- भारत ने तीन परमाणु पनडुब्बियों INS अरिहंत, INS अरिघात, और INS अरिधमन को समुद्र में तैनात किया है
- 2027 तक भारत अपनी चौथी परमाणु पनडुब्बी INS अरिसूदन को भी नौसेना में शामिल करेगा
- पाकिस्तान के पास अभी तक कोई ऑपरेशनल परमाणु पनडुब्बी नहीं है और वह चीन पर निर्भर है
भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. हमारी सेनाओं और हथियारों की ताकत पूरी दुनिया मान रही है. भारत आसमान से लेकर समंदर तक दुश्मन को खत्म कर सकता है. वहीं पड़ोसी पाकिस्तान में हमारी नौसेना की बढ़ती ताकत से खौफ का माहौल पैदा हो गया है. हिंद महासागर में खामोशी से तैरते भारत के परमाणु बेड़े ने इस्लामाबाद के रणनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. यह कबूलनामा खुद पाकिस्तान के डिफेंस एक्सपर्ट का है.
ग्लोबल मैगजीन 'द डिप्लोमेट' में पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट उस्मान हैदर और अब्दुल मोइज खान ने एक आर्टिकल लिखा है, जो पाकिस्तान के डर पर मुहर लगा रहा है. इस रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि भारत के तेजी से मजबूत होते न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) बेड़े ने पाकिस्तान की डिफेंस रणनीति की जड़ें हिला दी हैं.
2027 तक भारत का 'अभेद्य कवच'
पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2016 में INS अरिहंत के शामिल होने के बाद से भारत का समुद्री परमाणु प्रोग्राम अब 'टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर' के स्तर से बहुत आगे निकल चुका है. भारत ने अपनी तीन परमाणु पनडुब्बियों को समुद्र में तैनात किया है. भारत के पास फिलहाल INS अरिहंत, INS अरिघात और INS अरिधमन जैसी घातक SSBN तैनात हैं. वहीं अगले साल यानी 2027 तक भारत अपनी चौथी पनडुब्बी INS अरिसूदन को भी बेड़े में शामिल कर लेगा. इसके बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो कंटीन्यूअस एट-सी डेटरेंस (CASD) लागू करने में सक्षम है.
इसका सीधा मतलब यह है कि साल के 365 दिन, 24 घंटे भारत की कम से कम एक परमाणु-रोधी पनडुब्बी समुद्र की गहराइयों में पूरी तरह से लैस होकर गश्त पर रहेगी. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने माना है कि भारत ने अपनी इन पनडुब्बियों पर सीमित संख्या में परमाणु हथियार तैनात कर भी दिए हैं.
K-4 मिसाइल का खौफ
पाकिस्तान को सबसे बड़ा डर भारत की 'सेकंड-स्ट्राइक एबिलिटी' यानी जवाबी हमला करने की क्षमता से है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर पाकिस्तान जमीन या हवा से भारत पर किसी पहले हमले की दुस्साहस भरी सोच भी रखता है, तो समंदर से भारतीय पनडुब्बियां पाकिस्तान का वजूद मिटाने के लिए काफी हैं. 7000 टन वजनी नई अरिहंत-क्लास पनडुब्बियां K-4 सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) से लैस हैं. इनकी रेंज 3500 किलोमीटर तक है. इतनी रेंज की वजह से भारतीय नौसेना बिना दुश्मन की रडार में आए, सुरक्षित दूरी से पूरे पाकिस्तान के किसी भी कोने को आसानी से ध्वस्त कर सकती है.
चीन की 'खैरात' के भरोसे पाकिस्तान
भारत जहां समंदर में चार-चार परमाणु पनडुब्बियों को तैनात कर रहा है, वहीं पाकिस्तान के पास ऐसी कोई ताकत नहीं है. पाकिस्तान के पास कोई ऑपरेशनल SSBN नहीं है और उसने अभी तक ऐसा कोई जहाज बनाना शुरू भी नहीं किया है. इस्लामाबाद जमीन से मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और हवा से गिराए जाने वाले हथियारों पर ही निर्भर है. समंदर के नीचे परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) के मामले में पाकिस्तान भारत के आसपास भी नहीं ठहरता. इस स्ट्रैटेजिक गैप को भरने के लिए पाकिस्तान के पास कोई रास्ता भी नहीं है. इसके लिए पाकिस्तान पूरी तरह से चीन द्वारा दी जाने वाली पनडुब्बियों की खैरात और टेक्नोलॉजी सहायता पर निर्भर हो गया है.
पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के 'मिशन सुदर्शन चक्र' और विकसित हो रहे S5-क्लास के विशाल SSBN बेड़े के सामने टिकने के लिए पाकिस्तान को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ रही है, लेकिन आर्थिक बदहाली के दौर में चीन का पिछलग्गू बनने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं बचा है.
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