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'निंदनीय फैसला...', नोबेल पुरस्कार विजेता का जिक्र कर केंद्र पर क्यों हमलावर हुए शशि थरूर?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "भारतीय मूल के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के लिए बधाई संदेशों का न आना अच्छी बात नहीं है.

'निंदनीय फैसला...', नोबेल पुरस्कार विजेता का जिक्र कर केंद्र पर क्यों हमलावर हुए शशि थरूर?
शशि थरूर और नवनेथम 'नवी' पिल्लै
NDTV
नई दिल्ली:

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नवनेथम 'नवी' पिल्लै को देने का ऐलान किया है. उनकी जड़ें भारत से जुड़ी हुई हैं. नवनेथम 'नवी' पिल्लै के पूर्वज 130 साल से भी पहले भारत से चले गए थे. वे पहले श्रीलंका गए और बाद में साउथ अफ्रीका जाकर बस गए. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीकी कानूनविद नवनेथम 'नवी' पिल्लै को इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर सरकार ने चुप्पी साथ रखी है. हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी कहा कि उनकी अपनी पार्टी ने भी ऐसा ही किया है, इसलिए उन्हें 'पाखंड' के लिए नोबेल पुरस्कार दिया जाना चाहिए.

पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में उनके रिश्तेदारों के बीच जश्न का माहौल बन गया, जिससे उनके गृह क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. पिल्लै का जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था. उन्होंने गरीबी और रंगभेद के भेदभाव का सामना करते हुए अपनी जिंदगी गुजारी.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय मूल की इस महिला के लिए बधाई संदेशों का न आना 'निंदनीय' है.

'घटिया लोगों पर शर्म आती है...'
  
थरूर ने अपनी पोस्ट में कहा, "भारतीय मूल की इस असाधारण महिला को नोबेल शांति पुरस्कार जीते हुए छह दिन हो गए हैं और भारत सरकार ने उन्हें बधाई तक नहीं दी? ऐसे घटिया लोगों पर शर्म आती है, जिन्होंने इतना निंदनीय फैसला लिया है."

उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जिस महिला की वे बात कर रहे थे, उनके पूर्वज तमिलनाडु से थे, एक ऐसा राज्य जहां फिलहाल बीजेपी सत्ता में नहीं है. थरूर की इस पोस्ट में AI से बना एक वीडियो भी शामिल था, जिसमें पिल्लै की जिंदगी को दर्शाया गया था. इसमें उनके लंबे कानूनी करियर के दौरान उनके सामने आई मुश्किलों का भी जिक्र था.

हालांकि, शशि थरूर की पोस्ट पर आम लोगों की ओर से ऐसे कमेंट्स भी आए, जिन्होंने सरकार की आलोचना करने के उनके दावों की पोल खोल दी.

प्रियंका नाम की एक यूज़र ने लिखा, "उन्हें 'नोबेल पाखंड' नाम का एक पुरस्कार शुरू करना चाहिए. आपको ही यह सम्मान मिलना चाहिए." उन्होंने यह बात थरूर के उस कथित कोशिश की ओर इशारा करते हुए कही, जिसमें वे पार्टी अध्यक्ष का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के विरोधियों से दोस्ती बढ़ाने की कोशिश करते दिखे थे.

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कांग्रेस नेता की कड़ी आलोचना की और उनके इस पोस्ट को 'हैरान करने वाला' बताया. 

पिल्लै ने यूनिवर्सिटी ऑफ नटाल (University of Natal) से कानून की पढ़ाई की और 1988 में हार्वर्ड लॉ स्कूल से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की. उनके करियर में रंगभेद-विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करना और 1995 में साउथ अफ्रीका के हाई कोर्ट में नियुक्त होने वाली पहली अश्वेत महिला बनना शामिल है.

इसके बाद उन्होंने रवांडा के लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया. नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शांति और अंतर्राष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनकी कोशिशों के लिए उन्हें सम्मानित किया.

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