ईरान-अमेरिका युद्ध में पूरी दुनिया ने ड्रोन्स की ताकत देखी. ईरान के 'शहीद' ड्रोन ने अमेरिका के मंहगे-महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया. इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध में भी ड्रोन्स का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हुआ. ऑपरेशन सिंदूर के समय भी ड्रोन्स का भारत और पाकिस्तान दोनों ओर से ही इस्तेमाल किया गया. यह बताता है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन्स का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. इस बीच भारत ने भी बड़ी तैयारी कर ली है. भारत की एक प्राइवेट कंपनी ने ऐसा घातक और स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम तैयार किया है, जिसकी वजह से दुश्मन के ड्रोन्स भारतीय सीमा में घुसने से पहले हजार बार सोचेंगे. इस एंटी ड्रोन सिस्टम का नाम है 'भार्गवास्त्र'. आज हम इसी एंटी ड्रोन की खासियत बता रहे हैं.
क्या है 'भार्गवास्त्र' और इसकी खासियत?
'भार्गवास्त्र' पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित एक मल्टी-लेयर्ड काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे भारतीय सेना की गाड़ियों पर आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है. यानी इसे आसानी से किसी भी संवेदनशील सीमा पर तैनात किया जा सकता है. यह एंटी ड्रोन सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और ऑटोनॉमस ड्रोन के पूरे झुंड को एक साथ काउंटर करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें स्वदेशी अनगाइडेड रॉकेट और माइक्रो-मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाता है, जो दुश्मन के ड्रोन्स को पलक झपकते ही चकनाचूर कर देता है.
इतने एडवांस ड्रोन सिस्टम को भारत की एक प्राइवेट कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने तैयार किया है. SDAL ने 23-24 जुलाई को नागपुर में अपनी फैसिलिटी पर भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना सहित तीनों रक्षा सेवाओं के सामने 'भार्गवास्त्र' का प्रदर्शन किया.
#WATCH | Solar Defence and Aerospace Ltd. (SDAL) demonstrated "Bhargavastra", an indigenous, vehicle-mounted, multi-layered Counter-Swarm Drone System, to the three defence services including the Indian Army, Indian Navy and Indian Air Force at its Nagpur facility on July 23–24.… pic.twitter.com/2QUkLuPHfJ
— ANI (@ANI) July 24, 2026
10 किलोमीटर दूर से ही सूंघ लेगा दुश्मन की चाल
यह एंटी ड्रोन सिस्टम एडवांस्ड कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस (C4I) आर्किटेक्चर से लैस है, जिसमें रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर और पैसिव RF डिटेक्टर शामिल हैं. SDAL के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल ने बताया कि इस सिस्टम का रडार 10 किलोमीटर तक के हवाई खतरों का आसानी से पता लगा सकता है. इसके अलावा इसके इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (EOTS) की रेंज 6 किलोमीटर है, जो भारतीय सेना की मौजूदा 2.5 किलोमीटर की ऑपरेशनल जरूरत से काफी ज्यादा है. यह टेक्नोलॉजी रियल-टाइम में आसमान की स्थिति भांपकर टारगेट को चकनाचूर कर सकती है.
कीमत भी काफी कम
इस एंटी ड्रोन सिस्टम की एक खासियत इसकी कम कीमत है. जहां दुनियाभर के ज्यादातर एयर डिफेंस सिस्टम काफी महंगे होते हैं, वहीं 'भार्गवास्त्र' इसके ठीक उलट है. यह दुश्मन के मानव रहित विमानों (UAVs) को हवा में ही सीधे नष्ट करने का एक बेहद किफायती समाधान है.
SDAL के चेयरमैन के मुताबिक, 'भार्गवास्त्र' बेहद एडवांस एंटी डिफेंस सिस्टम है और इसके इंटरनल ट्रायल अगले 2-3 महीनों में पूरे हो जाएंगे. भारतीय सेना और नौसेना के अधिकारी भी इसका निरीक्षण कर चुके हैं. बालासोर और पोखरण में इसकी माइक्रो-मिसाइल का पहले ही सफल टेस्ट हो चुका है, जबकि नागपुर में हाल ही में इसके रडार, सेंसर्स और C4I सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया गया.
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