में बहुत बडी पूंजी बनने वाला है । ये सामर्थ में देख रहा हूँ और इसलिए मैं इस बात का आग्रह हो तो प्रधानमंत्री कौन सा सामर्थ्य देख रहे हैं, यह तो उन्हीं की अपील है । कम से कम उन्हें बोल देना चाहिए था । जब अफ्रीका से चीता लाया गया तब दिल्ली में प्रधानमंत्री ने कहा, पहले कबूतर छोडते थे, अब हम चीता छोडते हैं । यही बात उन्होंने गुजरात में भी दोहराई । तो अखबारों ने हेडलाइन लगाई कि पहले कबूतर छोडते थे, अब चीता छोडते हैं । जब आप और दो साध्वियों के साथ बलात्कार करने वालों के जेल से बाहर आने पर राजनीतिक और धार्मिक सम्मान होता देखते हैं तो प्रधानमंत्री कि यह बात अलग तरीके से कानों में गूंजती है । क्या हमारी राजनीति और हमारा समाज दो साध्वियों के साथ बलात्कार करने वालों के साथ खडा होगा?
फिर बिलकिस बानो और उन दो साध्वियों के साथ कौन खडा है? आप देख रहे हैं क्या इस देश से महिलाएं कहीं गायब हो गई हैं? या उन्हें इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता है? मुँह रहे हैं, उनकी गलतियाँ है, उनको शिक्षा होनी चाहिए । हम ये नहीं कह रहे कि उनको पुँछ उनको भी पता चला कि उन्होंने क्या किया और आज सभी महिलाएं इस वजह से डरी हुई थी । कल मेरे साथ क्या हो सकता है पर्टिकुलर ली आज जो हम देख रहे हैं देश का जो माहौल है और ऍम के लिए ऍम एक टार्गेटिंग मुँह कम्यूनिटी एक फॅार किया जा रहा है । इसमें जो ऍम वर्ड है जो प्रिविलेज हैं उनको सामने आना है । चाहे वो धर्मगुरु हो, राम रहीम का मामला हो, अंकिता का मामला हो या हाथरस का मामला हो या बिलकुल कोई भी कोई भी जाती धर्म का से जो भी पुरुष अगर आरोपी है बलात्कारी है तो उसके उसके धर्म जाति से ऊपर उसका गुनाह है और उसको उस तरह से पनिशमेंट मिलना चाहिए ताकि एक समाज में फॅस जा सके । बाबा जमानत पे छूट कर आए हैं जिसके बाद वो पर वचन दे रहे है । ऑनलाइन और लोग उनको देख रहे हैं जो कि बहुत ज्यादा ही गलत है । समाज के लिए बहुत ज्यादा गलत मैसेज पहुँच जा रहा है । अगर ऐसे ही आरोपी खुलेआम हमारे देश में घूमते रहेंगे तो कानून का भय लोगों के मन से और खौफ दूर हो जाएगा । के मामले में चुप्पी पर कहा गया कि धर्म के कारण हो सकता है चुप्पी साध ली गई हो लेकिन फिर दो साध्वियों का कौन सा धर्म है? क्या किसी को नहीं पता? उन साध्वियों के लिए भी कोई स्मृति ईरानी या कोई मोहन भागवत या कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों नहीं बोल पा रहे है? क्या इसके खिलाफ नहीं बोल कर मोदी सरकार के मंत्रियों ने राजनीतिक सम्मान का संदेश नहीं दिया? आखिर उनकी चुप्पी को और किस तरह से समझा जाए? हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाया? व्यक्ति जेल से बाहर आने पर स तंग करता है । उसमें बीजेपी के नेता जाते हैं ।
इसे बीजेपी और हम किस नजर से देखते हैं? क्या ये सवाल धर्म की नैतिकता की सूची में नहीं आता है? दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में अपने ही प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में दैनिक पूरा सच के संपादक रामचन्द्र छत्रपति जी की हत्या के मामले में गुरमीत सिंह राम रहीम को सजा मिली है । क्या इससे पहले आपने हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए किसी व्यक्ति को इतना सजा धजा देखा है? इससे हम क्या संदेश दे रहे हैं और किसे दे रहे हैं? गुरमीत सिंह को चालीस दिनों के पैरोल पर छोडा गया । बागपत से सतसंग कर रहे हैं । करनाल के चौधरी रिसॉर्ट में नलवा हिसार से बीजेपी के विधायक रणवीर गांगवा भी सत्संग में शामिल होते हैं । ऑनलाइन उनके अलावा करनाल शहर की मेयर रेणूबाला गुप्ता डिप्टी मेयर नवीन कुमार सीनियर डिप्टी मेयर राजेश भाजपा के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र राणा इस सत्संग में हिस्सा लेते रणवीर गांगवा तो हरियाणा विधानसभा में डिप्टी स्पीकर करनाल वही शहर है जहां से हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर चुनकर आते हैं । उनकी विधानसभा हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए गुरमीतसिंह के सामने हाथ जोडकर खडे हैं । उन्हें करनाल आने का न्योता दे रहे हैं । आप सुनिए परम पिता मालिक से अब आप खुद मालिक है वो तो आप जानते हैं कि कब वर्चुअल की बजाए खुद फिजिकल आकर के आप दर्शन देने का काम है । जल्दी करेंगे जी बिल्कुल ये तो उनकी रजा है ताज संगत की तरफ से आपके चरणों में पहनती करते हैं जी और यही कहेंगे की आप इसी तरीके से जिस तरीके से आप आशीर्वाद देते रहते हैं आपने मार्गदर्शन दिया है । समय समय के ऊपर आप किसी धड यकीन के साथ और जिस तरीके से आपने बताया कि जो भी केंद्र रखते हैं उनके घरों में कोई कमी नहीं रहती और आपके आपके जो आशीर्वाद है उसी का परिणाम है कि आज पूरी संगत यहाँ डेरे में ना करके यह मुँह करना पडा क्योंकि वो मेरा छोटा पड गया था इसलिए सुंदर सारे आए हैं । दो हजार चौदह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं ।
ना जाने कितने सौ करोड रुपए तो इसके आयोजनों और विज्ञापनों पर खर्च हो गए होंगे । तब भी भाजपा के विधायक को सफाई के संदेश के लिए हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए गुरमीतसिंह से संदेश लेने की जरूरत क्यों पड रही है? क्या करनाल शहर के लिए प्रधानमंत्री का संदेश काफी नहीं पडता है? सफाई अभियान की बात है जहाँ सारी प्रशासन पेल हो जाता है, वहाँ पे आप के आशीर्वाद से ये सारे जितने भी भाई बहन है खासकर फॅर हमेशा वहाँ मानवता की सेवा के अंदर खडे मिलते हैं । आपका आशीर्वाद है साथियों स्वच्छ भारत अभियान ने हर देशवासी के आत्मविश्वास और आत्मबल को एक नई ऊर्जा दी है । नई ताकत दिए उसको बढाया है लेकिन इसका सबसे अधिक लाभ देश के गरीब के जीवन पर दिख रहा है । स्वच्छ भारत अभियान से हमारी सामाजिक चेतना समाज के रूप में हमारे आचार व्यवहार में भी परिवर्तन आया है । जब स्वच्छता पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश है और बहुत सारा है । तब हत्या और बलात्कार के मामले में दोषी करार दिए गए गुरमीत सिंह के संदेश की जरूरत क्यों पडी? क्या पंचायत चुनाव जीतने के लिए विधानसभा का उपचुनाव जीतने के लिए हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए एक अपराधी के आशीर्वाद की जरूरत पडेगी? तब तो लोकसभा का चुनाव जीतने के लिए भारत की जेलों में हत्या और बलात्कार के मामले में जितने भी अपराधी बंद है, अभियुक्त और सजायाफ्ता उन सभी को छोड दिया जाएगा और उनसे आशीर्वाद मांगने चले जाएंगे । वैसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी दो हजार चौदह में सफाई को लेकर राम रहीम की अपील की तारीफ की, बाकायदा ट्वीट किया तब तो कोर्ट का फैसला नहीं आया था लेकिन बाद में दो हजार सत्रह में तो कोर्ट का फैसला आ गया ।
इसके बाद भी बीजेपी इसका बचाव कैसे कर सकती है? हरियाणा में बीजेपी की सरकार का ये दूसरा कार्यकाल है । लगातार केंद्र में बीजेपी की सरकार डबल इंजिन की सरकार में क्या इतना विकास हो गया है? क्या हुआ ही नहीं है की हत्या और बलात्कार के मामले में सजा पाए गुरमीत सिंह के बचाव में तरह तरह के तर्क खोजे जा रहे हैं । और पार्टी ने कोई कार्यवाही तक नहीं की । हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर इस सत्संग में हाजिर हुए हैं । देखिए सस्ता था अब जो सत्संग में किसी की मनाई तो है नहीं तो सत्संग बाॅल का तो जो भी आदमी जिन जिनको वहाँ पता लगा तो वहाँ पहुँच दिया उन्होंने अपने इच्छा जाहिर करिए आशीर्वाद आप चाहते हैं कि राम रहीम का आपके ऊपर आशीर्वाद बना रहे ताकि आप आगे चुनाव जीत सके । देखिए, सबसे बडी बात ये रहती है कि पब्लिक का आशीर्वाद बना रहे हैं क्योंकि जो भी चुनाव लडते हैं वो पब्लिक के उसपे लगता है और पब्लिक के काम करने के लडते हैं । पच्चीस अगस्त दो हजार सत्रह को जब पंचकूला की सीबीआई अदालत सजा सुनने वाली थी तब कई राज्यों में तनाव की स्थिति पैदा हो गयी । उस दिन गुरमीत सिंह राम रहीम को आश्रम की दो साध्वियों के साथ बाल बलात्कार के मामले में दस दस साल की सजा सुनाई गई । कुल बीस साल की सजा बिलकिस बानो की तरह दो महिलाएं आज खुद को कितना असहाय और असुरक्षित महसूस कर रही होंगी । जिस व्यक्ति को बलात्कार के मामले में सजा मिली, हत्या के मामले में सजा मिली, उसके सामने विधानसभा के डिप्टी स्पीकर हाथ जोडकर आशीर्वाद मांग रहे हैं या भारतीय राज्य व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल है । क्या यह भी प्रधानमंत्री के बोलने लायक विषय नहीं है? स्मृति ईरानी के बोलने लायक विषय नहीं है । राष्ट्रपति पद के चुनाव के बाद कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्र पत्नी कह दिया कितना बडा हंगामा हो गया ।
अधिरंजन चौधरी ने लिखित माफी मांगी मगर उसके बाद भी विवाद नहीं थमा क्योंकि बीजेपी बोल रही थी और गोदी मीडिया बीजेपी से भी ज्यादा बोल रहा था । अब दोनों चुप हो गए । उस समय महिला कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी के तेवर कितने तीखे होते थे । अब ये तेवर कहाँ गायब है? बिलकिस बानों पर नहीं बोल सके । दो साध्वियों के साथ बलात्कार करने वाला सजायाफ्ता के दरबार में बीजेपी के नेताओं के जाने पर बोल सकती थी । वैसे याद के लिए आप उस समय के तेवर को देख सकते हैं । महिलाओं के सम्मान के लिए कौन सा मुद्दा चुना जाता है, हल्का मुद्दा चुना जाता है या गंभीर मुद्दा चुना जाता है । आप देख सकते हैं । अब तो बीजेपी के नेता हत्या और बलात्कार के मामले में सजा काट रहे गुरमीत सिंह के सामने हाथ जोडकर ही खडे हो गए । करनाल के मेयर ने उन्हें पिताजी कह दिया । प्रधानमंत्री को गलत लगता है ना । स्मृति ईरानी को अगर लगता है तो दोनों को सार्वजनिक बयान देना चाहिए । रेणूबाला गुप्ता, मेयर उनके फेसबुक पेज पर कई तस्वीरें हैं जिनसे उनकी राजनीतिक गतिविधियों का अंदाजा मिलता है । ये तस्वीर उनकी प्रोफाइल में लगी है । प्रधानमंत्री मोदी के साथ और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ । पिताजी आपका आशीर्वाद बना रहे और पहले भी आप करनाल आए थे और स्वच्छता का जो संदेश आप ने दिया था उस से करनाल आगे बढा है और आगे भी आप गुरमीत सिंह, राम रहीम कौन है ये ठीक से समझ लेना चाहिए ।
पच्चीस अगस्त दो हजार सत्रह दिन आपको ले जाना चाहता हूँ फॅमिली उस दिन पंचकूला की सीबीआई की विशेष अदालत जज जगदीप सिंह ने एक साहसिक फैसला सुनाया । अलग से साहसिक इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि गुरमीत सिंह के समर्थकों ने फैसले वाले दिन जो माहौल बनाया था उस माहौल में सुनाया गया ये फैसला साहसिक ही लगता है । उस दिन इतनी गाडियों के काफिले के साथ गुरमीतसिंह पंचकूला की अदालत की तरफ रवाना हुआ । मीडिया इन गाडियों की संख्या दो सौ से लेकर चार सौ तक बताती रही । सिरसा से पंचकूला के बीच के रास्ते को खाली कराया गया । जैसे ही जज जगदीपसिंह फैसला सुनाते हैं कि गुरमीतसिंह दो साध्वियों के साथ बलात्कार के मामले में दोषी पाए जाते हैं, हिंसा भडक उठती है और गुरमीत सिंह को हेलिकॉप्टर से जेल ले जाया जाता है । सेना तक को बुलाया गया हिंसा इस तरह से भडके के पुलिस को काबू पाने के लिए गोलियां चलानी पडी । अडतीस लोग मारे गए । बडी संख्या में पुलिसकर्मी घायल । सरकारी दफ्तरों पर भी हमला हुआ । मीडिया पर भी हमला हुआ । पत्रकारों पर भी हमला हुआ था । दिल्ली के आनंद विहार में रीवा एक्सप्रेस की दो बोगियां जला दी जाती है । उस दिन साढे तीन सौ से अधिक रेलगाडियां रद्द कर दी गई थी । ये ताकत है प्रभाव है गुरमीत सिंह की लेकिन जब उनकी सभा में डिप्टी स्पीकर नतमस्तक नजर आएंगे, मेयर पिताजी कहेंगी तब आप उन दो साध्वियों के बारे में सोचिए, उन पर क्या गुजर रही होगी? छब्बीस अगस्त दो हजार सत्रह के प्राइमटाइम का एक हिस्सा आपको दिखाना चाहता हूँ ताकि आप कुछ अंदाजा कर सकें कि उन साध्वियों ने कैसी लडाई लडी होगी । एक पत्रकार की जान की कीमत समझ सकते हैं आप जिसने इन साध्वियों का साथ देकर अपनी जान दे दी । कुछ शानदार पुलिस अफसरों के बारे में भी समझ सकते हैं जिन्होंने बेहतरीन काम की ये पुराना हिस्सा देखिए मैं उन दो साध्वियों के बारे में आप दर्शकों को कुछ बताना चाहता हूँ जिन्होंने पंद्रह सोलह साल तक गवाही दी । तमाम दबावों के बीच लडा ।
आज की हिंसा के स्तर से आपको समझ जाना चाहिए कि उन दो लडकियों पर क्या गुजरी होगी । ये तस्वीर रामचंद्र छत्रपति की है जिन्होंने दैनिक पूरा सच में उस गुमनाम पत्र को छापा जिसमें दो साध्वियों के साथ बलात्कार और यौन हिंसा की बात हिंसा की बात लिखी थी । ये गुमनाम पत्र उस वक्त प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के पास पहुँचा और हरयाणा पंजाब कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास जो बाद में उन्होंने सिरसा कॅश इन कोर्ट को लिखा कि आप आप जाकर जांच कीजिए ऍम कोर्ट ने रिपोर्ट भेजा की इनके डर से कोई नहीं बोलता । छापने के कुछ ही समय भीतर छत्रपति जी पर हमला हुआ और उनकी मौत हो गई । दो साध्वियों के भाई रंजीत की भी हत्या कर दी गई । एक पत्रकार ने सच के लिए जान दे दी । क्या आप किसी भी इन नेताओं को जानते हैं जो वोट लेने के लिए डेरा में जाते हैं । उससे पहले छत्रपति की लडाई में साथ देने के लिए गए हो । हमने छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति से थोडी देर पहले बात की जो इस वक्त अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं । तस्वीर रामचंद्र छत्रपति की है । एक हंसता मुस्कुराता साहसिक पत्रकार बीच शहर में मार दिया गया । अंशुल ने बताया कि एक बार जब लडने का फैसला कर हम लोग घर से निकले तो रास्ते में बहुत से अच्छे लोग मिले । लेखराज ढोट, अश्विनी बख्शी, सीमा और राजेंद्र सच्चर जैसे वकीलों ने बिना पैसे के केस लडा । तमाम दबावों को तमाम दबावों के बाद भी हमारा और साध्वियों का इन लोगों ने साथ में । यही नहीं सीबीआई कॅापी सतीश डागर ना होते तो ये केस अपने मुकाम पर नहीं पहुँचता । सतीश डागर ने ही साध्वियों को मानसिक रूप से तैयार किया । एक लडकी का ससुराल डेरा का समर्थक था । जब उसे पता चला कि उसने गवाही दी है तो घर से निकाल दिया । इसके बाद भी लडकियाँ तमाम तरह के दबावों और भीड के खौफ का सामना करती रही । उस भीड के जिसके आगे आपकी चुनी हुई सरकार डरती है । सतीश डागर नहीं होते तो ये लोग खौफ का सामना नहीं कर पाते । अंशुल ने बताया कि सतीश डागर पर भी बहुत दबाव पडा मगर वे नहीं झुके ।
अगर ऐसी बात है तो एनडीटीवी इंडिया के करोडों दर्शकों की तरफ से सतीश डागर जैसे अफसरों को दिल से सलाम भेज रहा हूँ । बडे बडे आॅक्सी हिम्मत नहीं जुटा पाते । अपनी टोपी नेताओं के चरणों में रख देते हैं । मगर सतीश डागर ने कमाल का साहस दिखाया । अंशुल ने बताया कि पहले पंचकूला से सीबीआई की कोर्ट अंबाला में थी । जब ये लोग वहाँ सुनवाई के लिए जाते थे तब वहाँ भी बाबा के समर्थकों की भीड आतंक पैदा कर देती थी । हालत यह हो गई कि जिस दिन सुनवाई होती थी और बाबा की पेशी होती थी उस दिन अंबाला पुलिस लाइन के भीतर ॅ पी के ऑफिस में अस्थाई कोर्ट बनाया जाता था । छावनी के बाहर समर्थकों का हुजूम होता था । ऐसी हालत में उन दो साध्वियों ने गवाही दी है । पंद्रह साल तक ये आसान बात नहीं है उस बाबा के खिलाफ जिससे मिलने के लिए काँग्रेस के नेता बीजेपी के अमित शाह कैलाश मुझे वर्गीय हरियाणा के कॅश वहाँ सलामी देने के लिए जाती थी । जबकि ये नेता महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर आपके सामने सार्वजनिक रूप से वादा करते हैं । क्या इन्होंने साध्वी का साथ दिया परोल पर राम रहीम को छोडा जाता है । हरियाणा के गृहमंत्री कहते है जेल प्रशासन ने अपने स्तर पर फैसला ले लिया होगा, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है । क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इसी तरह का बयान अगर विपक्षी सरकार के किसी गृहमंत्री ने दिया होता अगर तेजस्वी यादव ने दे दिया होता कि उन्हें नहीं पता कि गृह विभाग ने या जेल प्रशासन ने अपने स्तर पर फैसला ले लिया । इसकी जानकारी उन्हें नहीं है । तब गोदी मीडिया क्या करता? बिहार में जंगलराज है, बडी बडी हैडलाइन लिखी जाती । क्या जेल प्रशासन वाकई अपने स्तर पर इतना बडा फैसला ले सकता है? नहीं, ऐसा मुझे मालूम नहीं है । ये जो सारी कार्यवाही की जाती है रोल देने की । ये जेल विभाग द्वारा की जाती है और उन्हीं के पास डिटेल जानकारी होती है कि किस आधार पर दी गई है और क्यों दी गई है ।
ऑफिस परोल पर छोडना बहस की बात है लेकिन मुख्य सवाल ये है के उसके सत्संग में बीजेपी के नेता जाते हैं तब भी उसका बचाव किया जाता है । जिस व्यक्ति को हत्या और बलात्कार के चार मामलों में सजा मिली हो और वो सत्संग कर रहा है जिसमें बडी संख्या में आम लोग भी शामिल हैं । महिलाएं भी शामिल है । खुशी का इजहार हो रहा है । नेता भी जा रहे हैं । बीजेपी के सांसद आस्था के नाम पर इसका बचाव करते हैं । पेट्रोल का विषय है क्योंकि ये लीगल प्रक्रिया इसके अंदर सरकार का कोई लेना देना नहीं है और लीगल तौर पर अप्लाई करना पडता है अप्लाई कर के व्यक्ति को वो जज उसको सुनते हैं । सुन कर के फिर उसको पेरोल देते हैं । वो उस की प्रक्रिया, कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से उसको पे रोल मिल लिया । उसमें सरकार का तो कोई है ही नहीं । और अगर रणबीर गंगवा की आप मैंने बात किया ये व्यक्ति की अपनी आस्था की बात है । कौन कहाँ जाएगा? कहाँ नहीं नहीं देखिए ये ये अपनी आस्था की बात होती है । हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रामविलास शर्मा से गुरमीतसिंह के प्रसंग पर सवाल पूछ कर पत्रकारों ने गलती कर दी । भाजपा नेता को याद आ गया कि वे भी कभी पत्रकार हुआ करते थे । हाँ वो सवाल था कि एक ऐसा व्यक्ति हत्यारा है और उसकी सभा मंगाई है इसलिए सरकार का इसका ही नहीं । मैं नगालैंड का पुराना पत्रकार हूँ । पत्रकारों की लडाई में हरियाणा में मंत्री होते ही नहीं लगता रहा हूँ । पर आपका जो अंदाज कानूनी तौर पर अपराध क्या वो रणवीर गंगा हरियाणा अब उस बात की जानकारी आपको है, हमको नहीं है तो उस बात का । दरअसल पत्रकार पूछ ही नहीं रहे हैं । बीजेपी के महिला सांसदों से नहीं पूछ रहे हैं । बीजेपी के मंत्रियों से इस पर सवाल नहीं पूछ रहे हैं । पटना में जब मनीष कुमार ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष से पूछा तो जवाब वही आया की सजा पूरी होने पर रिहा किया गया है । क्या सजा पूरी होने पर रिहा किया गया या पहले छोडा गया? मामला क्या है और जवाब में क्या कहा जा रहा है? आप सुनिए के बारे में सवाल फॅमिली है लेकिन यही बीजेपी की सरकार, आपकी सरकार वो मिनिस्टर है ।
बलात्कार के मामले जो है उनको बरी करने का आपकी सरकार क्या है? यहाँ किसी जगह नहीं जो सजा होती है । सजा पूरा होने के बाद ही गलत बात मत बोलिए । गलत अफवाह नहीं फैलाइए । जितने दिन की सजा हो होने का सजा पूरी होने के बाद ही कभी कोई और वो दिल दिल्ली से गाइड नहीं होता, स्टेट का मैटर है और किसी भी का भी जो सजा पूरा हो गया उसके बाद अगर कोई स्टेट कर रहा तो यह उस स्टेट में पूछिए । बिहार स्टेट में बिहार के प्रश्न पूछे और जिनको सजा हुई है उसके बाद ही कोई कार्रवाई हुआ । इस मसले पर उदारता के साथ गंभीरता के साथ सोचते रही अगला मसला दिल का दौरा पर है । कई कारणों से दिल का दौरा पड सकता है । लेकिन कोविद के बाद क्या इस की संख्या में वृद्धि हुई है इस पर ठोस बातचीत होनी चाहिए । ठोस जानकारी के साथ पूजा भारद्वाज की ये रिपोर्ट देखिए ये तस्वीरें पैंतीस साल के एक नौजवान मरीज की ॅ सर्जरी की है । हृदय रोग के युवा मरीजों की संख्या में तेजी से हो रहा है । जिम में या किसी कार्यक्रम में अचानक दिल का दौरा पडने से किसी की जान जाने की तस्वीरें देशभर से अब आम होने लगी है । ये ताजा तस्वीर गाजियाबाद की है जहां एक जिम ट्रेनर की दिल का दौरा पडने से मौत हो गई और ये दुखद तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई । करीब पाँच हजार डॉक्टरों वाली कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी इंडिया ने माना है कि बीस से चालीस साल की उम्र वाले मरीजों में हृदय संबंधी रोग और हार्ट अटैक जैसी समस्या एक साल में पच्चीस से तीस फीसदी बढी है । ऑनलाइन डॉक्टरी परामर्श उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा कंपनी प्रैक्टो ने अपने अध्ययन में पाया कि पिछले तीन महीनों में दिल के दौरे से संबंधित पूछताछ में दो सौ फीसदी की वृद्धि देखी गई है । बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और पुणे जैसे टीर वन शहरों से हाँ टाॅक को लेकर पचहत्तर फीसदी सवाल पूछे गए जबकि पच्चीस फीसदी पूछताछ वीर्टू शहरों से हुई छप्पन फीसदी राय तीस से उनतालीस वर्ष के आयु वर्ग के लोगों ने मांगी इनमें से पचहत्तर फीसदी पुरुष और पच्चीस फीसदी महिलाएं थी ।
ये बात सही है कि कम उम्र में भी हाँ ऍफ का प्रमाण बढ रहा है आज तक कम से कम ऑलमोस्ट ट्वेंटी थ्री ट्वेंटी फोर के लडके में मैंने हाँ ऍफ का हमने देखा है नहीं देखा है उसमें ऍफ का ऑपरेशन भी मैंने किया है उनकी जान बचाने के लिए तो हाँ आजकल बहुत बढ रहा है । ऑलमोस्ट चार बीस साल के नीचे ऑलमोस्ट पच्चीस तक का लोगों में हाँ ॅ आ रहा है । बढते हृदय रोग से आहत मरीज उनकी उम्र और वजहों पर फिलहाल कोई ताजा सरकारी अध्ययन तो नहीं है लेकिन स्वास्थ्य से जुडी अलग अलग संस्थाएं और कई बडे अस्पतालों के आंकडे बताते हैं कि युवा मरीजों की संख्या करीब पच्चीस फीसदी बढी है । फॅमिली है फॅस कई ऐसे पेशेंट हैं जो बीस इक्कीस बाईस साल के पेशेंट स्टाॅक करके आये हैं । बहुत सारे पेशेंट्स बच्चे भी हैं । कई लोगों का टाइम कहीं पर सीपी हुआ है । उन को लेकर के आये और सबसे कम उम्र का पेशेंट जो मेरे पास हाँ डाॅक् करके आया । उसकी उम्र थी उन्नीस साल । हैरान करने वाली बात है कि बहुत बार हम अक्सर ये देख रहे हैं की यहाँ पे जिनको कोई मेजर मेडिकल प्रोब्लम नहीं है वो हाँ ॅ शिकार बन जा रहे हैं । इसमें हमने ये पाया है कि फॅस मोकिंग ॅ सिटी के कारण उनके जो रिस्क प्रोफाइल है वो काफी बडे जा रही है कि पच्चीस प्रतिशत ॅ चालीस साल से कम उम्र वाले लोगों में ये देखा गया । इसे लेकर डॉक्टर लाइफ स्टाइल स्ट्रेस यानी तनाव, स्मोकिंग, मोटापा वगैरह को खास वजह के तौर पर देख रहे हैं । ये कारण पहले भी थे लेकिन अचानक बडी के पीछे क्या है इस पर सरकारी अध्ययन जरूरी है । मुंबई से पूजा भारद्वाज एनडीटीवी इंडिया शिक्षा महंगी होती जा रही है । प्राइवट और अंग्रेजी के नाम पर जो स्कूल खुल रहे हैं, कुछ स्कूलों को छोड दें तो बाकी के अंग्रेजी स्कूलों के साइनबोर्ड ही ज्यादा अंग्रेजी बोलते हैं । मगर इस के नाम पर जो फीस ली जा रही है वो शिक्षकों तक भी कम ही पहुँचती है । जब कस्बों का बच्चा गाँव का बच्चा स्कूलों के इस बाजार में पहुँचता है तो उसकी पहली चिंता पढाई नहीं फीस हो जाती है ।
फिर हम लोगों के मुँह मांग रहे थे, अभी जमा नहीं हुई थी । हमने वापस घर पे कहा था पापा आ जाते, पेपर नहीं दिया इन लोगों ने मुँह पूरा दिन पूरा दिन उन्नाव जिले के बांगरमऊ में एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा छह की छात्रा ग्यारह साल की अपूर्वा सिंह को गणित का इम्तिहान ना देने की अनुमति की वजह से ये विडियो वाइरल हो गया । मुँह पाल विद्या मंदिर लोगों का गुस्सा भी फूटा । हम लोगों के मुँह रहे थे, अभी जमा नहीं हुई थी । हमने वापस घर पे कहा तो पापा जाते । सोमवार को स्कूल में उन्हें सजा दी गई और इम्तिहान में बैठने से भी रोक दिया गया क्योंकि उनके पिता ने तीन सौ रुपए फीस नहीं जमा की थी । स्कूल से कुछ किलोमीटर दूर उनके पिता जो बीजेपी के नेता भी हैं, ने कहा की फीस ना देने की वजह आर्थिक नहीं बल्कि उनके दिमाग से यह बात निकल गई थी । वो जो कुछ भी हुआ उसके लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हैं । आठ बजे स्कूल पहुँच गए थे और वहाँ पे प्रेयर हुई थी । उसके बाद में बैठे थे उसके ऍम ऍम नाम बोले सब बच्चे ऍम कुछ ही दूरी पर । सबीना बेगम की बेटी भी इसी स्कूल में कक्षा सात की छात्रा है । उसको भी फीस कि वजह से इम्तिहान में बैठने की इजाजत नहीं दी गई । सबीना के पति मजदूरी करते हैं जबकि वो खुद किराने की छोटी सी दुकान चलाती है । करो ना की वजह से पिछले दो बसों में रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल हो रहा है । लेकिन सबीना का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढाने का कोई मतलब नहीं है । सरकारी स्कूल में पढाई तो सरकारी स्कूल भेज देखते तो आप सरकारी स्कूल में भी अब देखिए क्या होता है तो कौन बनाना चाहिए । अभी कोई किसी अच्छे घर का मतलब बच्चे सरकारी स्कूल में बनाया जाता है ।
गलती तो मुँह स्कूल से हुई है पर फॅस की भी गलती । पता है कि पंद्रह तारीख को फिर जमा हो जानी चाहिए तो कोशिश करनी चाहिए । जमा करने की बिल्कुल कोशिश करनी चाहिए कि मैं बच्चों को पंद्रह तारीख तक देना है तो ऍम करते ही हैं कुछ ना कुछ करके अपना बच्चा बच्चा के घर से । कुछ भी मतलब यू । पी । के ग्रामीण इलाकों में और शायद देश में बाकी जगहों में प्राइवेट स्कूल में शिक्षा होता है खास उन पेरेंट्स के लिए जो गरीब ग्राउंड से आते हैं और वाले केस में शायद ये बहुत अनफेयर है की जो स्कूल ऍम है उसमें एक बच्चे को सजा देनी ठीक समझे ना कि ये करना कि जो भी मॅन हो चाहे कोई और ऍसे सुलझाया जाए । एक बच्चे को टारगेट करना चाहे बहुत ही अनफेयर विवाद खडा होने के बाद उन्नाव प्रशासन ने कहा है कि स्कूल की यूपी बोर्ड की मान्यता रद्द करेंगे । स्कूल प्रिंसिपल सजा को गलत मानते हैं लेकिन फीस मांगने को सही ठहराते हैं । फीस ना देने को लेकर वो अभिभावकों पर भडकते भी हैं । ये तो गलती है बच्चे को फॅमिली था लेकिन मजबूरी हम विद्यालय वालों की ये है ये ऍम के समय फीस नहीं आ पाएगी तो दो दो तीन तीन चार चार महीने तक कुछ मुँह जमा करते हैं । विद्यालय में अध्यापकों को यह वेतन नहीं समय से मिलेगा तो वो नहीं पढाएंगे । इससे इससे भी बच्चों का ही नुकसान होगा । रहेंगे और गिर दिन से संपर्क बनाए रखेंगे । लेकिन उन्नाव की घटना अकेली नहीं है । एक सौ तीस किलोमीटर दूर हरदोई के बननी गाँव में बारह साल की अंशिका और उसके जैसे कम से कम चार और बच्चे प्राइवट से सरकारी स्कूल में शिफ्ट हुए हैं । जहाँ कम से कम कागजों पर तो फीस नहीं लगती है । किताब और यूनिफॉर्म मिलती है और मिडडेमील भी । पिछले दो बरसों में जो हालात बने हैं उन की वजह से जो छोटे और सीमांत परिवार के लोग हैं वो अपने बच्चों को निजी स्कूल में नहीं पढा पा रहे हैं । हमारे पापा गरीब है इसलिए हमारे पाउँगा नहीं कर पाई इसलिए हमारे पापा ने वहाँ से नाम कटाकर यहाँ नाम लिखाया है । इसीलिए हम वहाँ पढते नहीं है । अब यहाँ हम पढते हैं हमारे पापा चाहते हैं हम चाहते हैं अच्छे स्कूल में पढे जाकर पर हम पढ नहीं पाते इसलिए मेरे पापा के पास पैसा है इसलिए हम यहाँ पढते हैं । ऐसी कहानी कानपुर के लेकिन गाँव की है । छेदी लाल शर्मा कुछ साल पहले तक दिल्ली में सिक्युरिटी गाँव थे फिर वो अपने गाँव वापस आ गए । पिछले साल ऍसे उनके छोटे बेटे की मौत हो गई । उनका बडा बेटा एक सफाई कर्मचारी है और इतने पैसे नहीं कमा पाता कि पूरे घर का खर्चा चल पाए । ऐसे हालत में इनके ग्यारह और छह साल के पोतों को प्राइवट स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में दाखिल करना पडा है । अब हम तो ऊपर नहीं सकते इकहत्तर साल की उम्र हो गई मेरी अब हमारे बच्चे पढेंगे तो अपनी बात नहीं पढेंगे तो हम बहुत परेशान हो गए । हमको हो जाती जिसका अट्ठाईस साल बैठा हूँ । पहले जहाँ पढते थे वहाँ ज्यादा अच्छी पढाई होती थी । अब पहले वहाँ पर अच्छी होती थी ।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट स्कूल में अपने बच्चों को पढाना हर किसी के बस की बात नहीं है । लिहाजा सरकारी स्कूल का रास्ता बचता है लेकिन वो रास्ता सबको नहीं भाता । मोहम्मद आसिफ, गौरव शर्मा और राजेश गुप्ता के साथ आलोक पांडेय, एनडीटीवी इंडिया सोहित बता रहे हैं महाराष्ट्र से कि भारी बारिश के कारण वहाँ के किसानों की दिवाली उदास होने वाली है । उम्मीद है राज्य के किसानों की परवाह वहाँ की सरकार कर रही होगी । ऐसा होता तो किसान मीडिया की तरफ नहीं देखते । भीड के सोने वाली में प्याज की खेती करने वाले बालासाहेब जगाडे भारी बारिश के बाद गोदाम में बर्बाद प्याज की फसल में बचे हुए प्याज को अलग अलग कर रहे हैं । इस साल अच्छी आमदनी की उम्मीद थी । फसल भी अच्छी हुई लेकिन तीन दिन पहले हुई भारी बारिश ने सब कुछ चौपट कर दिया । चार एकड खेती पर करीब साढे तीन लाख रुपए का नुकसान उन्हें हुआ है । प्याज काट कर वो हम शेड में डाला । छेद में डाला तो दो दो तीन दिन पहले बहुत बारिश हो गई । बारिश हो गई । इतनी बारिश हो गई तो हमारा प्याज भी गया और प्याज थोडा फर्क बच्चा है तो हमने वो अच्छे अच्छे प्याज निकल के बाजू में डाला और प्याज बाजुरा डाला तो उसमें अच्छे अच्छे पहुंॅच हो गया और को हम भी आ गया और हम पूरे नुसकान हो गए सब महाराष्ट्र के कई इलाकों में पिछले एक हफ्ते में हुई भारी बारिश ने किसानों की चिंता बढा दी है । कई खेत पानी से भर गए और इसका असर फसल पर पडा है । भीड के किसान रामकृष्ण झगडे के एक एक्टर में लगे टमाटर और मक्का बारिश के चपेट में आ गए । इन्हें करीब एक लाख का नुकसान हुआ है । ज्यादा नुकसान हुआ है उसमें जो है वो उसकी टोमॅटो हो गए । उसके पेड नीचे गिर गए और उसमें सब नुकसान हुआ । केवल बीस ही नहीं नांदेड में भी भारी बारिश ने किसानों की मुसीबतें बढा दी है ।
पिछले चार महीनों में नांदेड में उनहत्तर किसानों ने जान दे दी है । हाल ही में हुई बारिश ने गोविंद जागडे के सोयाबीन की फसल बर्बाद कर दी है । जिससे उन्हें पचास हजार का नुकसान हुआ है और सरकार की ओर से कोई राहत नहीं मिल पाई है । दो पहले पूरा पानी भर गया है । शासन की कुछ भी मदद नहीं मिली । शिंदे साहब बोले की दिवाली दशहरे के पहले तो बोले दशहरा गया दिवाली आ गई । अपने चार दिन पर दिवाली आ गई । कुछ शासन मदद कर रही नहीं कुछ नहीं किसके पास जाना क्या जाना कुछ समझ रहा नहीं अभी हमारे भाई लोग ऐसे आत्महत्या कर रहे हैं । सरकार की ओर से मिले आंकडों के अनुसार इस साल भारी बारिश और बाढ से हुए नुकसान की वजह से इकतालीस लाख से ज्यादा किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राहत की अर्जी दी है । पिछले चार महीनों में सरकार की ओर से कुल चार हजार छह सौ इक्यानवे करोड रुपयों की मदद की गई है । मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से जल्द से जल्द किसानों के खेतों के कागजात पूरे कर उन्हें मदद दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं । बारिश के कारण हुए नुकसान की भरपाई करने का निर्णय सरकार ने पहले ही लिया है । पिछले दो तीन दिनों में बारिश के कारण हुए नुकसान पर पाँच नामों को तत्काल पूरा कर किसानों को भरपाई दिए जाने के निर्देश प्रशासन को दे दिया गया है । वैसे पंचनामें युद्ध दिवाली से ठीक पहले हुई भारी बारिश ने किसानों की परेशानियां बढा दी है । सरकार की ओर से जल्द से जल्द मदद दिए जाने की बात जरूर की जा रही है लेकिन ये मदद उन तक तक पहुँचेगी जब उनके खेतों की पंचनामें किए जाएंगे । उसकी जानकारी सरकार तक पहुंचाई जाएगी । यानी अब भी मदद के लिए किसानों को लंबे समय का इंतजार करना पडेगा ।
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