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This Article is From Feb 16, 2026

क्या फिर साथ आएंगे सपा-बसपा? 'बहुजन समाज' और 'गठबंधन' पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान

अखिलेश यादव ने कहा कि यह गठबंधन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पीडीए की संभावनाएं और मजबूत होंगी. विपक्ष की एकता के पिछले प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर और राम मनोहर लोहिया ने एक बार राजनीति को नयी दिशा देने के लिए मिलकर काम करने का प्रयास किया था, लेकिन परिस्थितियों और राजनीतिक माहौल ने उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया.

क्या फिर साथ आएंगे सपा-बसपा? 'बहुजन समाज' और 'गठबंधन' पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान
अखिलेश यादव और मायावती की फाइल फोटो
  • अखिलेश यादव ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी और सपा के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं और भविष्य में और गहरे होंगे
  • पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत 15000 से अधिक सदस्यों के सपा में शामिल होने का कार्यक्रम आयोजित किया गया
  • सपा और बसपा ने पहले भी 1993 और 2019 में गठबंधन किया था लेकिन दोनों बार गठबंधन टूट गया था

यूपी में सियासत का रुख तेजी से बदल रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ का मुकाबला करने के लिए क्या अखिलेश और मायावती साथ आ सकते हैं? ये सवाल इसलिए क्योंकि सपा अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि बहुजन समाज और सपा के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं तथा भविष्य में और भी गहरे होंगे. वे मायावती के कभी करीबी रहे और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत विभिन्न दलों के 15,000 से अधिक सदस्यों के सपा में शामिल होने के मौके पर बोल रहे थे.

जिस भी पार्टी में रहा, अखिलेश को मानता रहा- नसीमुद्दीन

समाजवादी पार्टी ज्वाइन करते हुए नसीमुद्दीन ने कहा कि ज्वाइनिंग के बाद में पार्टी का सबसे जूनियर हूं, सारे नेता मेरे सीनियर हैं. अखिलेश की तारीफ करते हुए नसीमुद्दीन ने कहा कि मैं जिस भी पार्टी में रहा नेता अखिलेश यादव को मानता रहा अखिलेश की प्रशंसा में नसीमुद्दीन ने शायरी पढ़ते हुए कहा- हयात लेकर चलो कायनात लेकर चलो चलो तो सारे जमाने को साथ लेकर चलो.  सीएम योगी को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि चिड़िया की आंखों पर निशाना लगाना है सरकार बदलनी है, 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है. बुलडोजर पर अटैक करते हुए नसीमुद्दीन में कहा कि अपराध चरम पर है, ज्यादा बोलेंगे तो बुलडोजर चल जाएगा बात दोहराते हुए  शेर पड़ा- दुनिया में कहीं ऐसी तमसीद नहीं मिलती कातिल ही मोहब्बत है, कातिल ही सिपाही है, महसूस ये होता है कि यह डर तबाही है शीशे की अदालत है पत्थर की गवाही है.
 

अखिलेश यादव कर रहे  थे पीडीए की बात

अखिलेश यादव ने इसे ‘‘पीडीए का प्रेम प्रसार समारोह'' बताते हुए कहा कि यह कार्यक्रम लोगों के बीच भाईचारा तथा आपसी सहयोग को मजबूत करेगा. यादव ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों समुदाय को साधने के लिए ‘पीडीए' शब्द गढ़ा था. उन्होंने कहा कि शांति और प्रगति पीडीए की नींव पर टिकी है, सामाजिक एकता सकारात्मक और प्रगतिशील राजनीति की सबसे बड़ी उपलब्धि है और इसीलिए हमने इसे पीडीए नाम दिया है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष पारंपरिक होली समारोहों से पहले 'पीडीए होली मिलन' का आयोजन किया जा रहा है. सपा में शामिल होने वालों में पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के अलावा अपना दल (सोनेलाल) के पूर्व विधायक राजकुमार पाल भी शामिल हैं. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और मायावती के करीबी रहे सिद्दीकी 2017 में बसपा से निष्कासित होने से पहले मायावती की सरकार में चार बार मंत्री रह चुके थे. बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए और हाल में उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया. 

गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव ने कही ये बात

अखिलेश यादव ने कहा कि यह गठबंधन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पीडीए की संभावनाएं और मजबूत होंगी. विपक्ष की एकता के पिछले प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर और राम मनोहर लोहिया ने एक बार राजनीति को नयी दिशा देने के लिए मिलकर काम करने का प्रयास किया था, लेकिन परिस्थितियों और राजनीतिक माहौल ने उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया. उन्होंने कहा कि गठबंधन बने और बाद में टूट गए, लेकिन हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में हम मिलकर उस संघर्ष को और मजबूत करेंगे.

सपा और बसपा ने 1993 और 2019 में किया था गठबंधन

गौरतलब है कि सपा और बसपा ने 1993 में विधानसभा चुनाव के पहले गठबंधन किया था और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में गठबंधन की सरकार बनी. हालांकि जून 1995 में यह गठबंधन टूट गया और फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से मायावती नीत बसपा सरकार बनी। इसके बाद, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बसपा और सपा ने उत्तर प्रदेश में फिर गठबंधन किया था, लेकिन चुनाव के बाद यह गठबंधन टूट गया. परोक्ष रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए यादव ने शंकराचार्य का अपमान करने का आरोप लगाया और कहा कि सपा उनके साथ खड़ी है.  प्रयागराज में माघ मेले के दौरान जिला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच हुए विवाद पर विधानसभा में अपने हालिया संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुप्पी तोड़ी और कहा कि शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग हर कोई नहीं कर सकता. योगी ने इस बात पर बल दिया कि धार्मिक आयोजनों के दौरान धार्मिक मर्यादा और कानून का पालन किया जाना चाहिए. अखिलेश यादव ने किसी का नाम लिए बिना कहा, “पीड़ित लोग पीडीए हैं और हम शंकराचार्य जी के साथ खड़े हैं.  उन्होंने कहा कि परंपराओं पर सवाल उठाने और दूसरों से “प्रमाणपत्र” मांगने के प्रयास किए जा रहे हैं.
 

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