- वी. सुब्रमणि मोहना सुप्रीम कोर्ट में बार से सीधे नियुक्त होने वाली दूसरी महिला न्यायाधीश बनीं हैं.
- उन्होंने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिलाने वाले अहम मामले में पैरवी की थी.
- मोहना लगभग चार दशकों से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं और संवैधानिक मामलों में विशेषज्ञ हैं.
भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिलाने वाली सीनियर वकील वी. सुब्रमणि मोहना को सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीश बनाया गया है. वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में बार से सीधे नियुक्त होने वाली दूसरी महिला जज बनेंगी. इससे पहले यह उपलब्धि जस्टिस इंदु मल्होत्रा को मिली थी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के 76 वर्षों के इतिहास में सेवा देने वाली 12वीं महिला जज होंगी. यदि वो अपने कार्यकाल पूरा कर लेती हैं तो सुप्रीम कोर्ट में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाली महिला जज होगी.
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 5 नए न्यायाधीशों- जस्टिस शील नागू, श्री चंद्रशेखर, संजीव सचदेवा और अरुण पल्ली के साथ-साथ वी. मोहना की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की. ये सभी मंगलवार को शपथ ले सकते हैं. इन पांच में से 4 अलग-अलग हाई कोर्ट में पहले से जज थे, केवल वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में प्रैक्टिस कर रही थीं.
चेन्नई में जन्म, 4 दशक से कर रही प्रैक्टिस
चेन्नई में जन्मी मोहना पहली पीढ़ी की वकील हैं और लगभग चार दशकों से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं. कम प्रोफाइल बनाए रखने के लिए जानी जाने वाली उन्होंने संवैधानिक, सिविल और आपराधिक मामलों सहित कई क्षेत्रों में काम किया है और कई महत्वपूर्ण मामलों में अमिकस क्यूरी के रूप में भी योगदान दिया है.

जस्टिस वी. मोहना सहित 5 नए जजों की नियुक्ति का आदेश.
Photo Credit: ndtv
सेना में महिला अधिकारियों को दिलाई स्थायी कमीशन
उनकी सबसे प्रमुख भूमिका सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से जुड़े मामले में रही. सुप्रीम कोर्ट ने अंततः महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सेना को उन्हें स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया, जिससे सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता का रास्ता खुला.
सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों में की पैरवी
मोहना ने 2015 के राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) मामले में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व भी किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली को बदलने वाले संवैधानिक संशोधन को रद्द कर दिया था. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों में पैरवी की है, जिनमें महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकार और कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध से जुड़े मामले शामिल हैं.
कोयंबटूर लॉ कॉलेज के पहले बैच में की पढ़ाई
कोयंबटूर लॉ कॉलेज की स्नातक मोहना उस संस्थान के 5 वर्षीय कानून पाठ्यक्रम (1983–1988) के पहले बैच का हिस्सा थीं. उनके सहपाठियों में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन भी थे, जिन्हें 2023 में सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था. ग्रेजुएशन के बाद दोनों दिल्ली आ गए और पहले वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन तथा बाद में पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल के साथ काम किया.
2015 में सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट नॉमिनेट हुई थी वी. मोहना
वी. मोहना को अप्रैल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एकवोकेट के रूप में नॉमिनेट किया था. उनका काम संवैधानिक, सिविल, आपराधिक, सेवा, बैंकिंग, बौद्धिक संपदा, साइबर अपराध और कॉरपोरेट कानून तक फैला रहा है, हालांकि वह मुख्यतः संवैधानिक और सिविल मामलों के लिए जानी जाती हैं.
कार्यकाल पूरा किया तो बनेगा रिकॉर्ड
यदि वह पूरा कार्यकाल पूरा करती हैं, तो जून 2031 तक सुप्रीम कोर्ट में रह सकती हैं, जब वह 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगी. इससे उनका कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट की महिला न्यायाधीशों में सबसे लंबा हो सकता है. क्योंकि अभी तक सुप्रीम कोर्ट में कोई भी महिला इतने लंबे समय तक जज नहीं रही हैं.
अभी सुप्रीम कोर्ट में एक मात्र बी.वी. नागरत्ना महिला न्यायधीश
मालूम हो कि इस समय सुप्रीम कोर्ट में केवल एक महिला न्यायाधीश जस्टिस बी.वी. नागरत्ना हैं. नागरत्ना भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं. नए नियुक्तियों के बाद कोर्ट में कुल 37 न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) हो गए है हालांकि एक पद अभी खाली है.
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