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This Article is From May 23, 2025

CBI के घेरे में क्यों आ गए पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक? क्या है भ्रष्टाचार से जुड़ा वो मामला

भ्रष्टाचार के आरोपों पर सत्यपाल मलिक (Satyapal Malik) का दावा है कि उनके पास चार से पांच कुर्ते और पायजामा के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर उनको डराने की कोशिश हो रही है. वह किसान के बेटे हैं, न डरेंगे और न झुकेंगे. 

CBI के घेरे में क्यों आ गए पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक? क्या है भ्रष्टाचार से जुड़ा वो मामला
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल.
नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक सीबीआई जांच के घेरे में हैं. इस बीच उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है. गंभीर हालत में वह अस्पताल में भर्ती हैं. सत्यपाल मलिक के खिलाफ जम्मू कश्मीर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है. सीबीआई ने तीन साल की जांच के बाद मलिक और उनके दो सहयोगियों वीरेंद्र राणा और कंवर सिंह राणा को आरोपी बनाते हुए विशेष अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल (Satyapal Malik Corruption Case) किया है. मामला आखिर है क्या जानिए.

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CBI के घेरे में क्यों पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक?

सत्यपाल मलिक के जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल रहने के दौरान सिविल कार्यों के ठेके में कथित भ्रष्टाचार उजागर हुआ था. साल 2022 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. उस दौरान CBI ने कहा था कि यह मामला 2019 में ‘किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर' (एचईपी) परियोजना के सिविल कार्यों के लगभग 2,200 करोड़ रुपये के ठेके एक निजी कंपनी को देने में कथित गड़बड़ी से संबंधित है. तब सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे. इसी वजह से वह CBI जांच के घेरे में हैं.

किरू हाइड्रो प्रोजेक्ट मामला क्या है?

किरू जलविद्युत परियोजना जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित है. जांच के मुताबिक, इस परियोजना में सिविल वर्क्स के लिए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी मिली है. बैठक में फैसला लिया गया था कि ईं-टेंडरिंग और रिवर्स ऑक्सर के जरिए टेंडर प्रक्रिया फिर से होगी. लेकिन बिना इसे लागू किए टेंडर डायरेक्ट पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को दे दिया गया. किरू हइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 2,200 करोड़ रुपये के सिविल कार्यों के ठेके में कथित भ्रष्टाचार उजागर हुआ था. 

सत्यपाल मलिक समेत 7 के खिलाफ चार्जशीट

इस मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और सात अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है. आरोपपत्र में मलिक के अलावा ‘चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' (सीवीपीपीपीएल) के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एमएस बाबू, कंपनी के निदेशकों अरुण कुमार मिश्रा व एम.के. मित्तल, निर्माण कंपनी ‘पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड' के प्रबंध निदेशक रूपेन पटेल और कंवलजीत सिंह दुग्गल का नाम भी शामिल है. 

जम्मू कश्मीर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल

सीबीई ने  तीन साल की जांच के बाद पूर्व राज्यपाल मलिक और उनके दो सहयोगियों वीरेंद्र राणा और कंवर सिंह राणा को आरोपी बनाते हुए जम्मू-कश्मीर की विशेष अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया है. हालांकि मलिक का दावा है कि उनके पास चार से पांच कुर्ते और पायजामा के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर उनको डराने की कोशिश हो रही है. वह किसान के बेटे हैं, न डरेंगे और न झुकेंगे. 

सिविल कार्यों में धांधली की चल रही जांच 

किरू जलविद्युत परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच 2022 से चल रही थी. उसी दौरान FIR दर्ज की गई थी. सीबीआई ने पिछले साल फरवरी में भ्रष्टाचार के सिलसिले में सत्यपाल मलिक और अन्य लोगों के परिसरों पर छापेमारी भी की थी.
2022 में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद CBI ने कहा था कि यह मामला 2019 में ‘किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर' (एचईपी) परियोजना के सिविल कार्यों के लगभग 2,200 करोड़ रुपये के ठेके एक निजी कंपनी को देने में कथित गड़बड़ी से संबंधित है.  बता दें कि मलिक 23 अगस्त, 2018 से 30 अक्टूबर, 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे थे. इसी दौरान ये भ्रष्टाचार उजागर हुआ.

क्या है सत्यपाल मलिक का दावा?

 सत्यपाल मलिक ने दावा किया था कि उन्हें परियोजना से संबंधित एक फाइल समेत दो फाइल को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी. पिछले साल CBI की छापेमारी के बाद उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार कर दिया था. मलिक ने कहा था कि जिन लोगों के बारे में उन्होंने शिकायत की थी और जो भ्रष्टाचार में शामिल थे, उनकी जांच करने के बजाय सीबीआई ने उनके आवास पर छापा मारा. 

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