- यूपी में भाजपा 2014 के बाद से नंबर वन पार्टी बनी हुई है, लेकिन सपा ने गैर-यादव ओबीसी वोटों पर ध्यान दिया है
- रामबहादुर पासी और दारा सिंह जैसे नेता सपा में शामिल होकर गैर-यादव ओबीसी वोटर जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं
- रामबहादुर पासी पासी समाज से हैं जो पहले बसपा और बाद में भाजपा के साथ था, अब सपा में शामिल हुए हैं
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2014 के बाद से लगातार भाजपा नंबर वन पार्टी बनी हुई है. 2024 के आम चुनाव में उसे भले ही झटका लगा था, लेकिन अब भी वह मान कर चल रही है कि विधानसभा चुनाव में उसे फायदा मिलेगा. इस बीच अखिलेश यादव ने भाजपा के उस गैर-यादव ओबीसी वोट वाले समीकरण में सेंध लगाने की कोशिश की है तो वहीं बसपा के वोटरों को भी जोड़ने का प्लान है. सोमवार को लखनऊ में ऐसा ही नजारा दिखा, जब पूर्व आईएएस अधिकारी रामबहादुर पासी सपा में शामिल हो गए. इसके अलावा दारा सिंह प्रजापति ने भी सदस्यता ले ली.
रामबहादुर पासी को कभी मायावती का करीबी नेता माना जाता था, फिर वह भाजपा में चले गए थे और अब सपा में आए हैं. इसके अलावा दारा सिंह प्रजापति भी आए गए हैं. दरअसल दोनों ही नेता ऐसे वर्गों से आते हैं, जो अब तक सपा के कोर वोटर नहीं माने जाते. रामबहादुर उस पासी समाज से आते हैं, जो कभी बसपा के साथ था. लेकिन बीते कुछ चुनावों में भाजपा की गैर-जाटव दलितों को जोड़ने की रणनीति से प्रभावित होकर वह भगवा दल का समर्थन कर रहा था. यूपी के अवध इलाके में पासी समाज की अच्छी आबादी है. ऐसे में रामबहादुर पासी को जोड़ना बड़ा संकेत है. भाजपा भी इस जाति पर काफी फोकस कर रही है और हाल ही में प्रियंका रावत को राज्यसभा भेजा गया है.
अब बात करें दारा सिंह प्रजापित की तो वह मेरठ के नेता हैं और कुम्हार समाज से आते हैं. इस समाज का भी बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ रहा है. अब पीडीए वाले नैरेटिव के साथ गया तो सपा को फायदा होगा. यही नहीं राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सपा अब भाजपा के पाले में मौजूद ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद फैक्टर की काट करने में भी जुटी है. दरअसल ओपी राजभर के जरिए भाजपा राजभर वोटों का बड़ा हिस्सा पा सकती है. इसके अलावा संजय निषाद के माध्यम से मल्लाहों के वोट भाजपा को मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा भाजपा खुद भी गैर-यादव ओबीसी वोटरों पर काफी फोकस कर रही है.
यादवों से इतर ओबीसी वर्ग को जोड़ रही सपा, पालों पर भी फोकस
ऐसी स्थिति में सपा ने भी इस चुनाव में यादव समाज से इतर अन्य ओबीसी वर्गों को साधने के प्रयास तेज किए हैं. रामबहादुर पासी और दारा सिंह प्रजापति की एंट्री को इससे ही जोड़कर देखा जा रहा है. यही नहीं सोमवार को बलवीर पाल, अनिल कुमार पाल, मानिक चंद दिवाकर, जनक सिंह लोधी जैसे नेता भी पहुंचे. सपा का फोकस पाल समाज पर भी है. फिलहाल उसके प्रदेश अध्यक्ष भी इसी समाज से आने वाले श्याम लाल पाल हैं. इस तरह अखिलेश ने दिखाने का प्रयास किया कि यादवों के अलावा अन्य ओबीसी वर्ग भी उनके साथ है. इससे भी आगे बढ़ते हुए अखिलेश यादव लगातार गैर-जाटव दलितों को भी लुभा रहे हैं. बीते कुछ समय से वह नीले गमछे में भी नजर आए हैं. इस तरह मायावती की कमजोर होती सियासी ताकत को वह अपने पक्ष में मोड़ लेना चाहते हैं.
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