उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना एक बार फिर से बंटवारे के मुहाने पर खड़ी है. उसके 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ जाने की बात कही जा रही है, लेकिन अब 'ऑपरेशन टाइगर' में ब्रेक लगने के कयास भी शुरू हो गए हैं. 20 जून को आने वाले एक मर्डर केस के फैसले पर सभी की नजर थी. यह फैसला उद्धव गुट के बागी सांसद ओमराजे निंबालकर के लिए अहम था. कहा जा रहा था कि यदि फैसला उनके पक्ष में आया तो वह उद्धव का साथ छोड़ सरकार के साथ जा सकते हैं। हालांकि फैसला उलट आया है. उनके पिता पवन राजे निंबालकर के कत्ल के आरोपी सभी 8 लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है. ऐसी स्थिति में अब कयास लग रहे है कि आखिर निंबालकर किधर जाएंगे?
इस बीच ओमराजे निंबालकर धाराशिव पहुंच गए हैं. इस फैसले के बाद पहली बार वह अपने गृह जनपद पहुंचे हैं. यहां वह अपने कुछ समर्थकों के साथ एक मीटिंग करने वाले हैं. कहा जा रहा है कि इस मीटिंग के बाद वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई फैसला ले सकते हैं. ऑपरेशन टाइगर में निंबालकर को एक अहम कड़ी माना जा रहा था. ऐसे में अब जबकि फैसला उनके खिलाफ आया है और हाई कोर्ट जाने की तैयारी वह कर रहे हैं तो फिर किस गुट के साथ वह जाएंगे, यह जानने में सभी की दिलचस्पी है. कयास इसलिए भी तेज हैं क्योंकि उद्धव सेना के नेता कैलास पाटिल और वरुण देसाई ने भी सांसद निंबालकर से मुलाकात की है.
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इस मुलाकात के संबंध में पूछा गया तो उद्धव सेना के नेताओं ने कहा कि यह बैठक अगालत के फैसले को लेकर थी. इस दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं की गई है. हालांकि अब भी कयासों का दौर जारी है और देखना होगा कि मीटिंग के बाद ओमराजे निंबालकर क्या फैसला लेंगे. बता दें कि उनके पिता पवनराजे की 2006 में हत्या कर दी गई थी. वह सांसद रहे थे और उनके कत्ल में एक आरोपी मौजूदा डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के भाई भी हैं. ऐसे में यह मामला हाई प्रोफाइल है और राजनीतिक महत्व का है. ऐसे में किसी भी पक्ष के लिए फैसला महत्वपूर्ण है तो वहीं उसकी राजनीतिक अहमियत भी काफी ज्यादा है.
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