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Explainer: क्यों अखिलेश यादव पर हमला बोलने में ओपी राजभर और संजय निषाद आगे, भाजपा की क्या रणनीति

दोनों ही नेता ओबीसी वर्ग से आते हैं. ऐसे में सपा ने कुछ आक्रामकता दिखाई तो ओपी राजभर और संजय निषाद यह आरोप लगा सकते हैं कि यादव वर्चस्व ही अखिलेश यादव की प्राथमिकता है.

Explainer: क्यों अखिलेश यादव पर हमला बोलने में ओपी राजभर और संजय निषाद आगे, भाजपा की क्या रणनीति
  • ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद लगातार अखिलेश यादव पर हमले कर भाजपा की रणनीति को सुदृढ़ कर रहे हैं
  • भाजपा ने ओबीसी नेताओं को आगे करके सपा पर यादव वर्चस्व का आरोप लगवाने की रणनीति अपनाई है
  • भाजपा का उद्देश्य गैर-यादव ओबीसी समुदाय को अपने साथ जोड़कर चुनावी समीकरण मजबूत करना है
लखनऊ:

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर लगभग हर दिन ही अखिलेश यादव पर पोस्ट कर रहे हैं. वह कभी अखिलेश यादव की दिनचर्या को लेकर तंज कसते हैं तो कभी उन पर यादवों को ही बढ़ावा देने के आरोप लगाते हैं. इसके अलावा निषाद पार्टी के नेता और प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद भी अब सपा नेता को टारगेट कर रहे हैं. ऐसे में स्वाभाविक ही सवाल उठता है कि एनडीए की मुख्य पार्टी भाजपा से भी ज्यादा मुखर आखिर ओपी राजभर और संजय निषाद जैसे नेता क्यों हैं? क्या यह एक संयोग मात्र है, या फिर इसके पीछे कोई प्रयोग है. 

यूपी की राजनीति को समझने वाले मानते हैं कि इसकी वजह भाजपा और एनडीए की रणनीति है. इसके जरिए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश है तो वहीं एक संदेश भी इसके माध्यम से दिया जा रहा है. समीकरण यह कि संजय निषाद और ओपी राजभर दोनों ही ओबीसी समाज से आते हैं. दोनों की बिरादरी का एक वोटबैंक है और भाजपा ने उन्हें अपने पाले में लेकर लगातार 4 चुनावों में अपनी स्थिति को मजबूत किया है. उसके लिए 2024 ही चौंकाने वाला रहा है, लेकिन एक बार फिर साथियों के भरोसे भाजपा ऑल इज वेल करने की कोशिश करने में है.

क्यों राजभर और निषाद को ही हमले के लिए किया आगे

दरअसल एनडीए की ओर से इन नेताओं को आगे कर अखिलेश यादव पर हमले बोले जा रहे हैं ताकि सपा जवाब में आक्रामक न हो सके. ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों ही नेता ओबीसी वर्ग से हैं. यदि सपा ने कुछ आक्रामकता दिखाई तो ओपी राजभर और संजय निषाद यह आरोप लगा सकते हैं कि यादव वर्चस्व ही अखिलेश यादव की प्राथमिकता है. यूं भी ओपी राजभर लगातार यादव समाज को ही आगे रखने का आरोप अखिलेश यादव पर लगा रहे हैं. इसके अलावा संजय निषाद भी ओबीसी हैं. वह अपनी बेल्ट में मजबूत नेता हैं और भाजपा की जरूरत भी हैं.

पूजा पाल भी मैदान में उतरीं, तीन ओबीसी नेता अखिलेश के खिलाफ मुखर

अब बात समीकरणों की करें तो भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि गैर-यादव ओबीसी उसके साथ मजबूती से है. इसी रणनीति के तहत पूजा पाल भी अखिलेश यादव के खिलाफ मुखर हैं. आज ही उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखकर खुद को पाल समाज की बेटी बताया और कहा कि भाजपा में कोई भी पीएम के पद तक पहुंच सकता है. इस तरह भाजपा ने अखिलेश पर हमले के लिए तीन ओबीसी नेताओं को ही आगे किया है. वहीं केशव प्रसाद मौर्य तो लगातार हमले करते ही रहे हैं. यही नहीं योगी आदित्यनाथ की कोशिश यह भी है कि अखिलेश यादव को दूसरी पंक्ति के नेताओं से बहस में उलझा दिया जाए.

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