लालू प्रसाद यादव के परिवार को कोर्ट से 'नौकरी के बदले जमीन' केस में बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 'लैंड फॉर जॉब' घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव समेत 40 से अधिक लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया है. अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार समेत 40 से अधिक लोगों के खिलाफ आरोप तय किए हैं. इस मामले में कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया है. अदालत ने संदेह की कसौटी पर पाया कि लालू और परिवार की ओर से व्यापक साजिश रची गई थी. कोर्ट ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार की बरी करने की मांग की दलील सही नहीं है.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी और बच्चों के नाम अचल संपत्तियां जुटाईं. अदालत के अनुसार, इस पूरे मामले में अन्य आरोपियों ने भी आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय रूप से सहयोग किया. कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन लेने का एक तरह का विनिमय सिस्टम चल रहा था, जिसके तहत कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनके या उनके परिजनों की जमीन ली गई. कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थे, जबकि अन्य आरोपियों ने इस षड्यंत्र को अंजाम देने में मदद की. हालांकि, जिन 52 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए, इसलिए अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया.
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इस मामले में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 और 120बी के तहत आरोप तय किए हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत भी आरोप तय किए गए हैं.
क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटाला?
लालू यादव और उनके परिवार पर आरोप है कि 2004 से 2009 के रेल मंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने उम्मीदवारों से रेलवे के अलग-अलग जोन में ग्रुप डी की नौकरी के बदले अपने परिवार के लोगों के नाम पर जमीन ली थी. इस दौरान लालू ने कौडि़यों के भाव में लोगों से उनकी जमीन अपने नाम करवा ली. सीबीआई का आरोप है कि ज़मीन लेकर रेलवे में 7 लोगों को नौकरी दी गई. सीबीआई का कहना है कि ज़मीन देकर नौकरी पाने वाले भी आरोपी हैं और उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी.
लालू परिवार पर पटना में 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन कब्जाने का आरोप
पटना के रहने वाले कई लोगों ने खुद या अपने परिवार के सदस्यों के जरिए लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनके परिवार के नियंत्रित एक निजी कंपनी के पक्ष में पटना में मौजूद अपनी जमीन बेची थी. ये जमीन आखिर क्यों बेची गई, ये बड़ा सवाल था? यहीं से लालू परिवार शक के घेरे में आया. रेलवे में भर्ती के लिए ना कोई विज्ञापन या कोई सार्वजनिक नोटिस जारी नहीं किया गया था. फिर भी जो पटना के निवासी थे, उन्हें मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित अलग-अलग जोनल रेलवे में सब्स्टिट्यूट के तौर पर नियुक्त किया गया था. सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में पटना में 1,05,292 फुट जमीन लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों ने विक्रेताओं को नकद भुगतान कर हासिल की थी.
'नौकरी के बदले जमीन' में किन-किन का नाम
सीबीआई की एफआईआर में लालू, पत्नी राबड़ी, बेटी मीसा और हेमा के नाम हैं. एफआईआर में 90 से ज्यादा लोगों के नाम हैं, जिन्हें कथित तौर पर जमीन के बदले में नौकरी मिली. आरोप है कि लालू प्रसाद ने एक साजिश के तहत अपने परिवार के नाम पर लोगों से बेहद कम दरों पर जमीन खरीदी. लालू यादव के करीबी सहयोगी भोला यादव को सीबीआई ने जुलाई 2022 में गिरफ्तार किया. राजद का कहना है कि सीबीआई की ये कार्रवाई भाजपा द्वारा प्रायोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित है.
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