- संघ सह सरकार्यवाह मुकुंद सीआर ने युवाओं में संस्कृति जागरूकता बढ़ाने की रणनीति बताई
- संघ के 21,000 युवा स्वयंसेवक 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन में सक्रिय हैं
- मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में हिन्दू समुदाय के हितों और वैश्विक एकात्मता के संदेश को बढ़ावा देंगे
विशाखापत्तनम में चल रही अखिल भारतीय समन्वय बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए आरएसएस के संघ सह सरकार्यवाह मुकुंद सीआर ने कई सवालों के जवाब दिए हैं. इस दौरान उन्होंने मोहन भागवत के विदेश दौरों और जेन जी को जोड़ने वाले प्लान पर भी खुलकर बात की. साथ ही पत्रकारों की तरफ से पूछे गए सवालों का कुछ इस तरह जवाब दिया.
प्रश्न: युवा पीढ़ी में संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संघ क्या करेगा?
मुकुंद सीआर: संघ का कार्य मुख्य रूप से युवाओं के बीच व्यापक रूप से चल रहा है. इस वर्ष लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में भाग लिया और दैनिक शाखाओं की उपस्थिति में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं.
युवाओं में संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों का निर्माण केवल भाषणों या पोस्टरों से नहीं हो सकता. उनके साथ निरंतर जुड़ना, उनकी भावनाओं को समझना, संवाद करना तथा भारत की महानता और सांस्कृतिक विरासत को अनुभव के स्तर पर उनके सामने रखना आवश्यक है.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच सहित अनेक संगठनों के माध्यम से युवकों और युवतियों के बीच कार्य किया जा रहा है. आज की युवा पीढ़ी की क्षमता और सकारात्मक प्रतिसाद को देखते हुए हमें विश्वास है कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में सुरक्षित है. इसके साथ ही धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों को भी युवाओं में सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया गया.
प्रश्न: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्रा का उद्देश्य क्या है?
मुकुंद सीआर: यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर व्यापक वैश्विक संपर्क का हिस्सा है. इसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं.
- पहला—भारत, हिंदू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में विश्व में व्याप्त भ्रांतियों और दुष्प्रचार के बीच तथ्यपरक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना.
- दूसरा—भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा दिए गए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्' और वैश्विक एकात्मता के संदेश को विश्व के विभिन्न समाजों तक पहुंचाना.
- तीसरा—विश्व के विभिन्न देशों में रहने वाले हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों एवं अधिकारों के विषय में वहां के मुख्यधारा समाज से संवाद बढ़ाना.
इस क्रम में डॉ. मोहन भागवत जी न्यूयॉर्क में Universal Oneness कार्यक्रम तथा टोरंटो और लंदन में सामुदायिक नेतृत्व के कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे.
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