- कांग्रेस की अगुवाई में चुनाव आयोग के खिलाफ दिल्ली में मीटिंग बुलाई गई जिसमें ममता बनर्जी की टीएमसी भी शामिल है
- सपा ने सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के दावे से असहमति जताई है और प्रमुख नेता मीटिंग में नहीं जाएंगे
- अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव की गैरमौजूदगी को सीट विवाद और प्रेशर पॉलिटिक्स से जोड़ा जा रहा है
कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव आयोग के खिलाफ एक मीटिंग बुधवार को दिल्ली में बुलाई गई है. इस मीटिंग में ममता बनर्जी की टीएमसी समेत कई दल पहुंच रहे हैं. लेकिन उस उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल सपा का प्रतिनिधित्व अब तक तय नहीं है, जहां अगले कुछ महीनों में चुनाव होना है. इसके अलावा यहां पर कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग को लेकर भी वार्ता चल रही है. माना जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से 150 तक सीटों पर दावा करने से सपा असहज है. वह इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम जैसे नेताओं के तेवरों को गैर-वाजिब मान रही है. सूत्रों का कहना है कि यही कारण है कि इस मीटिंग में अखिलेश यादव नहीं जाएंगे और अब रामगोपाल यादव भी नहीं जा रहे.
जानकारी मिली है कि राज्यसभा प्रत्याशी के तौर पर प्रोफेसर रामगोपाल यादव कल लखनऊ में रहेंगे. अब सपा ने हरेंद्र मलिक को इस मीटिंग में भेजने का फैसला लिया है. अखिलेश यादव ने पहले से कह रखा है कि पहले से तय कार्यक्रम की वजह से वो INDIA अलायंस की बैठक में शामिल नहीं होंगे. पहले प्रोफेसर रामगोपाल यादव का नाम सपा की तरफ़ से इंडिया अलायंस को दिया गया था, लेकिन अब कोई और नेता सपा का प्रतिनिधि बनकर बैठक के हिस्सा लेगा.
अखिलेश यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव के INDIA अलायन्स में ना जाने के मायने क्या हैं? ये सवाल इसलिए क्योंकि क्या अखिलेश यादव सीट शेयरिंग के विवाद के बीच अभी राहुल गांधी से मिलना नहीं चाहते? क्या ये अखिलेश यादव की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है? प्रेशर पॉलिटिक्स इसलिए क्योंकि प्रो रामगोपाल यादव कल राज्यसभा के लिए नामांकन करने वाले हैं. अखिलेश यादव उसमें हिस्सा लेंगे. अगर दोनों नेताओं के पास कल टाइम है तो वो नामांकन कल की बजाय 6 अक्टूबर तक कभी भी कर सकते थे, लेकिन INDIA अलायंस की बैठक का ही दिन क्यों चुना गया?
मीटिंग में नहीं जा रहे और उधर सीट को लेकर तेवरों का दिया जवाब
यही नहीं एक तरफ रामगोपाल और अखिलेश यादव मीटिंग में नहीं जा रहे हैं तो वहीं सीट शेयरिंग को लेकर भी सपा लगाता दबाव बना रही है. इमरान मसूद के जवाब में सपा के ही मुस्लिम जियाउर रहमान बर्क सामने आए हैं. उनका कहना है कि यूपी में भाजपा का सबसे बड़ा विकल्प सपा ही है. सपा ने यहां हमेशा सरकार बनाई है और इंशाअल्लाह हम फिर से बनाएंगे. इसलिए सीट की बात करना ठीक है, लेकिन कितनी चाहिए, यह भी सोचना होगा. इलेक्शन जीतने और सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाना होगा. भले ही कर्नाटक और हिमाचल जैसे राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है, लेकिन यहां तो हम ही बड़े प्लेयर हैं. यदि हमें साथ मिलकर लड़ना है तो फिर सीटें भी सहमति के साथ तय करनी होंगी.
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