Monsoon Update: 4 जून को केरल के रास्ते भारत में दस्तक देने वाला मॉनसून बीते कुछ दिनों से गायब सा हो गया है. शुरुआती हफ्ते में मॉनसून ने तेज रफ्तार से कई राज्यों को कवर किया. लेकिन बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने के बाद मॉनसून अचानक विलुप्त हो गया. अब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात तक में लोग मॉनसून का ब्रेसबी से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसका कुछ अता-पता नहीं चल रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों में भी मॉनसून के गायब होने की बात सामने आई. मॉनसून की इस बेरुखी के कारण महाराष्ट्र में पानी को लेकर हाहाकार मचा है. पुणे में पानी की सप्लाई के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है. मुंबई में मारे गर्मी के लोग बीच किनारे खुले में रात बीता रहे हैं.
मॉनसून के अचानक गायब होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. इसमें एक सोमाली जेट भी बड़ा कारण है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमाली जेट के कमजोर विकास ने मॉनसून की रफ्तार को थाम दिया है.
भीषण गर्मी के कारण मुंबई में बीच पर रात गुजराते दिखे लोग

क्या है सोमाली जेट? (What is Somali Jet)
सोमाली जेट एक भूमध्यरेखीय वायु प्रणाली है, जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है. इसे भारतीय मानसून का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है. इसे फाइंडलेटर जेट के नाम से भी जाना जाता है. सोमाली जेट पूर्वी अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वर्षा का कारण बनता है. दरअसल सोमाली जेट एक निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह है, जो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को भारत की ओर लाने में मदद करता है.
सोमाली जेट का मॉनसून से क्या रिश्ता?
मौसम विभाग की माने तो सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मॉनसून की रफ्तार थम जाती है. इसके मजबूत रहने पर भारत में अच्छी बारिश होती है. इस बार सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मॉनसून की रफ्तार धीमी हो गई है. इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों का भी अभाव रहा है, जो आमतौर पर मॉनसून को अंदरूनी इलाकों तक खींचने में सहायक होती हैं.
प्रशांत महासागर में बनने वाले चक्रवातों के अवशेष भी जून 2026 में बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र मजबूत नहीं कर पाए. ऐसे में भारत के कई राज्यों में मॉनसून अभी तक नहीं पहुंच सका है.

1 से 18 जून तक 40 फीसदी कम बारिश
मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गई है. आमतौर पर 01 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल अब तक सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है. मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज की गई है.
11 जून को मुंबई पहुंचने वाला था मॉनसून, अभी तक पता नहीं
मॉनसून के मुंबई पहुंचने की नार्मल डेट 11 जून है, लेकिन इसके 7 दिन बाद भी मॉनसून मुंबई नहीं पहुंचा है. मॉनसून का अपडेट देते हुए भारत मौसम विभाग ने कहा कि अगले 4-5 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं.
दैनिक मौसम परिचर्चा (18.06.2026)
— India Meteorological Department (@Indiametdept) June 18, 2026
सप्ताह के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है।
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IMD के साइंटिस्ट ने कहा- प्रतिकुल स्थितियों के कारण थमी मॉनसून की रफ्तार
NDTV से बातचीत में भारत मौसम विज्ञान विभाग के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि महाराष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार थम गई है.इसकी वजह यह है कि मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम की स्थितियां अभी अनुकूल नहीं हैं.पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी मॉनसून की गति धीमी पड़ गई है. मुंबई में मॉनसून के आने की सामान्य तारीख 11 जून है, लेकिन इस साल मॉनसून में देरी हुई है.
मैरीलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने कहा- समस्या केवल नमी की नहीं
मौसम और पर्यावरण पर डिटेल में काम करने वाले एजेंसी डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट में मैरीलैंड विश्वविद्यालय के एमेरिटस प्रोफेसर और IIT कानपुर के विजिटिंग प्रोफेसर रघु मुरटुगुड्डे ने कहा कि समस्या केवल नमी की कमी नहीं है. उन्होंने कहा, 'हवाएं चल रही हैं और अपेक्षा के मुताबिक कुछ किलोमीटर तक पहुंच रही हैं. वे नमी ला रही हैं, लेकिन वायुमंडलीय अवनमन (subsidence) संवहन को रोक रहा है.

रघु मुरटुगुड्डे ने आगे कहा यह पैटर्न बंगाल की खाड़ी की परिस्थितियों से जुड़ा लगता है, जहां क्रॉस-इक्वेटोरियल हवाएं अपेक्षा के अनुसार मुख्य मॉनसून क्षेत्र में वापस नहीं मुड़ रही हैं. इसीलिए ट्रफ का पूर्वी सिरा छाते के हैंडल की तरह मुड़ गया है और पूर्वोत्तर इलाकों में सिर्फ छिटपुट बारिश हो रही है.
मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और नेपाल के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुकी है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले चार से पांच दिनों में मानसून तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है.
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