उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज है. कयास लग रहे हैं कि चुनाव थोड़ा पहले भी हो सकते हैं. यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए भी सबसे ज्यादा तैयार सीएम योगी आदित्यनाथ की लीडरशिप में भाजपा ही नजर आ रही है. योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर में दौरे बढ़ा दिए हैं. शुक्रवार को तो वह एक ही दिन के अंदर तीन जिलों में नजर आए. वह शामली, बिजनौर और फिर गाजियाबाद में पहुंचे. उन्होंने तीनों ही जिलों में सैकड़ों करोड़ की परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास किए तो वहीं रैलियां भी संबोधित कीं. इन रैलियों में योगी आदित्यनाथ अपने ही अंदाज में चुनाव की टोन भी सेट करते नजर आए.
उन्होंने बिजनौर में जोगेंद्र नाथ मंडल का नाम लेते हुए कहा कि आज भी कुछ ऐसे लोग ऐक्टिव हो गए हैं. अंबेडकर से उनकी तुलना की और कहा कि आज भी कुछ लोग जोगेंद्र नाथ मंडल के रास्ते पर हैं. दलित से जाट, ब्राह्मण और ठाकुर को लड़ाने वाली बात कर उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग को साधने की कोशिश की. बिना नाम लिए ही उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर भी तंज कस दिया. इसके अलावा बिजनौर में अखिलेश यादव के कभी न जाने को लेकर भी तंज कसा और कहा कि वह महात्मा विदुर की धरती को अपशकुन मानते थे. इसके अलावा जिन्ना और गन्ना की तुकबंदी करते हुए किसान कौम के साथ ही हिंदुत्व की भी बात कर दी.
हिंदुत्व के अलावा सख्त प्रशासक की छवि भी करना चाहते हैं मजबूत
इससे पहले 9 अक्तूबर को भी योगी आदित्यनाथ ने बांदा और चित्रकूट का दौरा किया था. वहीं पूर्वांचल, अवध के जिलों में भी वह दौरे कर रहे हैं. साफ है कि योगी आदित्यनाथ पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुके हैं. राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद भी वह रक्षात्मक होने की बजाय और आक्रामक दिख रहे हैं. माना जा रहा है कि वह अपनी उस छवि को और मजबूत करना चाहते हैं, जो हिंदुत्व से इतर एक सख्त प्रशासक के रूप में भी बनी है. ऐसे में उनकी आक्रामकता उस इमेज को मजबूत करेगी. किसी भी तरह के विवाद से निकलने का वह यही रास्ता देख रहे हैं.
नितिन नवीन सबसे मिलकर गए और योगी ने बढ़ा दी चुनावी तैयारी
योगी आदित्यनाथ की यह तैयारी और ताबड़तोड़ दौरे इसलिए भी अहम हैं क्योंकि अब तक कांग्रेस और सपा सीटों के खींचतान में ही उलझे हैं. एक तरफ नितिन नवीन लखनऊ आकर पार्टी और एनडीए के लोगों से भी मिल गए. सभी दलों को साथ लेकर काम करने की बात कही. वहीं विपक्ष में अब भी गठजोड़ पर ही खींचतान है. अपनी शर्तें मनवाने की जिद है. ऐसे में योगी आदित्यनाथ की लीडरशिप में भाजपा तैयारी के मामले में आगे बढ़ती दिख रही है.
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