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कौन थी साध्वी प्रेम बाईसा? मौत की गुत्थी से लेकर विवादों और आध्यात्म से लगाव तक, जानें सबकुछ

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक ऐसा पोस्ट साझा किया गया, जिसके बाद उनकी मौत संदेश के घेरे में है. उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा पोस्ट की गई. जिसके बाद अब उनकी मौत की जांच की मांग उठ रही है.

कौन थी साध्वी प्रेम बाईसा? मौत की गुत्थी से लेकर विवादों और आध्यात्म से लगाव तक, जानें सबकुछ
साध्वी प्रेम बाईसा के बारे में जानें सबकुछ
  • जोधपुर के साधना कुटीर आश्रम में बाल साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक मौत के कारणों की जांच की मांग उठ रही है
  • साध्वी प्रेम बाईसा के समर्थक और राजस्थानी नेता हनुमान बेनीवाल समेत कई जनप्रतिनिधि जांच की मांग कर रहे हैं
  • प्रेम बाईसा परेऊ गांव की रहने वाली थीं. जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम में उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा ली
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पिछले कई महीने से सोशल मीडिया पर सुर्खियों में रहने वाली बाल साध्वी प्रेम बाईसा की राजस्थान के जोधपुर आश्रम में संदिग्ध मौत के बाद अब मौत के कारणों की जांच की मांग उठ रही है. RLP नेता हनुमान बेनीवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों और उनके अनुयायियों ने उनकी मौत के कारणों की जांच की मांग उठाई है. बुधवार को आश्रम में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया. उसके बाद देर रात ही पाल रोड स्थित साधना कुटीर आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक जमा हो गए और साध्वी के मौत के कारणों की जांच की मांग करने लगे.  साध्वी प्रेम बाईसा के बारे में जानें सबकुछ.

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कौन थी साध्वी प्रेम बाईसा, कैसे हुई मौत?

साध्वी प्रेम बाईसा मूल रूप से बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली थीं. उनके पिता विरमनाथ पेशे से ट्रक ड्राइवर थे और उनकी माता अमरू बाईसा साधारण गृहणी थी. उनकी मां भक्ति भाव से जुड़ी हुई थी. मां के निधन के बाद पिता विरमनाथ बचपन में उनको जोधपुर स्थित गुरुकृपा आश्रम ले गए. यहां पर राजाराम जी महाराज और संत कृपाराम जी महाराज के सानिध्य में उन्होंने कथा वाचन और भजन के साथ आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया. 

 प्रेम बाईसा जब भागवत कथा और भजन गायन को लेकर लोगों में लोकप्रिय हुई तो वह गुरुकृपा आश्रम से अलग होकर जोधपुर में पाल रोड के पास साधना कुटीर आश्रम में रहने लगीं. उनके इस आश्रम के उद्घाटन में बाबा रामदेव सहित प्रमुख साधु संत शामिल हुए थे.

साध्वी प्रेम बाईसा विवादों से नाता

साध्वी प्रेम बाईसा के पैतृक गांव परेउ में भी एक आश्रम बनाया गया था, जहां पर भागवत कथा समेत विभिन्न आयोजन किए गए. लेकिन गांव में परिजनों के साथ जमीन विवाद को लेकर उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज करवाया था. 6 महीने पहले सोशल मीडिया पर वायरल उनके एक वीडियो को लेकर काफी विवाद हुआ था. इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया था. वीडियो में साध्वी और उनके पिता के गले लगने पर सवाल खड़े किए गए थे. जिसे लेकर साध्वी ने काफी नाराजगी भी जताई थी. 

मौत के बाद सोशल मीडिया पोस्ट से शक

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक ऐसा पोस्ट साझा किया गया, जिसके बाद उनकी मौत संदेश के घेरे में है. उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा पोस्ट की गई. उनके पोस्ट में लिखा था,  "मैंने हर एक क्षण सनातन प्रचार के लिए जिया, दुनिया में सनातन धर्म से बड़ा कोई धर्म से नहीं है. आज अंतिमश्वास तक मेरे दिल में सनातन ही है. मेरा सौभाग्य है कि मैंने सनातन धर्म में जन्म लिया और अंतिम श्वास भी सनातन के लिए ली."

साध्वी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर ये पोस्ट वायरल

 साध्वी के अकाउंट पर आगे लिखा गया," मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं और पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा. मैंने आदि गुरू शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को पत्र लिखा. अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन किया, लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा, लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है, मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा."
 

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