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क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स को मिलेगी 'स्वदेशी' उड़ान, भारत को मिला अपना टर्बोजेट इंजन, सिर्फ 24 महीने में बना

भारत को 350 किलोग्राम थ्रस्ट क्लास का पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन मिल गया है. इसे DRDO ने डिजाइन किया.

क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स को मिलेगी 'स्वदेशी' उड़ान, भारत को मिला अपना टर्बोजेट इंजन, सिर्फ 24 महीने में बना
DRDO को मिला पहला स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन
PIB

भारत का रक्षा क्षेत्र में लगातार कद बढ़ता जा रहा है. भारतीय सेना के पास कई खतरनाक और ताकतवर मिसाइलें, टैंक और अन्य हथियार हैं. इन हथियारों के दम पर भारत दुश्मन पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है. भारत अपने फाइटर जेट के स्वदेशी इंजन कावेरी पर भी काम कर रहा है. इस सबके बीच एक डिफेंस सेक्टर से एक और शानदार खबर सामने आई है. भारत को 350 kg थ्रस्ट क्लास का पहला स्वदेशी 'एक्सपेंडेबल टर्बो जेट इंजन' मिल गया है. यह इंजन भारत के क्रूज मिसाइलों और ड्रोन्स को स्वदेशी ताकत देगा. आज हम इसी इंजन के बारे में बता रहे हैं.

प्राइवेट कंपनी ने तैयार किया है इंजन

यह इंजन DRDO की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किया हया है. इसे एक प्राइवेट कंपनी आजाद इंजीनियरिंग ने डेवलेप किया है. 22 जुलाई 2026 को आजाद इंजीनियरिंग ने सफलतापूर्वक इंजन तैयार करके GTRE को सौंपा. यह भारत के एयरोस्पेस और डिफेंस इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह डिलीवरी भारत के वैज्ञानिक और औद्योगिक समुदायों के बीच सटीक इंजीनियरिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और करीबी साझेदारी के सालों की मेहनत का नतीजा है.

दुनिया के कुछ ही देशों के पास जेट इंजन टेक्नोलॉजी है. इसे दुनिया के सबसे एडवांस्ड इंजीनियरिंग क्षेत्रों में से एक माना जाता है, जिसके लिए बहुत ज्यादा सटीकता, एडवांस्ड मेटलर्जी और मैन्युफैक्चरिंग के कड़े स्टैंडर्ड्स की जरूरत होती है. DRDO के डिजाइन पर आधारित इतने जटिल सिस्टम की डिलीवरी भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री की बढ़ती तकनीकी क्षमताओं को दिखाती है. 

दो साल में इंजन तैयार कर बनाया रिकॉर्ड

जेट इंजन का निर्माण रक्षा इंजीनियरिंग के सबसे जटिल और कठिन कार्यों में से एक माना जाता है. इस इंजन के सफल निर्माण के साथ ही भारत अब उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास खुद की टर्बोजेट तकनीक है. आम तौर पर सालों में पूरी होने वाली इस टेक्नोलॉजी और हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग को केवल 24 महीने के रिकॉर्ड समय में धरातल पर उतारा गया है.

किन हथियारों को मिलेगी ताकत?

  • क्रूज मिसाइलें: नौसेना की एंटी-शिप मिसाइलों और एयर टू सरफेस पर मार करने वाली मिसाइलों को गति प्रदान करेगा.
  • मानवरहित हवाई वाहन (UAVs) और ड्रोन: भारत के एडवांस स्वदेशी टोही और आत्मघाती ड्रोन्स को ताकत देगा.
  • एंटी-ड्रोन सिस्टम: मध्यम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम को भी मजबूत करेगा.

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