- नोबेल समिति ने 2026 का पुरस्कार साउथ अफ्रीका की महिला नवनेथम नवी पिल्लै को दिया है, जिनका भारत से संबंध है
- नवनेथम नवी पिल्लै को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है
- उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ने वालों का कानूनी बचाव किया और उनकी मदद की है
नोबेल समिति ने 2026 का ऐलान कर दिया है. साउथ अफ्रीका की महिला नवनेथम नवी पिल्लै को यह पुरुस्कार दिया गया है, जिनका कनेक्शन भारत से है. उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयास में यह पुरस्कार दिया गया है. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ने वालों की मदद की और उनका कानूनी बचाव किया. इसके अलावा अपराध और नरसंहार के लिए जिम्मेदार दोषियों को भी सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई. नवनेथम नवी पिल्लै दक्षिण अफ्रीका में जज भी रह चुकी हैं. उन्हें 1995 में दक्षिण अफ्रीका में यह जिम्मेदारी मिली थी. उनके पूर्वज भारत से दक्षिण अफ्रीका गए थे.
भारतीय-तमिल परिवार में जन्म
दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में नवनेथम नवी पिल्लै का जन्म 23 सितंबर 1941 को भारतीय तमिल परिवार में हुआ था. उन्होंने रंगभेद के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका में शुरुआत में एक वकील के रूप में काम किया था. इसके अलावा उन्होंने नेल्सन मंडेला समेत कई राजनीतिक बंदियों और दक्षिण अफ्रीका के स्वतंत्रता सेनानियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी थी. 2008 से 2014 के बीच वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं.
पूर्वज गए थे दक्षिण अफ्रीका
नवनेथम नवी पिल्लै भारतीय मूल की है, उनके पूर्वज भारत के तमिलनाडु राज्य से दक्षिण अफ्रीका गए थे. उन्होंने अपने भारतीय मूल का होने पर कई बार गर्व भी जताया है. उनके दादा ने गिरमिटिया मजदूर के तौर पर काम किया था. वह महात्मा गांधी के विचारों से भी बहुत ज्यादा प्रभावित थी, दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ाई में भी उन्होंने गांधी के विचारों का भी अध्यन किया था. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के पद पर रहते हुए वह भारत के दौरे पर भी आई थी. जहां उन्होंने मानवाधिकारों और महिला सुरक्षा की प्रणालियों पर चर्चा की थी.
दक्षिण अफ्रीका के रवांडा नरसंहार में बड़ी भूमिका
दक्षिण अफ्रीका के रवांडा में 1994 में बड़ा नरसंहार हुआ था. तब तुत्सी समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या में हत्या कर दी गई थी. इसके बाद उन्हें न्याय दिलाने के लिए नवनेथम नवी पिल्लै ने बड़ी भूमिका निभाई थी. मुद्दा संयुक्त राष्ट्र तक गया था, जहां अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण बना था. 1995 में नवनेथम नवी पिल्लै को जज बनाया गया था. 1999 से उन्होंने 2003 तक इसकी अध्यक्षता की थी और आरोपियों को सजा दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. वह दक्षिण अफ्रीका के नटाल प्रांत में वकालत करने वाली पहली महिला थी. जबकि हाई कोर्ट में जज बनने वाली भी पहली अश्वेत महिला थी. यह उनकी बड़ी उपलब्धियां मानी जाती हैं.
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