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This Article is From Feb 25, 2026

जब टैरिफ पर आ गया अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला तो कांग्रेस के ट्रेड डील विरोध का क्या औचित्य?

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों ने तय किया है कि भारत के मुख्य वार्ताकार और उनकी टीम की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा को हाल के ताज़ा घटनाक्रम और उसके असर के मूल्यांकन के बाद निर्धारित किया जायेगा.

जब टैरिफ पर आ गया अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला तो कांग्रेस के ट्रेड डील विरोध का क्या औचित्य?
नई दिल्ली:

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के "रेसिप्रोकल टैरिफ" को अमान्य घोषित करने के बाद भारत पर लगा 18% टैरिफ घटकर 15% रह गया है. जिस कानून के तहत डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 15% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है वो सिर्फ 150 दिनों तक ही लागू रह सकता है. ये घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत और अमेरिका के वार्ताकार इसी सोमवार को वाशिंगटन में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लागू करने के लिए जरूरी लीगल एग्रीमेंट को फाइनल करने पर बातचीत करने वाले थे. लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड जगत में हलचल और टैरिफ रेट को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन का अमेरिका दौरा टल गया.

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों ने तय किया है कि भारत के मुख्य वार्ताकार और उनकी टीम की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा को हाल के ताज़ा घटनाक्रम और उसके असर के मूल्यांकन के बाद निर्धारित किया जायेगा. बैठक पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथि पर पुनर्निर्धारित की जाएगी.वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने RBI गवर्नर के साथ एक अहम बैठक के बाद सोमवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, वाणिज्य मंत्रालय स्थिति की समीक्षा कर रहा है.

ज़ाहिर है, केंद्र सरकार इन घटनाक्रमों के असर का अध्ययन कर रही है. भारत और अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील हुआ था उसमें रेसिप्रोकल टैरिफ रेट को 18% को आधार मानकर किया गया था. लेकिन टैरिफ 18% से घटकर 15% होने के बाद भारतीय एक्सपोर्टरों पर फौरी तौर पर टैरिफ का दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है. ऐसे में सवाल उठता है की जब भारत और अमेरिका खुद ट्रेड डील पर पुनर्विचार कर रहे हैं, और इसे लागू करने के लिए जरूरी लीगल एग्रीमेंट पर बातचीत को टाल चुके हैं, तो उसपर कांग्रेस के विरोध का औचित्य क्या है? 

दरअसल कांग्रेस लीडरशिप ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया है, और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध और तेज़ कर दिया है .कांग्रेस नेताओं ने 24 फरवरी को भोपाल में किसान कांग्रेस सम्मलेन किया. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार ट्रेड डील करके देश के किसानों को गुलामी में धकेलने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने किसान कांग्रेस सम्मेलन में मंगलवार को कहा कि मोदी जी, खुली चुनौती है - India-US Trade deal रद्द कर के दिखाइए. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ़ रद्द कर दिए, दुनिया भर के देशों ने अपने समझौते renegotiate कर दिए - आप क्यों खामोश हैं? सारा देश जानता है आप ये नहीं कर सकते - क्योंकि आप अमेरिकी ग्रिप में चोक कर पूरा सरेंडर कर चुके हैं.

राहुल गांधी ने खुलकर सम्मेलन में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ इंडिया AI इम्पैक्ट सम्मिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि मुझे युवा कांग्रेस के अपने बब्बर शेर साथियों पर गर्व है, जिन्होंने PM के खिलाफ निडर होकर देश के हित में आवाज़ उठाई है. अमेरिका के साथ हुए Trade Deal में देश के हितों से समझौता किया गया है. यह समझौता हमारे किसानों और टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान पहुंचाएगा तथा हमारे डेटा को अमेरिका के हाथों में सौंप देगा. इस सच्चाई को देश के सामने रखने के लिए युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब और IYC के अन्य साथियों की गिरफ्तारी तानाशाही प्रवृत्ति और कायरता का प्रमाण है. कांग्रेस पार्टी और मैं अपने बब्बर शेर साथियों के साथ मज़बूती से खड़े हैं. सत्ता को सच का आईना दिखाना अपराध नहीं, देशभक्ति है.

इससे पहले राहुल गाँधी ने संसद में बजट पर चर्चा में बोलते हुए आरोप लगाया था कि ये ट्रेड डील देशहित के खिलाफ है.दरअसल कांग्रेस लीडरशिप ने इस मुद्दे पर देशभर में कैंपेन शुरू करने का फैसला किया है. कांग्रेस अध्यक्ष माललकार्जुन खरगे का आरोप है कि युवा आज नौकरी के लिए तड़प रहे हैं और देश का माहौल इतना खराब हो चुका है, उसके कारण मोदी जी के प्रति लोगों में भारी रोष है. ट्रंप के सामने उन्होंने घुटने टेक दिए. नाक रगड़कर उनके सारे शर्तों को मान लिया, जिससे पूरा देश शर्मिंदा हो गया. जो काम हमारे किसानों की भलाई और मदद के लिए किया जाना चाहिए था, उसकी बजाय किसानों का नुकसान करने की बातचीत की गई. इससे यह भी साफ़ हो गया कि लोग समझते थे कि मोदी जी देश के हित में ट्रंप से बात कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में ट्रंप हमें गुलाम बना रहा है और हमें बंधुआ मजदूर बनाने की दिशा में धकेला जा रहा है. यह काम मोदी जी कर रहे हैं.ज़ाहिर है, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच ये टकराव और बढ़ने वाला है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता काफी अच्छी तरह आगे बढ़ी है... USISPF प्रेसिडेंट मुकेश अघी बोले 

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