- मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग कर दिया क्योंकि यह राजनीतिक दल का अंग बन गया था
- पुलिस सुधार के लिए तीन महीने में नया ढांचा तैयार करने हेतु हाई-लेवल कमेटी का गठन किया गया है
- टोटो, ऑटो चालकों और फेरीवालों से अवैध वसूली पर सख्ती की जाएगी
पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ताबड़तोड़ एक्शन ले रहे हैं. इसी कड़ी में शनिवार को उन्होंने 'पुलिस कल्याण बोर्ड' को भंग कर दिया. इससे ममता बनर्जी की सरकार में बनाया गया था. पुलिस प्रशासन के साथ बैठक में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह बोर्ड असल में एक राजनीतिक दल का ही अंग बन गया था. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पहले शासक का कानून चलता था लेकिन अब कानून का राज होगा. शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और 7 दिन में वह कई बड़े फैसले ले चुके हैं.
'कुछ अफसरों को मिला फायदा'
मुख्यमंत्री शुभेंदु ने कहा कि पुलिस कल्याण बोर्ड मूल रूप से बहुत अच्छे इरादों के साथ बनाया गया था. लेकिन, समय के साथ, यह असल में एक राजनीतिक दल का ही अंग बन गया. नतीजतन, यह सवाल बना रहा कि आम पुलिसकर्मियों को असल में कितना कल्याणकारी लाभ मिला.
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, यह साफ था कि शांतनु सिन्हा बिस्वास और बिजितेश्वर राउत जैसे कुछ अधिकारियों को विशेष सुविधाएं मिली थीं. इसलिए, पुलिस कल्याण बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला किया गया.
मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि अगर किसी आम नागरिक को पुलिस परेशान करती है, तो वह सीधे पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज करा सकता है. कानून सबके लिए बराबर है.
सीएम शुभेंदु ने पुलिस सुधारों के लिए 3 महीने के भीतर एक नया ढांचा तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है.
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टोटो-ऑटो वालों से वसूली पर जीरो टॉलरेंस
शुभेंदु अधिकारी ने टोटो चालकों, ऑटो ड्राइवरों और फेरीवालों से होने वाली अवैध वसूली पर सख्ती दिखाई. उन्होंने कहा कि पुलिस या लोकल गुंडों की सड़क पर गाड़ी रोककर टोल के नाम पर वसूली अब बर्दाश्त नहीं होगी.
उन्होंने जनता से कहा कि अगर कोई टोटो, ऑटो या फेरीवाले से पैसे मांगे तो सीधे पुलिस को सूचना दें. सीएम ने पुलिस को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सख्ती से काम करने का निर्देश दिया. साथ ही ये भी कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा. कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले जवानों पर हमला करने वालों पर सबसे कड़ी कार्रवाई होगी.
इस फैसले को बंगाल पुलिस प्रशासन में बड़े बदलाव और राजनीतिकरण खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
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7 दिन में 7 बड़े फैसले
1. आरजी कर केस में कार्रवाई: आरजी कर रेप और मर्डर केस में कार्रवाई करते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने तीन सीनियर IPS को निलंबित कर दिया है. शुभेंदु ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को निलंबित करने का आदेश दिया गया है.
2. आलू-प्याज की बिक्री पर फैसला: ममता सरकार ने बंगाल से बाहर दूसरे राज्यों में आलू-प्याज, अनाज, तिलहन, दलहन, फल-सब्जियां, पशु उत्पाद समेत जरूरी चीजों को बेचने पर पाबंदी लगाई थी. शुभेंदु सरकार ने इस फैसले को पलट दिया है.
3. वंदे मातरम को लेकर फैसला: शुभेंदु सरकार ने सभी सरकारी और सरकारी मदद से चलने वाले स्कूलों में राष्ट्रगान 'वंदे मातरम्' को गाना अनिवार्य कर दिया है. यह फैसला 18 मई से लागू होगा.
4. लाउडस्पीकर और गोवंश की हत्या पर नियम: शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को निर्देश दिया है कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज को तय सीमा में रखा जाए और धार्मिक गतिविधियों के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति न बनने दी जाए. साथ ही गोवंश की हत्या को लेकर भी नियम बदल दिए हैं. अब कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से गाय-बैल-भैंस जैसे गोवंश को मार नहीं सकता. इसके लिए पहले सर्टिफिकेट लेना होगा.
5. बीएसएफ को जमीन: ममता सरकार में बीएसएफ (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) को फेंसिंग के लिए जमीन नहीं मिल रही थी. शुभेंदु अधिकारी ने पहली ही कैबिनेट में BSF को जमीन देने का फैसला लिया. 45 दिन के अंदर BSF को जमीन मिल जाएगी.
6. आयुष्मान समेत कई योजनाएं लागू: ममता सरकार में केंद्र सरकार की कई योजनाओं को बंगाल में लागू नहीं किया गया था. अब शुभेंदु सरकार में सभी योजनाओं को लागू कर दिया गया है. इनमें आयुष्मान भारत योजना भी शामिल है.
7. BNS लागू, IPS-IAS को ट्रेनिंग: ममता सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू नहीं की थी. शुभेंदु सरकार ने बंगाल में भी इसे लागू कर दिया है. इसके साथ ही IPS और IAS को केंद्रीय ट्रेनिंग की अनुमति भी दी जाएगी.
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