- SC ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़े मामले के रिकॉर्ड NIA को सौंपने का आदेश दिया.
- न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची ने बंगाल के चीफ सेक्रेटरी के फोन बंद रहने और संपर्क न होने पर कड़ी फटकार लगाई.
- CJI सूर्य कांत ने पूछा कि क्या राज्य के मुख्य सचिव उन्हें गंभीरता से नहीं लेते और संपर्क से बचते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को मालदा में एसआईआर के काम में शामिल न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़े मामले के रिकॉर्ड एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया. साथ ही SC ने बंगाल के चीफ सेक्रेटरी को फटकार भी लगाई है. वहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी के रवैये पर सवाल उठाते हुए उनसे जवाब तलब किया और टिप्पणी की कि उनका फोन अक्सर स्विच ऑफ रहता है, यहां तक कि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. CJI ने कहा कि नौकरशाही के इस बेहद अड़ियल रवैये का सामना हमें दूसरे राज्यों में भी करना पड़ रहा है.
'CJI को गंभीरता से नहीं लेते..'
CJI सूर्य कांत ने राज्य के मुख्य सचिव से पूछा कि आप मुख्य न्यायाधीश को भी गंभीरता से नहीं लेते? वो भी आपसे संपर्क नहीं कर सकते. वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश मुख्य सचिव ने कहा कि मैं एक बैठक के लिए दिल्ली आया था. 1 अप्रैल को दो बजे से चार बजे तक मैं फ्लाइट में था. मेरे फोन पर कोलकाता से कोई कॉल नहीं आई थी.
जस्टिस बागची ने कहा कि शाम को फोन आए होंगे, यदि आपने मोबाइल नंबर साझा किए होते तो. आपके फोन अक्सर बंद रहते हैं. अगर वो खुले होते या आप फोन उठाते तो यह हाईकोर्ट प्रशासन के लिए बेहद मददगार होता.
'अपने आप को कम ऊंचा रखिए..'
चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि मेरे नंबर उनके लिए उपलब्ध है. एक और नंबर है जो ज्यादा सिक्योर और कनेक्टिविटी बेहतर है. जस्टिस बागची ने कहा कि आपकी सुरक्षा कुछ ज्यादा ही है. आप इतने ऊंचे नहीं हो सकते कि मुख्य न्यायाधीश की आप तक पहुंच न हो. अपने आप को कम ऊंचा रखिए, ताकि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जैसे यानी आम सेवक आपसे जुड़ सकें
सीजेआई ने चीफ सेक्रेटरी से कहा कि आपको हाईकोर्ट चीफ जस्टिस से माफी मांगनी चाहिए. ताकि वो सब रिडिम किया जा सके, जो पहले आपने किया है. यह आपके प्रशासन और पुलिस प्राधिकारों की सरासर विफलता है कि हमें न्यायिक अधिकारियों को शक्ति देनी पड़ी है.
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