मौलाना सैयद अरशद मदनी भारत के प्रमुख इस्लामी धर्मगुरुओं में गिने जाते हैं. वह दारुल उलूम देवबंद से जुड़े रहे हैं और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक धड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वे हमेशा अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं, अब उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक और बयान दिया है.
जिसमें उन्होंने कहा है कि आज जो मस्जिदें शहीद की जा रही हैं, इंशाअल्लाह वे एक दिन फिर आबाद होंगी और वहां दोबारा अल्लाहु अकबर की सदाएं बुलंद होंगी. जो आज सत्ता में हैं, वे कल नहीं रहेंगे. सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत न मिटा सकी है और न भविष्य में मिटा सकेगी.
पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, लेकिन मौजूदा सरकार मुसलमानों के साथ इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है. सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के अंजाम से सबक लेना चाहिए. इस्लाम को मिटाने का सपना देखने वाले खुद इतिहास का हिस्सा बन गए, लेकिन इस्लाम आज भी ज़िंदा है.
मदारिसे इस्लामिया हमारे धर्म और ईमान के रक्षक तथा धार्मिक पहचान के अमानतदार हैं, लेकिन नई पीढ़ी के ईमान, आस्था और नैतिकता की रक्षा केवल मदरसों की जिम्मेदारी नहीं है, माता-पिता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. मुसलमान मौजूदा परिस्थितियों से निराश न हों, बल्कि सब्र, एकता, हिकमत और दृढ़ता के साथ अपने धर्म और ईमान पर मजबूती से कायम रहें.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद क्या है?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद देश के सबसे पुराने मुस्लिम संगठनों में से एक है, जिसकी स्थापना 1919 में हुई थी. यह संगठन धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहता है. 2008 में संगठन दो गुटों में बंट गया था, जिनमें से एक का नेतृत्व अरशद मदनी करते हैं.
अरशद मदनी अक्सर चर्चा में क्यों रहते हैं?
1. "ओम और अल्लाह एक हैं" वाला बयान
2023 में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान अरशद मदनी ने कहा था कि "मनु जिस ईश्वर की पूजा करते थे, वही अल्लाह हैं" और "ओम, ईश्वर, खुदा और अल्लाह एक ही सत्ता के अलग-अलग नाम हैं." इस बयान पर जैन संतों समेत कई धार्मिक नेताओं ने आपत्ति जताई थी और कार्यक्रम में विवाद खड़ा हो गया था.
2. मुसलमानों के साथ भेदभाव के आरोप
मदनी समय-समय पर यह दावा करते रहे हैं कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है और उन्हें संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा. उनके ऐसे बयानों पर राजनीतिक बहस भी होती रही है.
3. आरएसएस और हिंदुत्व पर टिप्पणियां
वे कई बार आरएसएस और हिंदुत्व की राजनीति की आलोचना करते रहे हैं. हाल के वर्षों में उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द, नफरत की राजनीति और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कई बयान दिए हैं.
4. "जिहाद" पर बयान
2026 में उन्होंने कहा कि अंग्रेजी गुलामी के खिलाफ आजादी की लड़ाई के दौरान "जिहाद" का संदेश दिया गया था और इसे गुलामी के खिलाफ संघर्ष के रूप में पेश किया. इस बयान पर राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस छिड़ गई थी. कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी उनके बयान का विरोध किया था.
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