दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में कई छात्र मलबे में दबे हुए हैं. अब तक दो मौतों की पुष्टि हो चुकी है और कई छात्र अभी भी अंदर फंसे हुए हैं. एनडीआरएफ और पुलिस मिलकर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है. कोशिश की जा रही है कि अंदर फंसे हर छात्र को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.
बताया जा रहा है कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वहां एक पीजी का संचालन हो रहा था. यह वही पीजी है, जिसे करीब एक साल पहले बंद कर दिया गया था, लेकिन कुछ महीने पहले इसे फिर से शुरू कर दिया गया. यहां कई छात्र रह रहे थे. बताया तो यह भी जा रहा है कि ज्यादातर छात्र पूर्वोत्तर भारत से आए हुए थे. एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, इस पीजी का नाम 'द हॉस्टल डेज' है.
इसका इंस्टाग्राम पेज कई पोस्ट से भरा हुआ है जहां छात्रों को बेहतर सुविधाओं के सपने दिखाए जा रहे हैं. उन्हें बताया जा रहा है कि यहां उन्हें हर तरह की सुरक्षा मिलेगी, मुफ्त इंटरनेट और वाई-फाई दिया जाएगा, लॉन्ड्री हाउस की सुविधा रहेगी और एक कॉल पर डॉक्टर भी आ जाएगा. इसके अलावा खाने की व्यवस्था भी रहेगी. इसके लिए छात्रों से 13,000 से 15,000 रुपये तक किराया लिया जा रहा था.
नीचे दी गई तस्वीरों में देखें, आखिर 'मौत का यह पीजी' कैसा दिखाई देता था और अब वहां क्या हाल है-





हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, NDRF, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियों ने राहत अभियान शुरू किया. अब तक 6 लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजा गया है. मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए Blinkit एम्बुलेंस के जरिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी मंगाए गए. रेस्क्यू टीम लगातार लोगों की तलाश में जुटी है.
इसके अलावा एक ग्रीन कॉरिडोर भी तैयार कर दिया गया है जिससे समय रहते घायलों को अस्पताल ले जाया सके और जरा सा भी वक्त जाया नहा हो. बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे कई छात्र फंसे हैं जो चिल्ला रहे हैं, उनकी आवाज सुन ही एनडीआरएफ की टीमें उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं. कुछ छात्र तो ऐसे भी हैं जो मलबे के नीचे से ही कॉल कर मदद की गुहार लगा रहे हैं.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी ग्राउंड पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया है. उनकी तरफ से रेस्क्यू तेज करने के निर्देश दिए गए हैं और वे अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
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