- दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी ने मॉक संसद का आयोजन किया
- यह कार्यक्रम इंडिया गठबंधन के कांग्रेस के जन महाभियोग के काउंटर के रूप में आयोजित किया गया था
- सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी संगठन की स्थापना 1974 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने नागरिक स्वतंत्रता के लिए की थी
दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर आज का नजारा संसद भवन जैसा था. यहां एक बिल्कुल संसद की तरह पक्ष और विपक्ष के सांसद बैठे थे, जहां दोनों में देश में चल रहे बड़े मुद्दों पर जमकर बहस हुई. यह आयोजन 'सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी' नाम के संगठन की तरफ से आयोजित किया गया था. जो चर्चा का विषय बना हुआ है. इस आयोजन का मुख्य विषय 'लोकतंत्र बनाम अराजकता' रखा गया था. इसे कांग्रेस के जन महाभियोग को काउंटर के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि कांग्रेस कार्यक्रम आज टल गया, लेकिन यह आयोजन अपने तय समय से आयोजित हुआ.
'सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी' की मॉक संसद
इंडिया गठबंधन के जवाब में दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में 'सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी' नाम का संगठन 'लोकतंत्र बनाम अराजकता' विषय पर एक हाई-प्रोफाइल मॉक संसद का आयोजन करने वाला है. इस आयोजन को इंडिया गठबंधन के कार्यक्रम को काउंटर के तौर पर देखा जा रहा है. सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी के आयोजकों का कहना है 'यह आयोजन विपक्ष की तरफ से सड़कों पर फैलाई जा रही अराजकता और शासन बदलने की साजिशों के खिलाफ राष्ट्रवादियों का एक करारा जवाब है. इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को संसदीय मर्यादा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान के प्रति जागरूक करना है.'
हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस आयोजन में बीजेपी का कोई सीधा संबंध नहीं है, इस आयोजन में सुप्रीम कोर्ट के वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, सामाजिक कार्यकर्ता, प्रबुद्ध नागरिकों के साथ-साथ कई विश्वविद्यालयों को छात्र भी शामिल हुए हैं. जिसमें यह छात्र सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिका निभाते हुए बहस करेंगे.
क्या है 'सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी' संगठन
सवाल यह भी है कि 'सिटिजन्स फॉर डेमोक्रेसी' संगठन क्या है, यह भी सब जानना चाहते हैं. इसके लिए आपको इसके इतिहास में जाना होगा. क्योंकि इसका संबंध पुराना है. यह भारत का एक पुराना प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक और गैर-सरकारी नागरिक समाज संगठन है. जिसकी स्थापना साल 1974 में हुई थी, देश में आपातकाल लागू होने से कुछ महीने पहले ही यह बना था, जिसकी स्थापना लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने की थी, उन्होंने एम तारकुंडे के साथ मिलकर नागरिक स्वतंत्रताओं और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए इस गैर-राजनीतिक मंच की शुरुआत की थी.
इस संगठन का उद्देश्य किसी भी राजनीतिक दल से दूरी बनाते हुए मुख्य कार्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी, चुनावी सुधारों को बढ़ावा देना और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ जनता को जागरूक करना है.
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क्यों आयोजित हुआ यह कार्यक्रम
दरअसल, अक्टूबर 2026 में देश का राजनीतिक माहौल गर्माया हुआ है. विपक्षी दल लगातार देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और ईवीएम (EVM) की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं. साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल हमलावर हैं. इस कार्यक्रम का आयोजन इन्हीं सब मुद्दों पर किया जा रहा है. आयोजकों का मानना है कि राजनीतिक मतभेदों को सड़कों पर 'अराजकता' फैलाने या संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को असंवैधानिक तरीकों से निशाना बनाने के बजाय संसदीय और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर सुलझाया जाना चाहिए. यह मॉक संसद युवाओं को इसी मर्यादा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही है. जहां छात्र यह जानेंगे कि विरोध को भी किस तरह से रखा जाता है. जिससे देश के लोगों को परेशानियां नहीं होनी चाहिए.
आयोजकों का कहना है कि 'जब देश की प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं, जैसे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तब इस मंच के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान देश की स्थिरता के लिए कितना आवश्यक है. युवाओं को यह बताया जा रहा है कि संसद हो या सड़क अपनी बात कैसे रखनी है और कैसे उसे आगे पहुंचाया जाता है. जिसकी वजह से यह आयोजन फिर से चर्चा में है.
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