सियासी खानदान से था मुख्तार अंसारी, चाचा रह चुके उपराष्ट्रपति; जानें कैसे बना था यूपी का माफिया?

Who was Mukhtar Ansari: मुख्तार अंसारी 5 बार विधायक रह चुका था. वह 2005 से सजा काट रहा था. अलग-अलग मामलों में उसे 2 बार उम्रकैद हुई थी. 60 साल के मुख्तार अंसारी ने हाल ही में कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उसे जेल में धीमा जहर दिया जा रहा है. 

नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के माफिया मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई है. वह बांदा जेल में बंद था. गुरुवार शाम को उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे जेल से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मौत की वजह कार्डिएक अरेस्ट बताई जा रही है. मुख्तार अंसारी 5 बार विधायक रह चुका है. वह 2005 से सजा काट रहा था. अलग-अलग मामलों में उसे 2 बार उम्रकैद हुई थी. 60 साल के मुख्तार अंसारी ने हाल ही में कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उसे जेल में धीमा जहर दिया जा रहा है. उसकी मौत के बाद बांदा, मऊ और गाजीपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बांदा में मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

आइए जानते हैं कौन है मुख्तार अंसारी और कैसे बना माफिया डॉन:-

राजनीतिक खानदान से था मुख्तार अंसारी
मुख्तार अंसारी का जन्म गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद में 3 जून 1963 को हुआ था. उसके पिता का नाम सुबाहउल्लाह अंसारी और मां का नाम बेगम राबिया था. गाजीपुर में मुख्तार अंसारी के परिवार की पहचान एक प्रतिष्ठित राजनीतिक खानदान की है. 17 साल से ज्यादा वक्त से जेल में बंद मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे. मुख्तार अंसारी के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को 1947 की लड़ाई में शहादत के लिए महावीर चक्र दिया गया था. जबकि मुख्तार अंसारी के पिता सुबहानउल्लाह अंसारी गाजीपुर की राजनीति में सक्रिय रहे थे. उनकी बेहद साफ-सुथरी छवि रही है. भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी रिश्ते में तो मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं.

ऐसे अपराध की दुनिया में रखा कदम
उसके खिलाफ 61 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें से 15 हत्या के मामले थे. 1980 के दौर में जब पूर्वांचल में विकास के काम हो रहे थे, तब वहां के लोकल गैंग्स में ठेके लेने की होड़ थी. उस वक्त मुख्तार अंसारी मखानू सिंह गैंग में था. इस गैंग की दुश्मनी साहिब सिंह गैंग से चल रही थी. साहिब सिंह गैंग के लिए गैंगस्टर ब्रजेश सिंह काम कर रहा था. 

1990 के दशक में मुख्तार अंसारी ने बनाया अपना गैंग
1990 के दशक में मुख्तार अंसारी ने अपना गैंग बना लिया. उसने कोयला खनन, रेलवे जैसे कामों में 100 करोड़ का कारोबार खड़ा कर लिया. फिर वो गुंडा टैक्स ,जबरन वसूली और अपहरण के धंधे में भी आ गया. उसका सिंडिकेट मऊ, गाजीपुर, बनारस और जौनपुर में एक्टिव था. पूर्वांचल में उस वक्त दो बड़े गैंग थे ब्रजेश सिंह और मुख्तार अंसारी गैंग. दोनों एक दूसरे के दुश्मन हो गए. 

ब्रजेश सिंह ने मुख्तार के काफिले पर कराया था हमला
मुन्ना बजरंगी भी मुख्तार के गैंग में शामिल था. 2002 में ब्रजेश सिंह ने मुख्तार के काफिले पर हमला करवाया. इसमें मुख्तार अंसारी के 3 गुर्गे मारे गए. इस घटना में ब्रजेश सिंह भी बुरी तरह घायल हो गया. 2005 में बीजेपी एमएलए कृष्णानंद राय की हत्या करवा दी गई. इस हमले में कृष्णानंद राय के साथ उनके 6 लोग भी मारे गए. ये हमला AK-47 से हुआ और करीब 400 राउंड फायरिंग हुई. मृतकों के शरीर से 67 कारतूस बरामद हुए.

कृष्णानंद राय की हत्या के वक्त मुख्तार अंसारी जेल में थे. उन्होंने जेल में रहते हुए ये हत्या करवाई, क्योंकि ब्रजेश सिंह ने बीजेपी एमएलए कृष्णानंद राय का सपोर्ट किया था. 2002 में कृष्णानंद राय ने मुख्तार अंसारी को विधानसभा चुनाव में हराया था.

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इन मामलों में हुई थी सजा
2006 में कृष्णानंद राय की हत्या के एक प्रमुख गवाह शशिकांत की संदिग्ध हालत में मौत हो गई. 2004 में डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने मुख्तार अंसारी के ठिकाने से लाइट मशीन गन बरामद की थी. उनके खिलाफ POTA के तहत केस दर्ज किया गया था. 2012 में संगठित गैंग चलाने के चलते अंसारी पर मकोका के तहत केस दर्ज किया गया. अप्रैल 2023 में बीजेपी नेता कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में उसे 10 साल की सजा हुई. 13 मार्च 2024 को एक आर्म्स लाइसेंस केस में अंसारी को उम्रकैद की सजा हुई.