इंसानी समाज में अगर कोई सबसे पुरानी और मजबूत संस्था है, तो वह शादी है. यह शादी ही है जो हर संस्कृति का हिस्सा है. भारतीय समाज में तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. भारतीय परिवारों में शादियां माता-पिता या घर के बड़े-बुजुर्ग तय करते हैं.
लेकिन पिछले कुछ दशकों में ये ट्रेंड बदला है. नौकरी, शादी और अपना परिवार बसाने के इस सीधे-सादे और सदियों पुराने रास्ते पर चलने की बजाय अब युवा अकेले रहना पसंद कर रहे हैं.
आंकड़े और कुछ सर्वे इस ओर इशारा करते हैं कि (कुछ) भारतीय युवाओं में शादी को लेकर क्रेज कम होता जा रहा है.
भारत में शादी न करने वाले कितने?
इसे कुछ आंकड़ों से समझते हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक, 20 साल से ज्यादा उम्र के 9.51 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे थे, जिनकी शादी नहीं हुई थी. इनमें 6.87 करोड़ पुरुष और 2.63 करोड़ से ज्यादा महिलाएं थीं.
2011 की जनगणना से सामने आता है कि उस समय 20 साल से ज्यादा उम्र की जितनी आबादी थी, उनमें से 13% से ज्यादा ने शादी नहीं की थी.
अब इन आंकड़ों को 2001 की जनगणना से तुलना करें तो कुछ ट्रेंड समझ में आता है. 2001 की जनगणना में 20 साल से ज्यादा उम्र के 6.53 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे थे, जिन्होंने शादी नहीं की थी. इनमें 4.97 करोड़ पुरुष और 1.56 करोड़ महिलाएं थीं.
यानी, 2001 तक 20 साल से ज्यादा उम्र के 11.5% भारतीयों की शादी नहीं हुई थी. 2011 तक यह आंकड़ा थोड़ा बढ़ गया. अब 2026 तक यह संख्या और बढ़ी होगी.
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क्या शादी से दूर भाग रहे हैं भारतीय?
शादी न करने वालों के ऐसे आंकड़े दो तस्वीर बताते हैं. पहली- या तो लोग शादी से बच रहे हैं. और दूसरी- अब शादी कर भी रहे हैं तो थोड़ा समय लेकर. पुराने जमाने की तरह कम उम्र में शादी नहीं हो रही है.
शादी न करने वालों के आंकड़े बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि अब कम उम्र में शादियां काफी हद तक कम हो गई हैं. केंद्र सरकार की 2022 में 'यूथ इन इंडिया' रिपोर्ट आई थी. इसमें नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के डेटा के हवाले से बताया था कि 2005-06 में लगभग 12% लड़कियां ऐसी थीं, जिनकी 15 साल की उम्र तक शादी हो गई थी. 2019-21 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 1.7% हो गया.
इसी तरह 2005-06 में 25 से 29 साल की उम्र की 72.4% महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने 25 साल की उम्र तक शादी कर ली थी. 2019-21 में 52.8% महिलाएं ही ऐसी रहीं, जिनकी शादी 25 साल की उम्र तक हो गई थी.
इसी रिपोर्ट में सामने आया था कि भारत में शादी न करने वालों की आबादी बढ़ी है. 2005-06 में 25 से 29 साल की 6% से कम महिलाएं थीं जिनकी शादी नहीं हुई थी. अब 10% से ज्यादा हैं. इसी तरह 2005-06 में इसी उम्र के 30% से कम पुरुषों की शादी नहीं हुई थी, लेकिन अब ये आंकड़ा लगभग 42% है.
शादी न करने वालों में पुरुष और महिलाएं लगभग बराबर रास्ते पर चल रहे हैं. 'यूथ इन इंडिया 2022' के मुताबिक, 2011 तक 15 से 29 साल की उम्र के 11.7% भारतीय कुंवारे थे, जिनकी संख्या 2019 तक बढ़कर 23% पहुंच गई. 2011 तक इसी उम्र के लगभग 21% पुरुष ऐसे थे जिन्होंने शादी नहीं की थी. 2019 तक इनकी संख्या बढ़कर 26% से ज्यादा हो गई. इसी तरह, 2011 तक इतनी ही उम्र की लगभग 14% महिलाओं ने शादी नहीं की थी, जबकि 2019 तक लगभग 20% महिलाएं ऐसी थीं.
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शादी का फ्यूचर क्या है?
आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में शादी को लेकर ट्रेंड बदल रहा है. ज्यादातर युवा या तो अकेले रहना पसंद कर रहे हैं या फिर देरी से शादी कर रहे हैं.
पिछले साल डेटिंग ऐप QuackQuack ने एक सर्वे किया था, जिसमें सामने आया था कि 28 साल से ज्यादा उम्र के 39% लोगों ने शादी को 'ऑप्शनल' बताया था. सर्वे से पता चलता है कि मेट्रो और सबअर्बन इलाकों में रहने वाले 28 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का मानना है कि शादी अब जिंदगी का कोई जरूरी हिस्सा नहीं, यह एक 'ऑप्शनल' है.
ऐप के फाउंडर रवि मित्तल ने उस वक्त कहा था, 'आजकल डेटिंग करने वाले 5 में से 4 लोगों को खुद के बारे में बेहतर समझ है और उनकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं. वे शादी या कमिटमेंट के खिलाफ नहीं हैं. हमें यह समझने की जरूरत है कि वे बस अपनी मर्जी से वह चुनना चाहते हैं जो उनके लिए सबसे अच्छा हो, न कि समाज की तय समय सीमा और उम्मीदों को मानना चाहते हैं.'
इतना ही नहीं, युवा अब वर्चुअल डेटिंग की ओर भी बढ़ रहे हैं. सर्वे में शामिल 4 में से 2 महिलाओं का मानना था कि कमिटमेंट के लिए अब शारीरिक रूप से पास होना या कागज के किसी टुकड़े की जरूरत नहीं है.
कुल मिलाकर, आंकड़ों और सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि शादी को लेकर ट्रेंड बदल रहा है और युवाओं के लिए शादी से ज्यादा करियर और सेटल होना ज्यादा मायने रखता है.
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